Mines Officer : बांदा पुलिस ने फर्जी आरटीओ, एसडीएम और माइंस अधिकारी बनकर रंगदारी वसूलने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया ?

Mines Officer : बांदा पुलिस ने फर्जी आरटीओ, एसडीएम और माइंस अधिकारी बनकर रंगदारी वसूलने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया

Mines Officer : बांदा पुलिस ने फर्जी आरटीओ, एसडीएम और माइंस अधिकारी बनकर रंगदारी वसूलने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया
Mines Officer : बांदा पुलिस ने फर्जी आरटीओ, एसडीएम और माइंस अधिकारी बनकर रंगदारी वसूलने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया

बांदा, 17 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद में थाना कोतवाली नगर पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो स्वयं को आरटीओ, माइंस अधिकारी और एसडीएम बताकर वाहन चालकों से अवैध वसूली और रंगदारी करता था। पुलिस ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से नकदी, एक चार पहिया वाहन, लैपटॉप, मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की है। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से विभिन्न जिलों में सरकारी अधिकारियों का फर्जी रूप धारण कर वाहन चालकों को धमकाकर धन उगाही कर रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है ताकि गिरोह की अन्य गतिविधियों और संभावित साथियों का भी पता लगाया जा सके।

पुलिस अधीक्षक बांदा पलाश बंसल के निर्देशन में जनपद में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। इस अभियान की निगरानी अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज तथा सहायक पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी नगर सुश्री मेविस टॉक द्वारा की जा रही थी। अधिकारियों के निर्देश पर थाना कोतवाली नगर पुलिस लगातार गश्त, अपराध नियंत्रण और संदिग्ध व्यक्तियों तथा वाहनों की सघन चेकिंग कर रही थी।

पुलिस के अनुसार शुक्रवार को गश्त के दौरान एक ई-रिक्शा चालक ने पुलिस टीम को सूचना दी कि कुछ लोग एक चार पहिया वाहन में बैठकर स्वयं को सरकारी अधिकारी बता रहे हैं और ई-रिक्शा चालकों से अवैध रूप से पैसे वसूल रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल सक्रिय हुई और बताए गए स्थान की ओर रवाना हो गई। पुलिस टीम ने मवई बाईपास के पास संदिग्ध वाहन को घेरकर उसमें सवार चारों व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कई महत्वपूर्ण खुलासे किए। उन्होंने स्वीकार किया कि वे अलग-अलग जिलों में जाकर स्वयं को आरटीओ, माइंस विभाग के अधिकारी अथवा एसडीएम बताकर वाहन चालकों को रोकते थे। इसके बाद वे चालकों के वाहन और उनके फोटो खींचते थे तथा चालान, वाहन सीज करने या अन्य कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे नकदी वसूलते थे। पुलिस के अनुसार आरोपी विशेष रूप से सुनसान या कम भीड़भाड़ वाले स्थानों को अपना निशाना बनाते थे, ताकि वाहन चालक बिना विरोध किए उन्हें पैसे दे दें।

जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य ई-रिक्शा, ट्रक, डंपर तथा अन्य व्यावसायिक वाहनों को रोककर खुद को सरकारी जांच दल का हिस्सा बताते थे। वे वाहन चालकों से कागजात मांगते और किसी न किसी कमी का हवाला देकर भारी जुर्माने की धमकी देते थे। इसके बाद मौके पर ही नकद धनराशि लेकर वाहन चालकों को जाने देते थे। इस तरह वे प्रतिदिन बड़ी मात्रा में अवैध धनराशि एकत्र करते थे।

पुलिस ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि वसूली से प्राप्त धनराशि को वे चारों आपस में बराबर-बराबर बांट लेते थे। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि गिरोह केवल बांदा ही नहीं, बल्कि आसपास के अन्य जनपदों में भी सक्रिय रहा हो सकता है। इसी कारण पुलिस अब उनके आपराधिक नेटवर्क और गतिविधियों की विस्तृत जांच कर रही है।

Mines Officer : बांदा पुलिस ने फर्जी आरटीओ, एसडीएम और माइंस अधिकारी बनकर रंगदारी वसूलने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया
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गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 5,400 रुपये नकद, जो कथित रूप से रंगदारी और अवैध वसूली से प्राप्त हुए थे, बरामद किए। इसके अलावा एक चार पहिया वाहन, जिसका उपयोग अवैध वसूली के दौरान किया जाता था, भी जब्त किया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक लैपटॉप, एक फाइल, जिसमें विभिन्न प्रकार के दस्तावेज रखे गए थे, तथा चार मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। इन सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच की जा रही है ताकि गिरोह की गतिविधियों से जुड़े अन्य साक्ष्य प्राप्त किए जा सकें।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सौरभ, पुत्र तेज प्रकाश, निवासी रिसदा, थाना जनेहा, जिला रीवा (मध्य प्रदेश), कमल, पुत्र मान सिंह, निवासी चितरा गोकुलपुर, थाना कोतवाली नगर कर्वी, जनपद चित्रकूट, राज कुमार, पुत्र भैयालाल, निवासी सीतापुर, थाना कोतवाली नगर कर्वी, जनपद चित्रकूट तथा संतोष कुमार, पुत्र दादूलाल, निवासी भैरों पागल द्वारकापुरी, थाना कोतवाली नगर कर्वी, जनपद चित्रकूट के रूप में हुई है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों के विरुद्ध थाना कोतवाली नगर, बांदा में मु0अ0सं0 359/26 के अंतर्गत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं 3(5), 204, 308, 318(4), 319(2) और 317(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों को विधिक कार्रवाई के बाद न्यायालय में पेश किया जाएगा।

पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने किन-किन जिलों में इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम दिया है। बरामद लैपटॉप, मोबाइल फोन और दस्तावेजों की डिजिटल एवं फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों, पीड़ितों और अपराध की पूरी श्रृंखला का पता लगाया जा सके। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने इस कार्रवाई को जनपद में अपराध नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता बताया। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों और वाहन चालकों को ऐसे फर्जी अधिकारियों से सतर्क रहने की आवश्यकता है। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को सरकारी अधिकारी बताकर अवैध रूप से धन की मांग करता है तो उसकी सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या पुलिस हेल्पलाइन पर दें। उन्होंने कहा कि पुलिस जनता की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और ऐसे अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

पुलिस ने वाहन चालकों से यह भी अपील की है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा चालान, वाहन सीज करने या किसी अन्य कार्रवाई की धमकी देकर नकद धनराशि मांगे जाने पर उसकी पहचान अवश्य सुनिश्चित करें। यदि कोई संदेह हो तो तुरंत संबंधित विभाग या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें। किसी भी स्थिति में बिना पुष्टि किए किसी अज्ञात व्यक्ति को पैसे न दें।

इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित किया है कि पुलिस की सतर्कता और आम नागरिकों द्वारा समय पर दी गई सूचना से संगठित अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। ई-रिक्शा चालक द्वारा दी गई सूचना के आधार पर की गई त्वरित कार्रवाई से न केवल एक सक्रिय गिरोह का पर्दाफाश हुआ, बल्कि भविष्य में वाहन चालकों के साथ होने वाली संभावित ठगी और रंगदारी की घटनाओं को भी रोका जा सका। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आने की संभावना है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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