Voices of Literature : श्रीराम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था के अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में गूंजे राष्ट्र, संस्कृति, आस्था और साहित्य के स्वर

पिलखुवा। श्रीराम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था, अयोध्याधाम की जनपद अंबेडकरनगर इकाई के तत्वावधान में पिलखुवा में एक भव्य एवं विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं काव्य संध्या का आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिष्ठित कवियों एवं कवयित्रियों की सशक्त प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को साहित्य, संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और भारतीय जीवन मूल्यों के रंगों से सराबोर कर दिया। देर रात तक चले इस काव्य सम्मेलन में श्रोताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए कवियों की रचनाओं का भरपूर आनंद लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीराम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था, अयोध्याधाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार अशोक गोयल “चक्रवर्ती” ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि संस्कारों, संस्कृति, आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों का विश्वगुरु है। उन्होंने अपनी ओजपूर्ण पंक्तियों—
“आस्था पर आंच नहीं आने देंगे, भारत संस्कारों का घर है”
—के माध्यम से उपस्थित जनसमूह में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का संचार किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हमारी सबसे बड़ी धरोहर है और साहित्यकारों का दायित्व है कि वे अपनी लेखनी से समाज में सकारात्मक विचारों का प्रसार करें तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ें।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ कवयित्री डॉ. शशि जायसवाल तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में लोकप्रिय कवि रामस्वरूप मयूरेश एवं वरिष्ठ कवयित्री वीना गोयल उपस्थित रहीं। अतिथियों ने अपने संबोधन में साहित्य की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कविता केवल भावों की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साहित्यकारों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है, क्योंकि समाज को सकारात्मक सोच, मानवीय मूल्यों और राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन प्रसिद्ध कवि रामवृक्ष बहादुरपुरी ने किया। उन्होंने अपनी सहज, रोचक और प्रभावशाली शैली से पूरे सम्मेलन को जीवंत बनाए रखा। उनके संचालन ने मंच और श्रोताओं के बीच निरंतर संवाद स्थापित किया, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और आकर्षण दोनों बढ़ते रहे।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ कवयित्री सुनीता छाबड़ा द्वारा प्रस्तुत माँ शारदा की मनोहारी वंदना से हुआ। उनकी मधुर प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया और कार्यक्रम का शुभारंभ अत्यंत आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायक वातावरण में हुआ। इसके पश्चात अध्यक्ष, मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन एवं उद्बोधन के माध्यम से कार्यक्रम को औपचारिक रूप से गति प्रदान की।
काव्य पाठ के क्रम की शुरुआत प्रसिद्ध कवयित्री डॉ. ऋचा शर्मा श्रेष्ठा ने अपनी भावपूर्ण कविता से की। उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब सराहा। इसके बाद मंच पर एक-एक कर देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। किसी ने राष्ट्रभक्ति की अलख जगाई, किसी ने सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार किया, तो किसी ने श्रृंगार, करुणा, हास्य और मानवीय संवेदनाओं को अपनी रचनाओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया।

सम्मेलन में डॉ. राजेश तिवारी ‘मक्खन’ (झांसी), श्रीपाल शर्मा, ईदरीशपुरी (बागपत), विनोद कुमार शर्मा ‘आनंद’ (राजस्थान), संध्या श्रीवास्तव ‘सांझ’, अतुल कुमार शर्मा (संभल), सुनीता छाबड़ा (गाजियाबाद), ओम प्रकाश कुंतल (राजस्थान), सुषमा भंडारी, सुशीला जोशी, उषा सूद (दिल्ली), आशा विसारिया (चंदौसी), आशा शर्मा (इंदौर), रजनी सिंह (गाजियाबाद), सरिता श्रीवास्तव (जोधपुर), नीरजा सिंह (अमरावती), मनोज मंजुल (कासगंज), सविता महरोत्रा ‘सुगंधा’ (प्रयागराज), रमेश चंद्र (शामली), डॉ. शशि जायसवाल (प्रयागराज), ममता गुप्ता (बाराबंकी), लतेलिन लता प्रधान (छत्तीसगढ़), ईश्वर चंद्र विद्या वाचस्पति (संत कबीर नगर), रामस्वरूप मयूरेश (झारखंड), संगीता शुक्ला (प्रयागराज), डॉ. राम अवतार शर्मा ‘राम’ (बाड़ी, राजस्थान), राजेश कुमार शर्मा (धौलपुर, राजस्थान) तथा सुमन वर्मा (नजीबाबाद, बिजनौर) सहित अनेक प्रतिष्ठित रचनाकारों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से साहित्य प्रेमियों का मन मोह लिया।
काव्य संध्या में प्रस्तुत रचनाओं में राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, सामाजिक समरसता, नारी सम्मान, पर्यावरण संरक्षण, मानवीय संवेदनाएं, परिवार, प्रेम, करुणा तथा समकालीन सामाजिक परिस्थितियों जैसे विविध विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। ओज, वीर, गीत, ग़ज़ल, मुक्तक, हास्य और व्यंग्य सहित विभिन्न काव्य विधाओं की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को बहुआयामी स्वरूप प्रदान किया।
श्रोताओं ने प्रत्येक रचना का तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया। कई ओजपूर्ण और भावनात्मक प्रस्तुतियों पर सभागार देर तक तालियों से गूंजता रहा। कार्यक्रम में साहित्य प्रेमियों, शिक्षकों, समाजसेवियों, युवा रचनाकारों तथा स्थानीय नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे यह आयोजन एक भव्य साहित्यिक महोत्सव का रूप ले सका।
अपने समापन संबोधन में अध्यक्ष अशोक गोयल “चक्रवर्ती” ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ उसके भविष्य का मार्गदर्शक भी है। उन्होंने सभी रचनाकारों का अभिनंदन करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक चेतना और साहित्यिक परंपराओं को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों, अतिथियों, आयोजकों और श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे साहित्यिक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। आयोजन ने यह संदेश दिया कि साहित्य समाज को जोड़ने, संस्कारों को सुदृढ़ करने और राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने का सबसे प्रभावशाली माध्यम है। श्रीराम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था द्वारा आयोजित यह विराट कवि सम्मेलन साहित्य, संस्कृति और भारतीय परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण और यादगार आयोजन सिद्ध हुआ।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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