Tomorrow, a new one : गिरगिट पार्टी को कोई अगर गधा कह दे – तो ये कल एक नई “ढिँँचु ढेँचु गधा पार्टी” बना लेगें

“ढिँँचु ढेँचु गधा पार्टी” के पाकस्थान और बंगलादेश में फॉलोवर भी भरपूर बन जायेगें तो “ढिँँचु ढेँचु गधा पार्टी” को तत्काल पाकस्थान और बंगलादेश में अपनी पार्टी बना लेनी चाहिए और सरकार बनाकर गरीबों की सेवा करनी चाहि और दोनों देशों की गरीबी और बेरोजगारी तुरन्त विदेशों से भीख माँग माँग कर दूर करनी चाहिए क्युकी गिरगिट पार्टी, कॉकरोज पार्टी और गधा पार्टी के तीनो ढिँँचु ढेँचु गधा नेता तो ख़ुद विदेशों में ही मस्त रहके भारत विरोधी, बंग्लादेशी और पाकिस्तानी समर्थकों के लाइक और शेयर से पैसे कमा रहे हैं और यहां के युवाओं को भड़का रहे हैं। बड़ा सवाल – अब सोचने वाली बात यह है कि भारत में जो लोग उसी “गिरगिट पार्टी” का समर्थन कर रहे हैं, कहीं उनकी सोच भी उसी दिशा में तो नहीं जा रही? अब अराजकता, हिंसा और भ्रम फैलाकर सत्ता पाने का सपना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है यह एक माओवादी नक्सलवादी तरीक़ा है। देश आज यह समझ रहा है कि भारत की प्रगति को रोकने वाली शक्तियों के साथ आखिर कौन खड़ा है? देश विरोधी पार्टियों हमारा सीधा सा सवाल है क्या यह सब विदेशी शक्तियों के प्रभाव में जानबूझकर हाथ मिला कर किया जा रहा है, या फिर अनजाने में आप उनके हाथों का हथियार बनते जा रहे हैं?
नई दिल्ली। यूऐस निवासी आम आदमी पार्टी नेता अभिषेक दीपके,- जर्मनी निवासी कांग्रेस नेता ध्रुव राठी और ऑस्ट्रेलिया निवासी आम आदमी पार्टी नेता अर्पित शर्मा द्वारा भ्रम और अराजकता फैलाने का कड़ा विरोध करते हुए लोगों ने दो टूक साफ़ साफ़ शब्दों में कहा है कि गिरगिट पार्टी को कोई अगर गधा कह दे – तो ये कल एक नई “ढिँँचु ढेँचु गधा पार्टी” बना लेगें।”ढिँँचु ढेँचु गधा पार्टी” के पाकस्थान और बंगलादेश में फॉलोवर भी भरपूर बन जायेगें। तो “ढिँँचु ढेँचु गधा पार्टी” को तत्काल पाकस्थान और बंगलादेश में अपनी पार्टी बना लेनी चाहिए और सरकार बनाकर गरीबों की सेवा करनी चाहिए और दोनों देशों की गरीबी और बेरोजगारी तुरन्त विदेशों से भीख माँग माँग कर दूर करनी चाहिए क्युकी गिरगिट पार्टी, कॉकरोज पार्टी और गधा पार्टी के तीनो ढिँँचु ढेँचु गधा नेता तो ख़ुद विदेशों में ही मस्त रहके भारत विरोधी, बंग्लादेशी और पाकिस्तानी समर्थकों के लाइक और शेयर से पैसे कमा रहे हैं और यहां के युवाओं को भड़का रहे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के सबसे सम्मानित और सबसे प्रतिष्ठित नेता हैं। देश को विदेश में बैठे किसी तुम जैसे नेता या भड़काऊ पार्टी की जरूरत नहीं है, जो भारत की जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटा हुआ हो, और खुद को हमारा प्रवक्ता होने का झूठा दिखावा करता हो और विदेश में रहकर भारत के खिलाफ़ सडयंत रचता हो और हमारे दुश्मन देश पाकिस्तान और बंगलादेश के समर्थको के लाइक और शेयर से पैसे बनता हो और यहां गिरगिट बनके युवाओं को भड़कता हो। जो पार्टी सोशल मीडिया पर पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की जैसे देशों के लोगों से खुलकर समर्थन पाती दिखे, उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बंगाल हारने के बाद मोदी विरोधियों एक और नई नौटंकी शुरू हुई है गिरगिट पार्टी लगभग 4-5 आप और कॉंग्रेसी इन्फेलुन्सेर्स जो विदेश मे बैठे हैं। एक अमेरिका मे है, एक जर्मनी मे है, एक दुबई मे है इन्होने सोशल मीडिया में मोदी को गाली देने के लिए एक पार्टी बनाई हैं। वहाँ इसके लाखों मे फोल्लोवेर्स बन चुके हैं जिनमे अधिकांश पाकिस्तानी, बांग्लादेशी, मिडिल ईस्ट और अमेरीका से हैं। जहां से इस अकाउंट को चलाया जा रहा है मकसद वही है भारत के GenZ को भड़काना और सड़कों पर लाना और अराजकता फैलाकर मोदी सरकार का जबरई से तख्ता पलट करके फ़िर से कांग्रेस की सरकार बनाना लेकिन ये देश विरोधी कुछ नहीं कर पाए ये 101 वां हो जाएगा वही देश विरोधी फोल्लोवेर्स वही कंटेंट वही eco-system बस नाम बदल बदल के एक ही Propaganda सारे फैलाएंगे इसमे नया क्या है ये तो जबसे मोदी सत्ता में आएं हैं ये तब से रात दिन यही तो कर रहे हैं। इन्हें लगता है कि सिर्फ सोशल मीडिया पर हवा बनाने से चुनाव जीते जाते हैं। इन्हें इतनी सी बात समझ नहीं आती की सोशल मीडिया भी तभी काम करता है जब आपके नेता की जमीन पर जनता मे स्वीकार्यता हो और उसके लिए काम करने पड़ते हैं और काम तो इनके ऐसे हैं कि इनका बस चले तो सत्ता के लिए दुबारा देश के दुबारा टुकड़े टुकड़े कर देगे।
