Benefit of the doubt : 8 साल पुराने कार चोरी और तोड़फोड़ मामले में आरोपी बरी, सबूतों के अभाव में अदालत ने दिया संदेह का लाभ

चंडीगढ़। मनीमाजरा थाना क्षेत्र में वर्ष 2018 में कारों के शीशे तोड़कर पेट्रोल चोरी करने और चोरी के दस्तावेज बरामद होने के मामले में चंडीगढ़ की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमआईसी) की अदालत ने आरोपी अमरजीत सिंह को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 411 के तहत आरोप संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। मामले के अनुसार, 29 जनवरी 2018 को मनीमाजरा के समाधि गेट के पास कई कारों के शीशे तोड़े गए और उनमें से पेट्रोल चोरी कर लिया गया। शिकायतकर्ता सुरिंदर गंभीर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उनकी कार समेत अन्य वाहनों के शीशे तोड़े गए और पेट्रोल चोरी हुआ। इसके बाद मनीमाजरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर अमरजीत सिंह और एक अन्य आरोपी मुनीश वर्मा को गिरफ्तार किया। पुलिस का दावा था कि आरोपियों की निशानदेही पर चोरी से जुड़े दस्तावेज, जिनमें ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन की आरसी की फोटोकॉपी शामिल थी, बरामद की गई। बाद में मुनीश वर्मा की मृत्यु होने के कारण उसके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई।

वहीं, बचाव पक्ष के वकील पलविंदर सिंह लकी के मुताबिक, सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने शिकायतकर्ता सहित कई गवाहों को पेश किया। हालांकि, प्रमुख गवाह मनोज कुमार और आफताब वानी अदालत में आरोपी की पहचान नहीं कर सके और उन्होंने पुलिस के दावों का समर्थन नहीं किया। शिकायतकर्ता ने बयान दिया कि उसे नहीं पता कब, क्यों और कहां चोरी हुई। दोनों गवाहों को होस्टटाइल घोषित किया गया। जिरह के दौरान भी उनके बयान से अभियोजन के पक्ष में कोई ठोस तथ्य सामने नहीं आया। शिकायतकर्ता ने भी केवल कार के शीशे टूटने और पेट्रोल चोरी होने की बात कही, लेकिन किसी दस्तावेज की चोरी या आरोपी की पहचान की पुष्टि नहीं की।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मामले का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था और केवल दस्तावेजों की बरामदगी के आधार पर यह साबित नहीं किया जा सकता कि आरोपी को पता था कि बरामद दस्तावेज चोरी की संपत्ति हैं। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। इसलिए अमरजीत सिंह को धारा 411 के आरोप से बरी कर दिया गया।
फैसले के बाद अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया और उसके जमानती एवं मुचलका बांड भी समाप्त करने के आदेश दिए।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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