A respectful tribute : जौनपुर में 22 मुहर्रम पर पारंपरिक अलम और ज़ुलजनाह का जुलूस, अकीदतमंदों ने दी श्रद्धांजलि श्रद्धापूर्वक ?

A respectful tribute : जौनपुर में 22 मुहर्रम पर पारंपरिक अलम और ज़ुलजनाह का जुलूस, अकीदतमंदों ने दी श्रद्धांजलि श्रद्धापूर्वक

A respectful tribute : जौनपुर में 22 मुहर्रम पर पारंपरिक अलम और ज़ुलजनाह का जुलूस, अकीदतमंदों ने दी श्रद्धांजलि श्रद्धापूर्वक
A respectful tribute : जौनपुर में 22 मुहर्रम पर पारंपरिक अलम और ज़ुलजनाह का जुलूस, अकीदतमंदों ने दी श्रद्धांजलि श्रद्धापूर्वक

जौनपुर, 9 जुलाई। 22 मुहर्रम के अवसर पर जौनपुर शहर के अहमद खां मंडी क्षेत्र से पारंपरिक एवं ऐतिहासिक जुलूस-ए-अलम और ज़ुलजनाह पूरी धार्मिक श्रद्धा, अनुशासन और अकीदत के साथ निकाला गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिया समुदाय सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए अकीदतमंदों ने कर्बला के शहीदों, विशेष रूप से हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की महान कुर्बानी को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पूरे क्षेत्र में ग़मगीन माहौल के बीच नौहाख्वानी, सीनाज़नी और मजलिस का आयोजन हुआ, जिसमें लोगों ने इंसानियत, न्याय और सत्य के लिए दी गई कर्बला की कुर्बानी को याद किया।

जुलूस प्रारंभ होने से पहले एक विशेष मजलिस का आयोजन किया गया, जिसमें प्रसिद्ध धर्मगुरु हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना सैयद सैफ अब्बास ने कर्बला की ऐतिहासिक घटना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का अमर संदेश है। उन्होंने कहा कि कर्बला हमें सच्चाई, इंसाफ, धैर्य, त्याग और मानवता की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में डटे रहने की प्रेरणा देती है।

मजलिस को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव मौलाना हसन अकबर खान ने समाज में आपसी भाईचारे, सौहार्द और एकता बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की शिक्षा किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने लोगों से हुसैनी उसूलों पर चलने, प्रेम, सहिष्णुता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की।

इस अवसर पर खतीबे-अहले-बैत हुसैन अकबर खान (रन्नो) ने भी भावपूर्ण तकरीर प्रस्तुत की। उन्होंने कर्बला की घटनाओं का मार्मिक वर्णन करते हुए इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानी को याद किया। उनकी तकरीर सुनकर उपस्थित अकीदतमंद भावुक हो उठे और पूरे वातावरण में ग़म और श्रद्धा का भाव स्पष्ट दिखाई दिया।

मजलिस के समापन के बाद पारंपरिक अलम और ज़ुलजनाह का जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। जुलूस अपने निर्धारित मार्ग से गुजरते हुए विभिन्न स्थानों पर पहुंचा, जहां लोगों ने श्रद्धापूर्वक स्वागत किया और कर्बला के शहीदों को याद किया। प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

जुलूस के दौरान अंजुमन इमामिया रन्नो तथा अंजुमन अज़ाए हुसैन के नौहाख्वानों ने पारंपरिक नौहाख्वानी प्रस्तुत की। नौहों के माध्यम से कर्बला की घटना और इमाम हुसैन की शहादत का भावपूर्ण वर्णन किया गया। इसके साथ ही अकीदतमंदों ने सीनाज़नी कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की और कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

जुलूस का सबसे भावुक और आकर्षक दृश्य उस समय देखने को मिला जब वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार कुछ अकीदतमंदों ने धार्मिक आस्था के प्रतीकात्मक प्रदर्शन के रूप में दहकते अंगारों पर चलकर मातम किया। इस दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने इसे इमाम हुसैन के प्रति अपनी गहरी आस्था और समर्पण का प्रतीक बताया।

A respectful tribute : जौनपुर में 22 मुहर्रम पर पारंपरिक अलम और ज़ुलजनाह का जुलूस, अकीदतमंदों ने दी श्रद्धांजलि श्रद्धापूर्वक
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पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक अनुशासन और शांति का वातावरण बना रहा। स्वयंसेवकों ने जुलूस की व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा। कई स्थानों पर शर्बत और पेयजल की व्यवस्था भी की गई। स्थानीय लोगों ने भी जुलूस का सम्मानपूर्वक स्वागत किया और आपसी सौहार्द का परिचय दिया।

प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पूरे मार्ग पर तैनात रहे तथा संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी गई। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की गई थी, जिससे आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

22 मुहर्रम का यह पारंपरिक आयोजन जौनपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। वर्षों से निकलने वाला यह ऐतिहासिक जुलूस सामाजिक सौहार्द, धार्मिक आस्था और आपसी भाईचारे का प्रतीक रहा है। इसमें विभिन्न समुदायों के लोग भी सहयोग करते हैं, जिससे गंगा-जमुनी तहजीब की सुंदर झलक देखने को मिलती है।

धार्मिक विद्वानों ने अपने संबोधन में कहा कि कर्बला का संदेश केवल शोक का नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, मानवता और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का संदेश है। इमाम हुसैन का जीवन प्रत्येक व्यक्ति को सत्य के मार्ग पर चलने और अन्याय के सामने कभी न झुकने की प्रेरणा देता है।

कार्यक्रम के अंत में देश और समाज में अमन, शांति, भाईचारे और खुशहाली की दुआ की गई। श्रद्धालुओं ने इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। धार्मिक गरिमा, अनुशासन और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ यह आयोजन जौनपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया।

 

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