Sanitation program : जल संरक्षण जागरूकता अभियान के तहत निवाई माफी तालाब में चला श्रमदान और स्वच्छता कार्यक्रम

दमोह। मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे “जल गंगा संवर्धन अभियान 2026” के अंतर्गत दमोह जिले के ग्राम निवाई माफी में एक प्रेरणादायक श्रमदान एवं सफाई अभियान आयोजित किया गया। इस अभियान के माध्यम से ग्रामीणों को जल संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया तथा सामूहिक सहभागिता के जरिए पुराने जल स्रोतों की सफाई का कार्य किया गया। कार्यक्रम में ग्रामवासियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिलाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर जल संरक्षण का संकल्प लिया।
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा पूरे प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य पुराने जल स्रोतों जैसे तालाब, कुएं, बावड़ी और नदियों की साफ-सफाई, संरक्षण तथा पुनर्जीवन के माध्यम से जल संकट को कम करना है। अभियान के तहत विभिन्न जिलों में प्रस्फुटन समितियों एवं नवांकुर संस्थाओं के सहयोग से श्रमदान, स्वच्छता अभियान, जल सेवा समागम और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इसी श्रृंखला में विकासखंड हटा के सेक्टर हिनोता कला अंतर्गत ग्राम निवाई माफी के प्राचीन तालाब में सामूहिक श्रमदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम नवांकुर संस्था संत नामदेव शिक्षा समिति हटा द्वारा ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति निवाई माफी के सहयोग से संपन्न हुआ। सुबह 9 बजे से शुरू हुए इस अभियान में ग्रामीणों ने तालाब की सफाई कर जल स्रोत को संरक्षित करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद विकासखंड हटा की समन्वयक पुष्पा सिंह ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज को जागरूक करने का एक बड़ा प्रयास है। उन्होंने कहा कि जल ही जीवन का आधार है और आने वाले समय में यदि जल संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य की पीढ़ियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह अपने आसपास के जल स्रोतों की सफाई और संरक्षण में योगदान दे। तालाब, कुएं और बावड़ियां केवल जल संग्रहण के साधन नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण जीवन और पर्यावरण संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया तो भूजल स्तर लगातार गिरता जाएगा और जल संकट और गहरा हो सकता है।
श्रमदान कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने तालाब के आसपास फैली गंदगी को हटाया तथा जल स्रोत को स्वच्छ बनाने का सामूहिक प्रयास किया। महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भी उत्साह के साथ भाग लेकर यह संदेश दिया कि जल संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे समाज का कर्तव्य है।

कार्यक्रम के बाद संस्था संत नामदेव शिक्षा समिति हटा के प्रतिनिधि सुरेश कुमार नामदेव द्वारा जल संरक्षण संवर्धन को लेकर संकल्प एवं शपथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान उपस्थित सभी ग्रामीणों को जल का समुचित उपयोग करने, पानी की बर्बादी रोकने तथा वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने की शपथ दिलाई गई।
शपथ कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि यदि आज जल बचाने के प्रयास नहीं किए गए तो भविष्य में पीने के पानी की समस्या गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए हर व्यक्ति को अपने स्तर पर पानी बचाने के उपाय अपनाने चाहिए। लोगों को घरों में पानी की बर्बादी रोकने, वर्षा जल संचयन करने और प्राकृतिक जल स्रोतों को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित परामर्शदाता शिवानी लखेरा ने कहा कि जल संरक्षण केवल पर्यावरण की रक्षा का विषय नहीं बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी, जल का अत्यधिक दोहन और जल स्रोतों की उपेक्षा के कारण आज कई क्षेत्रों में जल संकट गहराता जा रहा है। ऐसे अभियानों के माध्यम से समाज में जागरूकता लाना अत्यंत आवश्यक है।
समाजसेवी कृष्णकांत लखेरा ने भी ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि समाज संगठित होकर कार्य करे तो जल संकट जैसी समस्या का समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि गांवों में पुराने तालाब और कुएं कभी जल का मुख्य स्रोत हुआ करते थे, लेकिन समय के साथ उनकी उपेक्षा हुई। अब समय आ गया है कि इन जल स्रोतों को पुनर्जीवित कर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित किया जाए।
कार्यक्रम में ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति निवाई माफी के सचिव धर्मेंद्र रावत, सदस्य दुर्गेश पटेल, रामस्वरूप ज्योतिषी, प्रतिज्ञा विश्वकर्मा और शिखा विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। महिलाओं और बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बनाया।
अभियान के दौरान जल संरक्षण से जुड़े नारों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। “जल है तो कल है”, “पानी बचाओ, जीवन बचाओ” और “हर बूंद कीमती है” जैसे नारों के साथ ग्रामीणों ने जल संरक्षण का संदेश दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि जल संरक्षण के लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब गांव और समाज स्वयं आगे बढ़कर जल स्रोतों की रक्षा करेंगे, तभी स्थायी समाधान संभव हो सकेगा।
जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 जैसे कार्यक्रम समाज को यह समझाने का कार्य कर रहे हैं कि जल संकट केवल भविष्य की समस्या नहीं बल्कि वर्तमान की भी चुनौती है। यदि अभी से जल संरक्षण के प्रति गंभीर प्रयास किए जाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वच्छ जल उपलब्ध कराया जा सकता है।
ग्राम निवाई माफी में आयोजित यह श्रमदान एवं सफाई अभियान केवल तालाब की सफाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बन गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब समाज और प्रशासन मिलकर कार्य करते हैं, तब पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्य आसानी से हासिल किए जा सकते हैं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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