बड़ा सवाल – अब सोचने वाली बात यह है कि भारत में जो लोग उसी “गिरगिट पार्टी” का समर्थन कर रहे हैं, कहीं उनकी सोच भी उसी दिशा में तो नहीं जा रही? निरंतर चुनावी पराजयों से देश गिरोधी पार्टी और नेता आज न केवल मानसिक हताशा के दौर से गुजर रही है, बल्कि एक खतरनाक षड्यंत्र का हिस्सा भी बनती जा रही है। मोदी विरोधी नेताओं के हालिया बयान, जिसमें उन्होंने अराजकता के माध्यम से सत्ता परिवर्तन की बात कही, ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देश विरोधी पार्टियों को जिन्ना लीग और माओवादी सोच वाली राजनीतिक पार्टी कहना निराधार नहीं था। केरल में जिन्ना लीग के साथ गठबंधन और असम में बदरुद्दीन अजमल के बयान भी इस सत्य को उजागर करते हैं कि पार्टियां अब जिन्ना लीग बन गई है।

अब अराजकता, हिंसा और भ्रम फैलाकर सत्ता पाने का सपना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है – यह एक माओवादी नक्सलवादी तरीक़ा है।
देश आज यह समझ रहा है कि भारत की प्रगति को रोकने वाली शक्तियों के साथ आखिर कौन खड़ा है। देश विरोधी पार्टियों हमारा सीधा सा सवाल है क्या यह सब विदेशी शक्तियों के प्रभाव में जानबूझकर हाथ मिला कर किया जा रहा है, या फिर अनजाने में आप उनके हाथों का हथियार बनते जा रहे हैं? देशहित में हमें इस देश के पहरेदारों से बस इतनी सी अपील है कि संभल के रहना अपने घर में छिपे हुए गद्दारों से।”
उन्होंने आगे कहा कि ज़ब से मोदी सत्ता में आएं हैं, सभी विपक्षी पार्टियों ने ऐड़ी से लेकर चोटी तक का ज़ोर लगाकर मोदी की छवि खराब करने और हारने का कई प्रकार के प्रयास किया परंतु हर बार बुरी तरह से असफलता ही प्राप्त हुई। जो व्यक्ति सच्चे मन से देश की सेवा कर रहा हैं, विरोधियों को छोड़ के – भारत की जनता पूरी तरह से अपने दिल में बिठाकर देश का प्रधानमंत्री बनती है। विरोधियों की देश में रह कर दाल नहीं गली तो हाल ही में सभी मोदी विरोधियों ने मिलकर विदेशी धरती से मोदी को गाली देने और भारत में अराजकता फैलाने के लिए एक नयी इंटर नेशनल पार्टी का अवतार कराया हैं। उसका नामकरण संस्कार गिरगिट पार्टी है। जो मोदी की छवि खराब करने के लिए नये नये अनेकों प्रकार के अत्यधिक प्रयास कर रहे हैं। लेक़िन मोदी तो सुलझे व्यक्ति हैं गाली देने वालों को माफ़ कर देते हैं मगर यह बात याद रखना उत्तरप्रदेश प्रदेश के योगी कभी मांफ नहीं करते अराजकता फैलाने वालों में यहां की पुलिस मोटे मोटे लठ बजाती हैं। दंगा करने बाले अपनी चप्पल जूते सड़क पर ही छोड़ कर भाग जाते हैं।
देश विरोधियों साफ सुनो और गांठ बांध लो – भारत के आंतरिक मामले सिर्फ और सिर्फ भारतीयों के हैं। कोई विदेशी ताकत, कोई बाहरी दबाव, कोई तथाकथित ‘विश्व का ठेकेदार’ हमारे घरेलू मामलों में दखल देने की हिम्मत न करे। भारत ने आज तक किसी भी देश के आंतरिक मामलों में नाक नहीं घुसाई, एक बार भी नहीं। हम सीमाओं का सम्मान करते हैं। हम भी यही अपेक्षा रखते हैं विनती के रूप में नहीं, बल्कि एक कड़ी मांग के रूप में। जो बाहर से भारत को उपदेश देने, दबाने, या अस्थिर करने की कोशिश करते हैं वे समझ लें। तुम एक ऐसी सभ्यता से पंगा ले रहे हो जो हजारों साल पुरानी है, जिसमें 140 करोड़ लोग एकजुट हैं। हमने आक्रमण झेले, गुलामी झेली, जातिवाद झेला, षड्यंत्र झेले और आज भी सीना तानकर देश की रक्षा के लिए सभी भारतीय एक परिवार के छोटे बड़े भाई भाई की तरह एक साथ खड़े हैं। इसलिए अपना एजेंडा अपने पास रखो। भारत की समस्याओं को भारत सुलझाएगा। अपनी हदों में रहो, वरना भारत को कमज़ोर समझने की गलती की कीमत चुकानी पड़ेगी!
