
हापुड़।
भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री एवं महान राष्ट्रनायक लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय सैनिक संस्था, जिला इकाई हापुड़ के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने रेलवे रोड स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान संस्था के पदाधिकारियों और सदस्यों ने शास्त्री जी के जीवन, उनके संघर्ष, सादगी, ईमानदारी, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के आदर्शों को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सैनिक संस्था के जिला अध्यक्ष मुकेश त्यागी ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री का संपूर्ण जीवन देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने अत्यंत साधारण जीवन जीते हुए देश के सर्वोच्च राजनीतिक पद तक पहुंचकर यह साबित किया कि व्यक्ति की महानता उसके पद या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि उसके विचारों, आचरण और राष्ट्र के प्रति समर्पण से तय होती है।
उन्होंने कहा कि शास्त्री जी सादगी, सत्यनिष्ठा, अनुशासन, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा के प्रतीक थे। उनका जीवन आज भी सार्वजनिक जीवन में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए आदर्श है। उन्होंने अपने व्यवहार और कार्यों से यह संदेश दिया कि राष्ट्रसेवा के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, ईमानदारी और जिम्मेदारी की भावना सबसे अधिक आवश्यक है।
सादगी और ईमानदारी की मिसाल थे शास्त्री जी
जिला अध्यक्ष मुकेश त्यागी ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री का जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया और देश की आजादी के बाद भी राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि शास्त्री जी का व्यक्तित्व जितना सरल था, उनके निर्णयों में उतनी ही दृढ़ता दिखाई देती थी। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के रूप में कठिन परिस्थितियों का सामना किया और देशवासियों में आत्मविश्वास पैदा किया।
शास्त्री जी की सादगी का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में जब सार्वजनिक जीवन में सुविधाओं और पद की चर्चा अधिक होती है, ऐसे समय में शास्त्री जी का जीवन यह याद दिलाता है कि ईमानदारी और सादगी भी नेतृत्व की सबसे बड़ी ताकत हो सकती है।
‘जय जवान, जय किसान’ बना राष्ट्रीय चेतना का मंत्र
कार्यक्रम में शास्त्री जी के प्रसिद्ध नारे “जय जवान, जय किसान” का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। पदाधिकारियों ने कहा कि इस अमर मंत्र के माध्यम से उन्होंने देश के सैनिकों और किसानों के महत्व को राष्ट्रीय चेतना के केंद्र में स्थापित किया।
जिला अध्यक्ष ने कहा कि देश की सुरक्षा में जवानों की भूमिका और देश की खाद्य सुरक्षा में किसानों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। शास्त्री जी ने दोनों वर्गों के सम्मान और योगदान को एक साथ रेखांकित करते हुए देशवासियों में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास पैदा किया।
उन्होंने कहा कि शास्त्री जी का यह संदेश आज भी प्रासंगिक है। देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिक और देश के लिए अन्न पैदा करने वाले किसान राष्ट्र की आधारशिला हैं। दोनों के योगदान का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय सैनिक संस्था के पदाधिकारी एवं सदस्य रेलवे रोड स्थित लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा के समक्ष एकत्रित हुए। वहां सभी ने शास्त्री जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तथा पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इस दौरान उपस्थित लोगों ने शास्त्री जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया। पदाधिकारियों ने कहा कि देश के महान नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन से नई पीढ़ी को परिचित कराना आवश्यक है, ताकि युवा उनके संघर्षों और त्याग से प्रेरणा ले सकें।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि शास्त्री जी का जीवन केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं है, बल्कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का स्रोत है। उनके आदर्शों को अपनाकर समाज में ईमानदारी, अनुशासन और सेवा की भावना को मजबूत किया जा सकता है।
राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संकल्प
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सैनिक संस्था के सदस्यों ने शास्त्री जी के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। सदस्यों ने कहा कि देश की एकता और अखंडता को मजबूत करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
उन्होंने समाज में देशभक्ति, अनुशासन, सेवा और आपसी भाईचारे की भावना को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। पदाधिकारियों ने कहा कि राष्ट्र की मजबूती केवल सरकार या सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि शास्त्री जी ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर कार्य किया जा सकता है। उनके विचारों को अपने जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

युवाओं को शास्त्री जी के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील
कार्यक्रम में उपस्थित पदाधिकारियों ने युवाओं से लाल बहादुर शास्त्री के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को यह समझने की जरूरत है कि सफलता केवल आर्थिक उपलब्धियों या व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नाम नहीं है। समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि शास्त्री जी ने अत्यंत सामान्य परिस्थितियों से निकलकर देश का नेतृत्व किया। उनके जीवन में संघर्ष था, लेकिन उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों का त्याग नहीं किया। यही कारण है कि आज भी देश उन्हें सम्मान और श्रद्धा के साथ याद करता है।
पदाधिकारियों ने कहा कि यदि युवा शास्त्री जी की ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
राष्ट्रीय एकता और अखंडता का संदेश
राष्ट्रीय सैनिक संस्था के सदस्यों ने कहा कि वर्तमान समय में देश की एकता और अखंडता को मजबूत रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। शास्त्री जी के जीवन से प्रेरणा लेकर नागरिकों को जाति, धर्म और क्षेत्र से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में कार्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल नारों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह हमारे व्यवहार और दैनिक जीवन के कार्यों में भी दिखाई देनी चाहिए। ईमानदारी से अपने काम को करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना, जरूरतमंदों की सहायता करना और देश के कानूनों का पालन करना भी राष्ट्रसेवा का हिस्सा है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सदस्यों ने शास्त्री जी की प्रतिमा के समक्ष उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
ये पदाधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर राष्ट्रीय सैनिक संस्था के जिला अध्यक्ष मुकेश त्यागी, जिला प्रवक्ता ज्ञानेंद्र त्यागी, जिला सचिव मुकेश प्रजापति, जिला संरक्षक शशांक मुनि त्यागी, तहसील उपाध्यक्ष तारा चंद जाटव, सहित फारुख अहमद और विजय चौधरी मौजूद रहे।
सभी पदाधिकारियों ने लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा देता रहेगा। उनकी सादगी, ईमानदारी, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद करते हुए सभी ने देश की एकता एवं अखंडता को मजबूत बनाने तथा समाज में सेवा और देशभक्ति की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
शास्त्री जी का जीवन हमें यही संदेश देता है कि सच्ची राष्ट्रसेवा पद और प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि ईमानदार सोच, त्याग, अनुशासन और कर्तव्य के प्रति निष्ठा से होती है। उनके आदर्शों को अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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