Sumit Shukla : वृक्षारोपण के साथ पौधों को बचाने के लिए जन-जागरूकता जरूरी: समाजसेवी सुमित शुक्ला

बांदा। बढ़ते तापमान, घटते हरित क्षेत्र और पर्यावरणीय असंतुलन के बीच वृक्षारोपण और पौधों के संरक्षण को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। इसी कड़ी में समाजसेवी सुमित शुक्ला ने जनपदवासियों से अपील करते हुए कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण और संवर्धन भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि समाज, मीडिया, प्रशासन, जनप्रतिनिधि और आम नागरिक मिलकर इस दिशा में सामूहिक प्रयास करें, तभी पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य सफल हो सकेगा।
समाजसेवी सुमित शुक्ला ने कहा कि वृक्ष हमारे जीवन का आधार हैं। जन्म से लेकर जीवन के अंतिम पड़ाव तक वृक्ष प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मानव जीवन को सहारा देते हैं। भोजन, फल, छाया, औषधि, वर्षा, शुद्ध वायु, जल संरक्षण, मिट्टी का संरक्षण और जैव विविधता के संतुलन में वृक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद आधुनिक जीवनशैली और बढ़ते शहरीकरण के कारण वृक्षों की संख्या लगातार कम होती जा रही है, जिसका दुष्प्रभाव आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी के रूप में झेल रही है।
उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज प्रकृति के महत्व को भली-भांति समझते थे। वे केवल अपने लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए पेड़-पौधे लगाते थे। गांवों, खेतों, तालाबों और सड़कों के किनारे लगाए गए विशाल वृक्ष आज भी उनकी दूरदर्शिता और प्रकृति प्रेम के जीवंत प्रमाण हैं। दुर्भाग्यवश वर्तमान समय में यह सोच धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है। लोग विकास की दौड़ में प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं और वृक्षों के महत्व को भूलते जा रहे हैं।
सुमित शुक्ला ने कहा कि इस वर्ष बांदा जनपद सहित बुंदेलखंड क्षेत्र ने भीषण गर्मी और लू का सामना किया। लगातार बढ़ते तापमान ने आम जनजीवन को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि इसके कई कारण हो सकते हैं, लेकिन उपयोगी और बड़े वृक्षों की घटती संख्या भी एक महत्वपूर्ण कारण है। यदि समय रहते व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण और पौधों का संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
उन्होंने मीडिया जगत से जुड़े पत्रकारों, समाजसेवियों, प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और सामाजिक संगठनों से विशेष अपील करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी अभियान न मानकर जन-आंदोलन का रूप देना होगा। जब तक समाज का प्रत्येक व्यक्ति इस अभियान को अपना व्यक्तिगत दायित्व नहीं समझेगा, तब तक अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो सकेंगे।
सुमित शुक्ला ने कहा कि प्रत्येक वर्ष बरसात के मौसम में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाए जाते हैं। ग्राम पंचायतों, सरकारी विभागों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा हजारों पौधे लगाए जाते हैं। इन अभियानों की तस्वीरें और समाचार भी व्यापक रूप से सामने आते हैं, लेकिन वर्ष के अंत तक अधिकांश पौधे सूख जाते हैं या नष्ट हो जाते हैं। कई स्थानों पर लगाए गए पौधों का कोई पता नहीं चलता। इससे स्पष्ट होता है कि वृक्षारोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा।

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि वृक्षारोपण को केवल औपचारिकता या फोटो खिंचवाने तक सीमित रखने की प्रवृत्ति समाप्त की जाए। पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित देखभाल, सिंचाई, सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। यदि एक पौधे को परिवार के सदस्य की तरह अपनाकर उसकी देखभाल की जाए, तो वही पौधा आने वाले वर्षों में विशाल वृक्ष बनकर समाज और पर्यावरण की सेवा करेगा।
समाजसेवी ने सुझाव दिया कि प्रत्येक व्यक्ति वर्ष में कम से कम एक या दो पौधे अवश्य लगाए, लेकिन उतने ही पौधे लगाए जिनकी देखभाल वह पूरी जिम्मेदारी के साथ कर सके। उन्होंने कहा कि संख्या से अधिक गुणवत्ता और संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए। यदि कम पौधे भी पूरी तरह सुरक्षित रहकर वृक्ष बन जाएं, तो उनका लाभ हजारों असुरक्षित पौधों से कहीं अधिक होगा।
उन्होंने विद्यालयों और महाविद्यालयों में पर्यावरण संरक्षण संबंधी विशेष कार्यक्रम आयोजित करने, विद्यार्थियों को पौधों की जिम्मेदारी सौंपने तथा प्रत्येक परिवार को कम से कम एक पौधा गोद लेने की पहल करने का सुझाव भी दिया। इससे नई पीढ़ी में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।
सुमित शुक्ला ने कहा कि मीडिया की भूमिका इस अभियान में अत्यंत महत्वपूर्ण है। समाचार पत्र, डिजिटल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जा सकता है। यदि मीडिया वृक्षारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण की सकारात्मक कहानियों और सफल उदाहरणों को प्रमुखता से प्रस्तुत करे, तो समाज में जागरूकता और सहभागिता दोनों बढ़ेंगी।
उन्होंने प्रशासन से भी आग्रह किया कि वृक्षारोपण अभियानों की नियमित निगरानी की जाए तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। ग्राम पंचायतों, नगर निकायों और विभिन्न विभागों को पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए ताकि लगाए गए पौधे सुरक्षित रह सकें।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था का कार्य नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का नैतिक और सामाजिक दायित्व है। स्वच्छ और हरित वातावरण आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ी धरोहर है। यदि आज हम प्रकृति की रक्षा करेंगे, तो भविष्य में प्रकृति भी हमारी रक्षा करेगी।
अंत में समाजसेवी सुमित शुक्ला ने जनपदवासियों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि पेड़-पौधों को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा मानें। केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें बचाने और बड़ा करने का संकल्प लें। जब समाज के प्रत्येक व्यक्ति के भीतर वृक्षों के प्रति अपनत्व और जिम्मेदारी का भाव जागृत होगा, तभी पर्यावरण संरक्षण का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, हरित और सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि इस वर्ष वृक्षारोपण को एक जन-आंदोलन का स्वरूप दें और “एक पौधा–एक जिम्मेदारी” के संकल्प के साथ प्रकृति संरक्षण की इस पवित्र मुहिम से जुड़ें।..
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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