The victims demanded strict action : मेरठ में बैंक मैनेजर बनकर ठगी का आरोप, पीड़ितों ने सख्त कार्रवाई और संपत्ति जांच की मांग की

मेरठ शहर में लोन और नौकरी दिलाने के नाम पर बड़े पैमाने पर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें शास्त्री नगर प्रवेश विहार निवासी रविंद्र कश्यप पर कई लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ितों का कहना है कि आरोपी खुद को स्टेट बैंक का मैनेजर बताकर लोगों को नौकरी और लोन दिलाने का झांसा देता था और इसके बदले में उनसे ऑनलाइन भुगतान, आरटीजीएस और नकद के माध्यम से मोटी रकम वसूल करता था। लेकिन लंबे समय तक इंतजार के बाद भी न तो नौकरी मिली और न ही लोन की प्रक्रिया पूरी हुई।
मामला धीरे-धीरे बढ़ता गया और अब कई पीड़ित सामने आकर अपनी आपबीती बता रहे हैं। एक युवती ने आरोप लगाया कि उसने लोन दिलाने के नाम पर आरोपी को पैसे दिए थे, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी उसे कोई लाभ नहीं मिला। जब उसने पैसे वापस मांगने के लिए आरोपी के घर संपर्क किया, तो उसके साथ कथित रूप से मारपीट और धमकी दी गई। पीड़िता का आरोप है कि इस घटना में आरोपी के परिजन भी शामिल थे और इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ।
इसी तरह हसनपुर निवासी एक अन्य पीड़ित ने आरोप लगाया कि उसने अपनी पत्नी की नौकरी के लिए रविंद्र कश्यप पर भरोसा किया और उसके खाते में आरटीजीएस के माध्यम से बड़ी रकम ट्रांसफर की। लेकिन न तो नौकरी मिली और न ही पैसा वापस किया गया। पीड़ित का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद उसे न्याय नहीं मिला।
पीड़ितों के अनुसार यह कोई एक-दो मामले नहीं हैं, बल्कि दर्जनों लोग इस तरह की ठगी का शिकार हुए हैं। कई लोगों ने बताया कि आरोपी ने उन्हें भरोसे में लेने के लिए बैंकिंग सिस्टम, सरकारी नौकरी और लोन प्रक्रिया की जानकारी का गलत उपयोग किया। कुछ मामलों में लोगों ने अपनी जमीन, मकान और गहने तक गिरवी रखकर पैसे दिए, जो आज तक वापस नहीं मिले।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रविंद्र कश्यप ने वर्षों से इस तरह की गतिविधियों को अंजाम दिया है और अब तक कई परिवार उसकी वजह से आर्थिक संकट में आ चुके हैं। कई पीड़ितों का आरोप है कि वह लगातार नए लोगों को अपने जाल में फंसाकर पैसे ऐंठता रहा है।
पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया है कि इस मामले में पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। उनका कहना है कि शिकायतें पीवीएस चौकी और मेडिकल थाना तक पहुंची हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कुछ पीड़ितों का आरोप है कि स्थानीय चौकी स्तर पर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है, जिससे आरोपी को संरक्षण मिलने की आशंका जताई जा रही है।

पीड़ित महिलाओं और अन्य लोगों का कहना है कि वे लगातार थानों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है। उनका आरोप है कि पुलिस की लापरवाही के कारण आरोपी अभी भी खुलेआम लोगों से संपर्क कर रहा है और ठगी की गतिविधियां जारी रखे हुए है।
एक पीड़ित महिला ने कहा कि उसने कई बार शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन हर बार उसे सिर्फ आश्वासन मिला। उसका कहना है कि प्रशासनिक कार्रवाई न होने के कारण आरोपी का हौसला बढ़ता जा रहा है और वह अन्य लोगों को भी धोखा दे सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि आरोपी की संपत्ति की विस्तृत जांच की जाए। लोगों का कहना है कि इतने कम समय में उसने जो संपत्ति अर्जित की है, उसकी जांच जरूरी है ताकि यह पता चल सके कि यह पैसा कहां से आया। पीड़ितों ने यह भी मांग की है कि यदि संपत्ति अवैध पाई जाती है तो उसे जब्त किया जाए।
पीड़ित परिवारों ने बताया कि इस ठगी के कारण कई घरों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। कुछ परिवार कर्ज में डूब गए हैं और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। कई लोगों ने बताया कि उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतों के लिए रखे पैसे भी इस लालच में गंवा दिए।
सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि नौकरी और लोन के नाम पर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। संगठनों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में पुलिस को तुरंत और सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि अन्य लोग ठगी का शिकार न हों।
पीड़ितों ने प्रशासन से मांग की है कि रविंद्र कश्यप के खिलाफ सभी संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि पुलिस की भूमिका की भी जांच हो सके।
उन्होंने यह भी मांग की है कि पीड़ितों को जल्द से जल्द न्याय दिलाया जाए और उनके पैसे वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाए। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो और अधिक लोग इस ठगी का शिकार हो सकते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार के मामलों में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और धमकी जैसी धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपी को कठोर सजा और संपत्ति जब्ती जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल यह मामला मेरठ में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग पुलिस जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें केवल न्याय चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की ठगी का शिकार न हो सके।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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