साथ ही उन्होंने कहा कि भले ही विरोधियों की राजनीतिक सोच प्रधानमंत्री मोदी से अलग हो, लेकिन यह मानना पड़ेगा कि PM मोदी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। राजनीति में विरोध होना चाहिए लेकिन मान-मर्यादा और सभ्यता के साथ उस पद की गरिमा पूरे देश में है। किसी भी नेता को राजनीतिक निराशा एवं हताशा में अराजकता नहीं फैलानी चाहिए। गाली एवं अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं देनी चाहिए देश बर्दास्त नहीं करेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि गिरगिट पार्टी से गरीबों के भाले की उम्मीद बेकार की बात है। अन्ना आंदोलन के भी लाखों आए थे यह वही अन्ना हजारे का फेसबुक-एडिशन है ऊँची शर्ट, हाई-प्रोफाइल इमेज और जमीनी असमानताओं पर मूकता। जहां देश का सवाल हो इनकी जीभ अचानक लकवा में पड़ जाती है। उनका कार्यक्रम वही है जो इनकी भाषा और मनसिकता में दिखता। सवाल है जमीन पर रोजगार किस तरह बनाएँगे, उत्पादन कैसे बढ़ाएँगे, भूमि सुधार और सामाजिक सुरक्षा का रोडमैप क्या है? जवाबः मीम और स्लोगन। जब सत्ता मिली तो वही पुराने एक पक्ष के लिए नेतागिरी की फाँकें खोल देंगें और वादे धुँआ बनकर उड़ जाएंगे। सोशल मीडिया का महिमामंडन भी हास्यास्पद है। लाखों फॉलोवर्स का मतलब तुम नये गिरगिट बनकर मोदी या हिन्दुत्व के खिलाफ काम करों लोगों को भ्रमित करके देश के खिलाफ़ भड़काओं।
अब समय की माँग हैं कि देशहित में आम लोगों का जगरूक होना; स्क्रीन पर उजला गुलाबी तमाशा नहीं। सबसे बड़ा झटका यह हैं कि यह देश विरोधी प्रोजेक्ट है। इतिहास बार-बार बता चुका है कि समस्या की जड़ वही सत्ता है। आश्चर्य कैसा ? यह वही खेल है ग़रीब, वंचित और उपेक्षित वही रहेंगे; ठगे वही जायेंगे। भावनात्मक होकर मुर्ख मत बनो थोड़ा गंभीर होकर सोचो नहीं तो तुम सिर्फ एक वायरल पोस्ट का समर्थन लेकर खाली हाथ रह जाओगे। जमीन पर उतर कर असहाय गरीबों के लिए काम करने बाले ही इतिहास बदलते हैं; विदेशी मोबाईल की स्क्रीन पर बैठे नालायक नहीं। इसलिए अगली बार जब कोई नया रंग-बिरंगा पैकेज तुम्हारे सामने आए, उसे लाइक करने से पहले पूछो लाइक से ज्यादा जरूरी है कि वह किसकी लाठी बनकर खड़ा है।
आखिर में उन्होंने कहा कि देशभक्ति सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट, नारों और दिखावे से साबित नहीं होती, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि आप किस विचारधारा और किन लोगों के साथ खड़े हैं। इसलिए किसी भी गिरगिट पार्टी,भारत विरोधी विचारधारा या अभियान का देश में रहकर देश का अन्न खाकर समर्थन करने से पहले एक बार सोच-विचार जरूर करें। उन्होंने कहा कि देश में और देश के बाहर बैठे हुए देश विरोधी तत्वों के साथ मिलकर हमारे देश की विपक्षी पार्टियों ने कई बार कोशिश कर ली है मोदी को हटाने की लेकिन देश की जनता मोदी को चाहती है और देश के दुश्मनों को आगे भी सबक सिखाती रहेगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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