Shakrina’s survival : फतेहपुर जिला अस्पताल में रक्तदान के माध्यम से ट्यूबरक्लोसिस रोगी शकरीना की जीवनरक्षा ?

Shakrina’s survival : फतेहपुर जिला अस्पताल में रक्तदान के माध्यम से ट्यूबरक्लोसिस रोगी शकरीना की जीवनरक्षा

Shakrina's survival : फतेहपुर जिला अस्पताल में रक्तदान के माध्यम से ट्यूबरक्लोसिस रोगी शकरीना की जीवनरक्षा
Shakrina’s survival : फतेहपुर जिला अस्पताल में रक्तदान के माध्यम से ट्यूबरक्लोसिस रोगी शकरीना की जीवनरक्षा

फतेहपुर, 11 मार्च 2026: आज जिला अस्पताल फतेहपुर में एक अत्यंत गंभीर चिकित्सा स्थिति का सामना करते हुए 18 वर्षीय मरीज शकरीना, पुत्री इददूं खाना निवासी मुतौर फतेहपुर, को तत्काल रक्त की आवश्यकता पड़ी। मरीज का हिमोग्लोबिन स्तर गंभीर रूप से घटकर केवल 5.0 ग्राम प्रतिशत हो गया था, जो जीवन के लिए खतरे का संकेत था। यह मरीज ट्यूबरक्लोसिस से पीड़ित हैं और उनकी चिकित्सकीय स्थिति अत्यंत नाजुक थी।

जिला क्षयरोग अधिकारी, निशात शहाबुद्दीन जी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अस्पताल में भर्ती होने के बाद तत्काल चिकित्सा टीम ने रक्त की आवश्यकता महसूस की। दुर्भाग्यवश, मरीज के परिवार के पास कोई उपलब्ध रक्तदाता नहीं था, जिससे स्थिति और अधिक चिंताजनक हो गई। इस गंभीर स्थिति में, अस्पताल और मरीज के परिजनों ने तत्काल कदम उठाने की योजना बनाई।

मरीज के परिवार ने तत्काल इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, फतेहपुर के चेयरमैन, डॉ. अनुराग श्रीवास्तव से संपर्क किया। उन्होंने अपनी बेटी की गंभीर स्थिति और रक्त की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी। डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत रक्त केंद्र में रक्त संचरण समिति के संयोजक, अशोक शुक्ल से संपर्क किया।

अशोक शुक्ल ने तत्काल प्रयास शुरू किया और मरीज को B +ve रक्त उपलब्ध करवाने की पूरी व्यवस्था की। इस प्रक्रिया में रक्त केंद्र से रक्त संचरण समिति के आजीवन सदस्य बृजकिशोर भी उपस्थित रहे। साथ ही, समिति के अन्य सदस्य जैसे नरेंद्र कुमार सिंह और गोविंद सिंह ने भी रक्तदान और रोगी सहायता प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाई।

रक्त केंद्र में सभी सुरक्षा और चिकित्सकीय मानकों का पालन करते हुए मरीज के लिए रक्त का चयन और संक्रमण रहित रूप से उपलब्ध कराया गया। इसके तुरंत बाद, मरीज को आवश्यक मात्रा में B +ve रक्त प्रदान किया गया, जिससे शकरीना की जीवन रेखा को बनाए रखने में मदद मिली। यह कार्रवाई न केवल एक आपातकालीन चिकित्सा सेवा का उदाहरण है, बल्कि समाज और स्वास्थ्य संस्थाओं के बीच सहयोग और मानवीय प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।

Shakrina's survival : फतेहपुर जिला अस्पताल में रक्तदान के माध्यम से ट्यूबरक्लोसिस रोगी शकरीना की जीवनरक्षा
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इस अवसर पर जिला अस्पताल की चिकित्सा टीम ने कहा कि ट्यूबरक्लोसिस जैसी गंभीर बीमारी में रक्त की कमी से रोगी की स्थिति और गंभीर हो सकती है। रक्तदान और समय पर रक्त उपलब्ध कराना मरीज की जीवन रक्षा में निर्णायक भूमिका निभाता है। उन्होंने इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी और रक्त संचरण समिति के सदस्यों के योगदान की सराहना की और कहा कि इस प्रकार की सामुदायिक भागीदारी अत्यंत प्रेरणादायक है।

डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि उनका प्रयास हमेशा समाज में रक्तदान की महत्ता और मानवता के सिद्धांत को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि रक्त की कमी किसी भी समय गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है। इसलिए समाज के सभी नागरिकों को नियमित रूप से रक्तदान करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर तत्परता दिखानी चाहिए।

रक्त संचरण समिति के संयोजक अशोक शुक्ल ने बताया कि उनकी टीम हमेशा ऐसे आपातकालीन मामलों के लिए तत्पर रहती है। उन्होंने कहा कि समिति का मुख्य उद्देश्य मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराना और स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रूप से सहयोग देना है। उन्होंने सभी रक्त दाताओं की सराहना की और कहा कि उनके योगदान से कई जीवन बचाए गए हैं।

इस दौरान समिति के आजीवन सदस्य बृजकिशोर ने कहा कि समाज की जिम्मेदारी है कि वह जरूरतमंदों की मदद के लिए हर संभव प्रयास करे। उन्होंने यह भी कहा कि रक्तदान न केवल एक मानवतावादी कार्य है, बल्कि यह व्यक्ति की सामाजिक जिम्मेदारी को भी दर्शाता है। अन्य उपस्थित सदस्य नरेंद्र कुमार सिंह और गोविंद सिंह ने भी अपनी भागीदारी और सहयोग की भावना व्यक्त की।

इस प्रकार, इस आपातकालीन स्थिति में अस्पताल, इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी और रक्त संचरण समिति के सदस्यों के सक्रिय और समन्वित प्रयासों ने शकरीना के जीवन को सुरक्षित किया। यह घटना यह संदेश देती है कि समय पर सहायता और सामुदायिक भागीदारी जीवन रक्षक सिद्ध हो सकती है।

जिला अस्पताल फतेहपुर ने इस सहयोग और तत्परता के लिए सभी संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों को धन्यवाद दिया। इस घटना ने न केवल रक्तदान की महत्ता को उजागर किया, बल्कि यह भी दिखाया कि समाज में सहयोग और मानवीय संवेदनशीलता का कितना बड़ा योगदान हो सकता है।

अंततः, शकरीना के जीवनरक्षा की यह कहानी यह प्रमाणित करती है कि सही समय पर सही प्रयास और सक्रिय सहयोग से किसी भी गंभीर चिकित्सा संकट को अवसर में बदला जा सकता है। यह घटना फतेहपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं, रक्तदान और समाज की जिम्मेदारी के क्षेत्र में एक प्रेरक उदाहरण के रूप में स्मरणीय रहेगी।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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