Struggling for justice : पिलखुवा में मकान धोखाधड़ी का मामला, पीड़ित परिवार न्याय के लिए परेशान ?

Struggling for justice : पिलखुवा में मकान धोखाधड़ी का मामला, पीड़ित परिवार न्याय के लिए परेशान

Struggling for justice : पिलखुवा में मकान धोखाधड़ी का मामला, पीड़ित परिवार न्याय के लिए परेशान
Struggling for justice : पिलखुवा में मकान धोखाधड़ी का मामला, पीड़ित परिवार न्याय के लिए परेशान

हापुड़। जनपद हापुड़ के पिलखुवा कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत गांव गालंद के गढ़ी मोहल्ले में एक गरीब परिवार के साथ कथित धोखाधड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना ने न केवल पीड़ित परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर भूमि और संपत्ति से जुड़े लेनदेन की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि शिकायत देने के बावजूद तीन दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है, और मामले को जांच के नाम पर टालमटोल किया जा रहा है।

पीड़ित अशोक और उनकी पत्नी देवेंद्री ने बताया कि उन्होंने करीब एक वर्ष पूर्व गांव में एक मकान खरीदा था। यह मकान उन्होंने पूरी कीमत चुकाकर विधिवत रूप से अपने नाम बैनामा करवा लिया था। खरीद प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे अपने नए मकान में रहने लगे और सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे थे। लेकिन अचानक एक दिन उनके मकान पर एक प्राइवेट लोन देने वाली फर्म का नोटिस चस्पा मिला, जिसे देखकर परिवार हैरान रह गया।

परिवार का कहना है कि नोटिस मिलने के बाद उन्होंने मामले की जानकारी जुटानी शुरू की। शुरुआत में उन्हें लगा कि यह कोई गलती हो सकती है, लेकिन कुछ ही समय बाद उनके मकान पर लगातार कई नोटिस चिपकाए जाने लगे। इससे उनके मन में गंभीर आशंका उत्पन्न हुई और उन्होंने संबंधित जानकारी एकत्र करना जारी रखा।

जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, वे और भी चौंकाने वाले थे। पीड़ित परिवार के अनुसार मकान की पूर्व मालिक महिला शीशपाली ने अपने पति विनोद, बेटे जतिन और भाई शीशपाल के साथ मिलकर एक सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी को अंजाम दिया। आरोप है कि उन्होंने मकान को बेचने के बाद भी उसे एक प्राइवेट फर्म के पास गिरवी रखकर लगभग चार लाख रुपये से अधिक का लोन प्राप्त किया।

पीड़ित परिवार का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें किसी प्रकार की जानकारी नहीं दी गई और न ही किसी दस्तावेजी लेनदेन की पारदर्शिता रखी गई। उनका आरोप है कि मकान की बिक्री और लोन प्रक्रिया दोनों ही धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से की गई, जिसके कारण अब वे मानसिक और आर्थिक रूप से गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।

इस घटना के सामने आने के बाद अशोक और देवेंद्री ने स्थानीय थाने में लिखित तहरीर देकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने पुलिस से अनुरोध किया कि इस मामले में तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की जाए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और दोषियों को सजा दिलाई जा सके।

Struggling for justice : पिलखुवा में मकान धोखाधड़ी का मामला, पीड़ित परिवार न्याय के लिए परेशान
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हालांकि पीड़ित परिवार का आरोप है कि तहरीर दिए हुए तीन दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस द्वारा कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। उनका कहना है कि उन्हें लगातार केवल जांच के नाम पर आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन वास्तविक कार्रवाई नहीं हो रही है। इससे परिवार में निराशा और असंतोष का माहौल है।

पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि नोटिस मिलने के बाद जब उन्होंने मामले की गंभीरता को समझा, तो उन्हें यह पता चला कि उनके मकान के दस्तावेजों का उपयोग कर वित्तीय लेनदेन किया गया है। उनका कहना है कि यह पूरी तरह से सुनियोजित धोखाधड़ी है, जिसमें कई लोग शामिल हो सकते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार यह मामला केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे कई मामले सामने आ सकते हैं जहां संपत्ति खरीद-बिक्री में पारदर्शिता की कमी के कारण लोग धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की ठगी का शिकार न हो।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी संपत्ति को बेचने के बाद पुनः उसी संपत्ति के आधार पर लोन लिया जाता है, तो यह गंभीर आपराधिक मामला बनता है। ऐसे मामलों में संबंधित दस्तावेजों की जांच, रजिस्ट्री रिकॉर्ड और बैंकिंग लेनदेन की विस्तृत जांच आवश्यक होती है।

इस घटना ने क्षेत्र में संपत्ति लेनदेन की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि रजिस्ट्री और बैंकिंग प्रक्रियाओं में अधिक सख्ती और डिजिटल सत्यापन प्रणाली को मजबूत किया जाए तो ऐसे मामलों को रोका जा सकता है।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से अपील की है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। उनका कहना है कि वे लंबे समय से मानसिक तनाव में हैं और न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

परिवार का यह भी कहना है कि मकान उनकी जीवनभर की कमाई का परिणाम था और अब यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे गंभीर आर्थिक संकट में आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि वे केवल न्याय चाहते हैं, ताकि दोषियों को सजा मिल सके और उनका मकान सुरक्षित रह सके।

फिलहाल यह मामला पुलिस जांच के अधीन बताया जा रहा है, लेकिन पीड़ित परिवार की नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है।

अब सभी की नजरें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में कब तक मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई करता है। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि उन्हें जल्द न्याय मिलेगा और उनके साथ हुई कथित धोखाधड़ी का सच सामने आएगा।

 

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