Separate Bundelkhand : गांव–गांव, पांव–पांव यात्रा कालिंजर–नरैनी पहुँची, पृथक बुंदेलखंड राज्य का संदेश

कालिंजर/नरैनी, 13 मार्च।
पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर निकाली जा रही “गांव–गांव, पांव–पांव यात्रा” अपने आठवें दिन कालिंजर–नरैनी क्षेत्र में पहुँची, जहाँ स्थानीय लोगों ने यात्रा का गर्मजोशी और उत्साह के साथ स्वागत किया। इस यात्रा का उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में अलग राज्य के निर्माण को लेकर जनजागरण करना और लोगों को इस आंदोलन से जोड़ना है। यात्रा के दौरान क्षेत्र के गांवों में लोगों से संवाद किया जा रहा है और उन्हें बताया जा रहा है कि अलग बुंदेलखंड राज्य बनने से क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिल सकती है।
यात्रा में बुंदेलखंड विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष राजा बुंदेला, बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय, यात्रा संयोजक आश्रय सिंह तथा क्षेत्रीय नेतृत्वकर्ता जयराम सिंह सहित अनेक कार्यकर्ता शामिल रहे। इसके अलावा कई स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता, युवा और किसान भी यात्रा में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। यात्रा जैसे ही कालिंजर–नरैनी क्षेत्र में पहुँची, वहां के लोगों ने यात्रा का स्वागत करते हुए आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। कई स्थानों पर ग्रामीणों ने यात्रियों का स्वागत कर उनके साथ संवाद भी किया।
इस यात्रा के माध्यम से आयोजक गांव–गांव जाकर लोगों को बुंदेलखंड की समस्याओं के बारे में जागरूक कर रहे हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से विकास की मुख्यधारा से पीछे रह गया है। यहां के लोग वर्षों से पानी की कमी, बेरोजगारी, पलायन, सूखा और कृषि संकट जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इन समस्याओं को देखते हुए क्षेत्र के कई सामाजिक संगठनों और नेताओं ने पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को तेज किया है।
यात्रा के दौरान आयोजित संवाद कार्यक्रम में बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय ने कहा कि बुंदेलखंड दशकों से भुखमरी, बेरोजगारी, पलायन और पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि यहां के किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा नहीं मिल पा रही है और युवा रोजगार के अभाव में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि अगर बुंदेलखंड को अलग राज्य का दर्जा मिलता है तो स्थानीय स्तर पर नीतियां बनाकर इन समस्याओं का समाधान अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।
प्रवीण पांडेय ने आगे कहा कि अलग राज्य बनने से यहां के प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार योजनाएं बनाकर विकास को गति दी जा सकेगी। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में खनिज संपदा, कृषि संभावनाएं और पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन योजनाओं की कमी और उपेक्षा के कारण इनका पूरा लाभ क्षेत्र के लोगों को नहीं मिल पा रहा है। यदि बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाया जाता है तो यहां की सरकार स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता देकर विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ा सकती है।

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि बुंदेलखंड के लोग अपने अधिकारों और सम्मान की लड़ाई के लिए एकजुट हों। उन्होंने कहा कि जब तक आम जनता इस आंदोलन से नहीं जुड़ेगी, तब तक इस मांग को मजबूती नहीं मिल पाएगी। इसलिए हर गांव और हर घर से लोगों को इस आंदोलन का हिस्सा बनना चाहिए, ताकि बुंदेलखंड के भविष्य को बेहतर बनाया जा सके।
इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य कमलेश साहू ने भी लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि बुंदेलखंड की समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से यहां के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अलग राज्य बनने से प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी और विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।
कमलेश साहू ने लोगों से आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि बुंदेलखंड के विकास के लिए सभी को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। उन्होंने कहा कि यदि जनता का व्यापक समर्थन इस आंदोलन को मिलता है तो निश्चित रूप से यह मांग और अधिक मजबूत होगी।
यात्रा के दौरान कई गांवों में सभाएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां स्थानीय लोगों ने अपने अनुभव और समस्याएं भी साझा कीं। किसानों ने पानी की कमी, सिंचाई की समस्या और फसलों के उचित मूल्य न मिलने की बात कही, वहीं युवाओं ने रोजगार की कमी और पलायन की समस्या को प्रमुख मुद्दा बताया। यात्रा के नेताओं ने लोगों की बातों को गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वासन दिया कि इन समस्याओं को आंदोलन के माध्यम से मजबूती से उठाया जाएगा।
“गांव–गांव, पांव–पांव यात्रा” का उद्देश्य केवल राजनीतिक मांग उठाना नहीं है, बल्कि बुंदेलखंड के लोगों को उनके अधिकारों और संभावनाओं के प्रति जागरूक करना भी है। यात्रा के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि यदि क्षेत्र के लोग संगठित होकर अपनी आवाज उठाएं तो बदलाव संभव है।
यात्रा में मुख्य रूप से राजा बुंदेला, प्रवीण पांडेय, जयराम सिंह, कालू राम प्रजापति, अजय सिंह, सत्येंद्र सिंह, राजू सिंह सहित अनेक कार्यकर्ता और समर्थक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि बुंदेलखंड के विकास और सम्मान के लिए यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा और लोगों के सहयोग से इसे और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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