Irregularities : हापुड़ बाल विकास परियोजना कार्यालय में औचक निरीक्षण में मिली गंभीर अनियमितताएं, कार्रवाई के निर्देश जारी

हापुड़ जनपद में प्रशासनिक सतर्कता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 21 अप्रैल 2026 को जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा बाल विकास परियोजना कार्यालय हापुड़ का औचक निरीक्षण किया गया। यह निरीक्षण सुबह लगभग 10:00 बजे किया गया, जिसमें कार्यालय की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इस घटना ने न केवल विभागीय कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सरकारी कार्यालयों में अनुशासन और पारदर्शिता की आवश्यकता को भी उजागर किया है।
निरीक्षण के दौरान सबसे पहले जो स्थिति सामने आई, वह अत्यंत चिंताजनक थी। निर्धारित समय पर कार्यालय पूरी तरह बंद पाया गया और कोई भी अधिकारी या कर्मचारी उपस्थित नहीं था। यह स्थिति सरकारी कार्यप्रणाली के मानकों के विपरीत है, जहां समयबद्ध उपस्थिति और कार्य निष्पादन अनिवार्य होता है। लगभग 10:10 बजे श्रीमती संतोष, जो आंगनबाड़ी केंद्र असौड़ा में सहायिका के रूप में कार्यरत हैं, कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वे कार्यालय की साफ-सफाई का कार्य करती हैं और उसी के तहत उन्होंने कार्यालय खोला।
कार्यालय खुलने के बाद जब निरीक्षण टीम ने उपस्थिति पंजिका की मांग की, तो वह तत्काल उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। यह एक और गंभीर लापरवाही के रूप में सामने आया, क्योंकि उपस्थिति पंजिका किसी भी कार्यालय में कर्मचारियों की उपस्थिति और अनुशासन का महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। लगभग 10:20 बजे सुश्री दिव्या और 10:35 बजे श्रीमती शीलू, जो मुख्य सेविका के पद पर कार्यरत हैं, कार्यालय पहुंचीं। उनके द्वारा अलमारी खोलकर उपस्थिति पंजिका प्रस्तुत की गई।
उपस्थिति पंजिका के अवलोकन में यह पाया गया कि श्रीमती रंजना, मुख्य सेविका, 9 अप्रैल 2026 से चिकित्सा अवकाश पर हैं। वहीं सुश्री श्वेता, मुख्य सेविका, 15 अप्रैल 2026 से बिना सूचना के अनुपस्थित हैं। यह स्थिति विभागीय अनुशासन के दृष्टिकोण से अत्यंत गंभीर है, क्योंकि बिना अनुमति अनुपस्थिति सेवा नियमों का उल्लंघन है।
निरीक्षण के दौरान उपस्थित मुख्य सेविकाओं ने यह जानकारी दी कि अन्य मुख्य सेविकाएं आंगनबाड़ी केंद्रों के भ्रमण पर गई हुई हैं। हालांकि जब उनसे भ्रमण से संबंधित अभिलेख और पंजिका प्रस्तुत करने को कहा गया, तो वे उपलब्ध नहीं कराई जा सकीं। यह तथ्य इस बात की ओर संकेत करता है कि या तो भ्रमण का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया या फिर उसे जानबूझकर प्रस्तुत नहीं किया गया। दोनों ही स्थितियां प्रशासनिक पारदर्शिता के खिलाफ हैं।

इसके अतिरिक्त, अलमारी की चाबी सुश्री अन्नू, मुख्य सेविका के पास होने की बात कही गई, जिसके कारण अन्य आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए जा सके। यह व्यवस्था भी उचित नहीं मानी जा सकती, क्योंकि किसी एक व्यक्ति के पास सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जिम्मेदारी होना कार्य में बाधा उत्पन्न कर सकता है और पारदर्शिता को प्रभावित करता है।
निरीक्षण के दौरान एक और गंभीर अनियमितता सामने आई। सुश्री स्नेहलता, मुख्य सेविका, द्वारा उपस्थिति पंजिका में दिनांक 21 अप्रैल 2026 को जिला कार्यक्रम कार्यालय हापुड़ में उपस्थित होने का उल्लेख किया गया था, जबकि वास्तविकता में वे वहां उपस्थित नहीं थीं। यह कृत्य न केवल अनुशासनहीनता को दर्शाता है, बल्कि यह फर्जी उपस्थिति दर्ज करने का मामला भी है, जिसे गंभीर प्रशासनिक उल्लंघन माना जाता है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी ने इन सभी अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकार की लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने संबंधित मुख्य सेविकाओं को निर्देश दिया कि वे दो दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई कि यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं होता है, तो उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
यह निरीक्षण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रशासन अब कार्य में लापरवाही और अनुशासनहीनता को लेकर सख्त रुख अपना रहा है। विशेष रूप से बाल विकास परियोजनाओं जैसे संवेदनशील विभागों में, जहां कार्य सीधे तौर पर बच्चों और महिलाओं के कल्याण से जुड़ा होता है, वहां इस प्रकार की अनियमितताएं अत्यंत गंभीर मानी जाती हैं।
इस घटना के माध्यम से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके कार्यान्वयन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन भी आवश्यक है। औचक निरीक्षण जैसे कदम न केवल कर्मचारियों में जिम्मेदारी की भावना को बढ़ाते हैं, बल्कि आम जनता के बीच भी यह संदेश देते हैं कि प्रशासन उनकी भलाई के लिए सक्रिय है।
अंततः, यह कहा जा सकता है कि बाल विकास परियोजना कार्यालय हापुड़ में सामने आई अनियमितताएं एक चेतावनी हैं, जिन्हें समय रहते सुधारना आवश्यक है। यदि प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो निश्चित रूप से विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही पात्रों तक पहुंच सकेगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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