Strictness : रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना की जिलाधिकारी ने की समीक्षा, लंबित प्रकरणों पर जताई सख्ती

हापुड़। रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना के अंतर्गत लंबित एवं नए प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा आज जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में की गई। बैठक में जिले में पीड़ित महिलाओं और बच्चों को समयबद्ध आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने, प्रकरणों के निस्तारण में तेजी लाने और पुनर्वास प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि पीड़ित महिलाओं और बच्चों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करना भी है। इसलिए प्रत्येक प्रकरण का निष्पक्ष, संवेदनशील और तथ्यपरक परीक्षण सुनिश्चित किया जाए, ताकि वास्तविक लाभार्थियों को समय पर सहायता मिल सके और किसी भी पात्र व्यक्ति को अनावश्यक रूप से वंचित न रहना पड़े।
जिलाधिकारी ने बैठक में लंबित प्रकरणों की क्रमवार समीक्षा की और विभागीय अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने पाया कि कुछ मामलों में प्रक्रिया धीमी है, जिसके कारण लाभार्थियों को समय पर सहायता नहीं मिल पा रही है। इस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि सभी लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि स्वीकृत प्रकरणों में किसी भी प्रकार की देरी न की जाए और पात्र लाभार्थियों को तुरंत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि यह योजना अत्यंत संवेदनशील वर्ग से जुड़ी हुई है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या औपचारिकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि जिन लाभार्थियों के बैंक खाते अब तक नहीं खुले हैं, उनके खाते शीघ्रता से खुलवाए जाएं ताकि सहायता राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर की जा सके। उन्होंने कहा कि बैंकिंग प्रक्रिया में देरी के कारण लाभार्थियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।
जिलाधिकारी ने पुनर्वास व्यवस्था पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल आर्थिक सहायता देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पीड़ित महिलाओं और बच्चों के सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास पर भी ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुनर्वास प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए और प्रत्येक मामले की नियमित निगरानी की जाए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लंबित प्रकरणों को किसी भी स्थिति में अनदेखा न किया जाए और उन्हें समयबद्ध तरीके से निपटाया जाए। हर मामले को गंभीरता से लेते हुए उसका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए ताकि लाभार्थियों को जल्द से जल्द राहत मिल सके।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि योजना के अंतर्गत पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है। इसलिए हर प्रकरण की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए और किसी भी प्रकार के दबाव या अनियमितता से बचा जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक फाइल का पूर्ण दस्तावेजीकरण किया जाए और रिकॉर्ड व्यवस्थित रखा जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित महिलाओं और बच्चों के मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्य करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसलिए हर अधिकारी को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्य करना चाहिए ताकि पीड़ितों को यह महसूस हो कि प्रशासन उनके साथ खड़ा है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी श्रुति शर्मा, अपर पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों को अपने-अपने स्तर पर जिम्मेदारियां सौंपी गईं और निर्देश दिए गए कि वे समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
मुख्य विकास अधिकारी ने बैठक में योजना की वर्तमान स्थिति और लंबित मामलों की जानकारी प्रस्तुत की। वहीं पुलिस विभाग ने संबंधित मामलों में सुरक्षा और कानूनी पहलुओं की जानकारी दी। चिकित्सा विभाग ने पीड़ितों के स्वास्थ्य और उपचार संबंधी मामलों की स्थिति साझा की।
जिलाधिकारी ने अंत में सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर वर्ग को सशक्त बनाना है। इसलिए सभी अधिकारी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ कार्य करें।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी की शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह आश्वासन दिया कि प्रशासन पूरी तरह से पीड़ितों के साथ है और हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
कुल मिलाकर यह बैठक महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब लंबित प्रकरणों में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी और लाभार्थियों को समयबद्ध सहायता सुनिश्चित की जाएगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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