A wave of grief has swept through the region : पूर्व विधायक डॉ. सुशील चौधरी का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर ?

A wave of grief has swept through the region : पूर्व विधायक डॉ. सुशील चौधरी का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

A wave of grief has swept through the region : पूर्व विधायक डॉ. सुशील चौधरी का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर
A wave of grief has swept through the region : पूर्व विधायक डॉ. सुशील चौधरी का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

सहारनपुर। नकुड़ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ जननेता डॉ. सुशील चौधरी का गंगोह स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। 78 वर्षीय डॉ. चौधरी लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे, लेकिन इसके बावजूद वे लगातार जनसंपर्क और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहे। उनका जीवन सादगी, ईमानदारी और जनसेवा का प्रतीक रहा है।

डॉ. सुशील चौधरी तीतरो के प्रतिष्ठित चौधरी परिवार से ताल्लुक रखते थे। वे पूर्व कृषि मंत्री स्वर्गीय चौधरी यशपाल सिंह के भतीजे थे और पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। परिवार की सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने अपने लिए एक अलग पहचान बनाई। वे न केवल एक सफल जनप्रतिनिधि रहे, बल्कि एक संवेदनशील समाजसेवी और किसानों की मजबूत आवाज के रूप में भी जाने जाते थे।

उनका जन्म एक ऐसे वातावरण में हुआ, जहां खेती, किसान और गांव की समस्याएं जीवन का अभिन्न हिस्सा थीं। इसी कारण उनके भीतर प्रारंभ से ही किसानों के प्रति विशेष संवेदना रही। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने चिकित्सक के रूप में भी कार्य किया और समाज के कमजोर वर्गों की सेवा की। बाद में राजनीति में प्रवेश कर उन्होंने अपनी चिकित्सकीय संवेदना को जनसेवा के व्यापक मंच पर स्थापित किया।

वर्ष 2002 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर नकुड़ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जनता के विश्वास के साथ विधायक बने। उनका कार्यकाल सादगी और पारदर्शिता के लिए याद किया जाता है। उन्होंने क्षेत्र में सड़कों, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सत्ता में रहते हुए भी उनका व्यवहार एक आम कार्यकर्ता जैसा रहा। वे बिना किसी तामझाम के लोगों के बीच पहुंचते और उनकी समस्याएं सुनते थे।

डॉ. चौधरी का मानना था कि राजनीति सेवा का माध्यम है, न कि व्यक्तिगत लाभ का। यही कारण था कि वे सत्ता से अधिक जनता की चिंता करते थे। उन्होंने कभी भी राजनीति को धन या प्रभाव अर्जित करने का साधन नहीं बनाया। उनकी ईमानदार छवि और स्पष्ट विचारधारा के कारण वे विरोधियों के बीच भी सम्मान के पात्र थे

A wave of grief has swept through the region : पूर्व विधायक डॉ. सुशील चौधरी का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर
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लंबे समय से अस्वस्थ रहने के बावजूद उनका जनसेवा से जुड़ाव कम नहीं हुआ। जब तक संभव हुआ, वे सामाजिक कार्यक्रमों, किसान बैठकों और स्थानीय आयोजनों में उपस्थित रहते थे। क्षेत्र के किसान उन्हें अपना सच्चा हितैषी मानते थे। गन्ना मूल्य, सिंचाई, बिजली और फसल नुकसान जैसे मुद्दों पर उन्होंने हमेशा मुखर होकर आवाज उठाई।

उनके निधन की खबर जैसे ही क्षेत्र में फैली, राजनीतिक, सामाजिक और किसान संगठनों में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न दलों के नेताओं, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने उनके आवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने उन्हें एक सच्चा जननेता, ईमानदार राजनीतिज्ञ और सरल व्यक्तित्व का धनी बताया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉ. सुशील चौधरी हमेशा आम आदमी के बीच रहे। वे बिना किसी भेदभाव के सभी से मिलते थे और समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करते थे। उनके दरवाजे हर समय जनता के लिए खुले रहते थे। यही कारण है कि आज उनके जाने से क्षेत्र ने एक अनुभवी और संवेदनशील नेता को खो दिया है।

परिवारजनों के अनुसार डॉ. चौधरी ने जीवन भर अनुशासन और मूल्यों को सर्वोपरि रखा। उन्होंने नई पीढ़ी को शिक्षा, ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी का महत्व समझाया। उनका पारिवारिक जीवन भी उतना ही सादा और संतुलित रहा जितना उनका सार्वजनिक जीवन।

उनका अंतिम संस्कार आज दोपहर 1 बजे उनके पैतृक गांव तीतरो में किया जाएगा। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में राजनीतिक नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, किसान और क्षेत्रवासी शामिल होने की संभावना है। गांव और आसपास के क्षेत्रों में शोक सभाओं का आयोजन किया जा रहा है, जहां लोग उनके योगदान को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

डॉ. सुशील चौधरी का निधन न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे नकुड़ विधानसभा क्षेत्र और सहारनपुर जनपद के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उन्होंने यह सिद्ध किया कि सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के माध्यम से भी राजनीति में एक मजबूत और सम्मानजनक पहचान बनाई जा सकती है।

आज जब क्षेत्र उन्हें अंतिम विदाई देने की तैयारी कर रहा है, हर आंख नम है और हर दिल में उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव है। डॉ. सुशील चौधरी भले ही हमारे बीच शारीरिक रूप से न रहें, लेकिन उनके विचार, कार्य और जनसेवा की भावना सदैव लोगों के दिलों में जीवित रहेगी।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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