Training conducted : गढ़मुक्तेश्वर में पंचायत डेवलपमेंट प्लान पर पंचायत सहायकों और सचिवों का एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित

हापुड़। ग्रामीण विकास को नई दिशा देने और ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर एवं योजनाबद्ध विकास की ओर अग्रसर करने के उद्देश्य से सोमवार, 13 जुलाई 2026 को जनपद हापुड़ के विकासखंड गढ़मुक्तेश्वर के सभागार में पंचायत डेवलपमेंट प्लान (पीडीपी) विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उपनिदेशक (पंचायत) के कुशल निर्देशन में किया गया, जिसमें ग्राम पंचायतों के पंचायत सहायकों और पंचायत सचिवों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय ब्लॉक प्रमुख एवं खंड विकास अधिकारी विजय कुमार द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर ब्लॉक प्रमुख ने उपस्थित पंचायत सहायकों, सचिवों एवं अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि ग्राम पंचायतें लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं और गांवों का समग्र विकास तभी संभव है जब विकास योजनाएं स्थानीय आवश्यकताओं और जनसहभागिता के आधार पर तैयार की जाएं। उन्होंने सभी पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने गांवों को आत्मनिर्भर, स्वच्छ, समृद्ध और आदर्श ग्राम बनाने की दिशा में पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करें।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों के विकास में केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग, ग्रामीणों की सहभागिता और नवाचार भी अत्यंत आवश्यक हैं। यदि प्रत्येक पंचायत योजनाबद्ध तरीके से कार्य करेगी तो ग्रामीण क्षेत्रों का सामाजिक, आर्थिक और आधारभूत विकास तेजी से संभव होगा।
खंड विकास अधिकारी विजय कुमार ने अपने संबोधन में पंचायत डेवलपमेंट प्लान की आवश्यकता और उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पंचायत विकास योजना का उद्देश्य ग्राम पंचायतों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करना है। उन्होंने पंचायत सहायकों और सचिवों को निर्देशित किया कि वे गांवों में उपलब्ध संसाधनों का सही आकलन करें, स्थानीय लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करें तथा पंचायत की स्वयं की आय के स्रोतों को मजबूत करते हुए योजनाओं का निर्माण करें।
उन्होंने कहा कि पंचायतों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के लिए स्थानीय आय के स्रोतों की पहचान करना और उन्हें विकसित करना समय की आवश्यकता है। पंचायतों द्वारा प्राप्त संसाधनों का पारदर्शी और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि विकास कार्यों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा कि योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखें।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में राष्ट्रीय प्रशिक्षक एवं सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष शर्मा ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) की अवधारणा पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभिन्न निजी कंपनियां अपने सामाजिक दायित्व के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, पेयजल, स्वच्छता और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग करती हैं। यदि ग्राम पंचायतें योजनाबद्ध तरीके से प्रस्ताव तैयार करें तो सीएसआर के माध्यम से गांवों के विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन प्राप्त किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि पंचायतों को सरकारी योजनाओं के साथ-साथ निजी क्षेत्र के सहयोग की संभावनाओं पर भी कार्य करना चाहिए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा और विकास की गति तेज होगी। उन्होंने पंचायत सहायकों और सचिवों को सीएसआर परियोजनाओं के लिए प्रभावी प्रस्ताव तैयार करने और संबंधित संस्थाओं से समन्वय स्थापित करने के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी।
कार्यक्रम में प्रशिक्षक अंकित भड़ाना ने 16वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देशों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वित्त आयोग द्वारा पंचायतों को उपलब्ध कराई जाने वाली धनराशि का उपयोग निर्धारित मानकों और नियमों के अनुरूप किया जाना चाहिए। उन्होंने पंचायत सचिवों को वित्तीय प्रबंधन, लेखा प्रणाली, बजट निर्माण, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और धनराशि के पारदर्शी उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि वित्त आयोग की धनराशि का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि पंचायतों में बुनियादी सुविधाओं का विकास, स्वच्छता, पेयजल, पर्यावरण संरक्षण, डिजिटल सेवाओं और सामाजिक विकास को भी बढ़ावा देना है। इसके लिए योजनाओं का सही चयन और समयबद्ध क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान पंचायत विकास योजना तैयार करने की संपूर्ण प्रक्रिया को व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया। पंचायत सहायकों और सचिवों को बताया गया कि ग्राम सभा की बैठकों के माध्यम से ग्रामीणों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध किया जाए तथा उसी के अनुरूप विकास योजनाएं तैयार की जाएं। साथ ही योजनाओं के क्रियान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन की प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) पवन चिकारा ने पंचायतों की प्रशासनिक जिम्मेदारियों, अभिलेखों के रखरखाव और योजनाओं के प्रभावी संचालन पर उपयोगी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पंचायत सचिव और पंचायत सहायक ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यदि वे अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी और पारदर्शिता से निर्वहन करेंगे तो गांवों में विकास कार्यों की गुणवत्ता स्वतः बेहतर होगी।
प्रशिक्षक ज्योति शर्मा और प्रशिक्षक मीनू सिंह ने भी पंचायत सहायकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं, अभिलेख प्रबंधन, डिजिटल कार्यप्रणाली और जनसहभागिता के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए व्यावहारिक समस्याओं के समाधान भी बताए।
डीपीआरसी हापुड़ के वरिष्ठ फैकल्टी डॉ. दीपक सिंह ने प्रशिक्षण के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को क्षमता विकास, प्रभावी नेतृत्व, सामुदायिक सहभागिता तथा सतत ग्रामीण विकास की अवधारणाओं पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि पंचायतों का उद्देश्य केवल विकास कार्य कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज को आत्मनिर्भर, जागरूक और सहभागी बनाना भी है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया और पंचायत विकास योजना के निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, ग्राम सभा की भूमिका तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया।
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने सभी पंचायत सहायकों और सचिवों से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान का उपयोग अपने-अपने ग्राम पंचायत क्षेत्रों में प्रभावी रूप से करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्राम पंचायतों को सशक्त, आत्मनिर्भर और योजनाबद्ध विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ। प्रतिभागियों ने भी इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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