A wave of enthusiasm swept through : औरंगाबाद जामा मस्जिद में करंट लगने से मौलाना उबैदुल्ला का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर छाई

बुलंदशहर। जनपद बुलंदशहर के औरंगाबाद कस्बे की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में सोमवार देर शाम एक अत्यंत दुखद हादसा हो गया। अज़ान के दौरान बिजली के चेंजओवर में अचानक करंट उतरने से 30 वर्षीय मौलाना उबैदुल्ला गंभीर रूप से झुलस गए। उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बुलंदशहर पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी मृत्यु हो गई। इस हादसे की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, धार्मिक गणमान्य, जनप्रतिनिधि और समाजसेवी जामा मस्जिद पहुंचे तथा दिवंगत मौलाना के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम नियमित समय पर जामा मस्जिद में अज़ान की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान मस्जिद परिसर में लगे बिजली के चेंजओवर में किसी तकनीकी कारण से करंट प्रवाहित हो गया। बताया जाता है कि मौलाना उबैदुल्ला इसके संपर्क में आ गए, जिससे उन्हें जोरदार बिजली का झटका लगा। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल उन्हें करंट के प्रभाव से अलग किया और प्राथमिक सहायता देने का प्रयास किया। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल उपचार के लिए बुलंदशहर ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकीय सहायता मिलने से पहले ही रास्ते में उनका निधन हो गया।
मृतक मौलाना उबैदुल्ला जनपद हापुड़ के थाना गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र के गांव दोताई निवासी कारी शेर मोहम्मद के पुत्र थे। उनका परिवार लंबे समय से धार्मिक सेवाओं से जुड़ा हुआ है। कारी शेर मोहम्मद लगभग पच्चीस वर्षों से औरंगाबाद की जामा मस्जिद में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और क्षेत्र में एक सम्मानित धार्मिक व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते हैं। मौलाना उबैदुल्ला भी पिछले लगभग चार वर्षों से मस्जिद में इमामत कर रहे थे और नियमित रूप से नमाज अदा कराने के साथ-साथ धार्मिक शिक्षा एवं सामाजिक मार्गदर्शन का कार्य कर रहे थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मौलाना उबैदुल्ला का व्यवहार अत्यंत सरल, विनम्र और मिलनसार था। वे धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने में भी सक्रिय रहते थे। उनकी असामयिक मृत्यु से क्षेत्र के लोगों में गहरा दुःख व्याप्त है। श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने कम समय में अपने व्यवहार और सेवा भावना से सभी के बीच विशेष स्थान बनाया था।
हादसे की सूचना मिलते ही जामा मस्जिद परिसर में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए। क्षेत्र के कई सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे। समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष सैयद हिमायत अली, वरिष्ठ समाजसेवी सैयद हुसैन अली, सैयद ज़ैद अली सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने इस दुखद घटना को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए परिवार को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

स्थानीय नागरिकों ने भी इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया। उनका कहना है कि धार्मिक स्थलों पर विद्युत सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होना अत्यंत आवश्यक है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। कई लोगों ने मस्जिदों, मंदिरों और अन्य सार्वजनिक स्थलों की विद्युत व्यवस्था की नियमित तकनीकी जांच कराने की आवश्यकता पर बल दिया।
विद्युत विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों पर लगे बिजली के उपकरणों, चेंजओवर, वायरिंग और अर्थिंग सिस्टम की समय-समय पर जांच कराना आवश्यक है। यदि बिजली से संबंधित उपकरणों का रखरखाव नियमित रूप से किया जाए तो करंट लगने जैसी दुर्घटनाओं की संभावना काफी कम की जा सकती है। विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि ऐसे स्थानों पर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा हादसे के कारणों की जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया। अधिकारियों ने बताया कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि करंट किस कारण से फैला और क्या इसमें किसी प्रकार की तकनीकी लापरवाही या अन्य कारण जिम्मेदार थे। जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत मौलाना की सेवाओं को याद किया। उनका कहना है कि मौलाना उबैदुल्ला ने समाज में धार्मिक मूल्यों, नैतिक शिक्षा और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने का कार्य किया। उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने बताया कि कारी शेर मोहम्मद और उनका परिवार वर्षों से औरंगाबाद में धार्मिक सेवाएं देता आ रहा है। ऐसे परिवार पर आई इस दुखद घड़ी ने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया है। लोगों ने दिवंगत मौलाना के लिए दुआ की और उनके परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना की।
इस दुखद हादसे ने एक बार फिर सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों पर विद्युत सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता को रेखांकित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निरीक्षण, सुरक्षित वायरिंग, मानक विद्युत उपकरणों का उपयोग और समय-समय पर तकनीकी परीक्षण जैसी व्यवस्थाएं अपनाकर ऐसी दुर्घटनाओं की संभावना को काफी हद तक रोका जा सकता है।
मौलाना उबैदुल्ला का असामयिक निधन न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनकी धार्मिक सेवाएं, सादगी, विनम्रता और समाज के प्रति समर्पण को लंबे समय तक याद किया जाएगा। स्थानीय लोगों ने उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने अपने आचरण और सेवा भावना से समाज में जो सम्मान अर्जित किया, वह हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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