Dairy products destroyed : हापुड़ में खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, डेयरी पर छापा, 200 किलोग्राम संदिग्ध दुग्ध उत्पाद नष्ट

हापुड़। जनपद में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और मिलावटखोरी पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बुधवार को व्यापक अभियान चलाया। आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के निर्देश तथा जिलाधिकारी के आदेश के अनुपालन में गठित सचल दल ने गढ़मुक्तेश्वर तहसील क्षेत्र के ग्राम सदरपुर स्थित एक डेयरी प्रतिष्ठान पर औचक निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान खाद्य सुरक्षा टीम ने विभिन्न दुग्ध उत्पादों के नमूने संग्रहित किए, बड़ी मात्रा में अस्वच्छ परिस्थितियों में रखे गए खाद्य पदार्थ नष्ट कराए तथा प्रतिष्ठान संचालक को सुधारात्मक कार्रवाई के लिए नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की।
इस विशेष अभियान का नेतृत्व सहायक आयुक्त (खाद्य)-II चन्द्र शेखर मिश्र ने किया। उनके नेतृत्व में गठित टीम में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी पंकज कुमार, खाद्य सुरक्षा अधिकारी सोवेन्द्र सिंह पंघाल, विपिन कुमार सिंह, आर.पी. गुप्ता, सुश्री सहरिश सादात तथा मोहित कुमार शामिल रहे। टीम ने जिले में खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जांच के लिए निर्धारित प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान टीम ग्राम सदरपुर, तहसील गढ़मुक्तेश्वर स्थित राधे श्याम डेयरी पहुंची। यहां खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने डेयरी में तैयार एवं संग्रहित दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता, स्वच्छता और भंडारण व्यवस्था का गहन निरीक्षण किया। जांच के दौरान टीम को कई कमियां दिखाई दीं, जिसके बाद खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की गई।
कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने पनीर का एक नमूना, मिश्रित दूध के दो नमूने, क्रीम का एक नमूना तथा खोया का एक नमूना संग्रहित किया। इस प्रकार कुल पांच खाद्य नमूने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सीलबंद कर जांच के लिए सुरक्षित किए गए। इन नमूनों को खाद्य विश्लेषण के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा, जहां उनकी गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप होने की जांच की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि डेयरी में कुछ दुग्ध उत्पाद अस्वच्छ परिस्थितियों में संग्रहित किए गए थे। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप न पाए जाने पर टीम ने लगभग 50 किलोग्राम मिल्क क्रीम, जिसकी अनुमानित कीमत 16 हजार रुपये बताई गई, मौके पर ही नष्ट करा दी।
इसी प्रकार डेयरी में रखा गया लगभग 150 किलोग्राम पनीर, जिसकी अनुमानित कीमत 45 हजार रुपये आंकी गई, भी अस्वच्छ परिस्थितियों में संग्रहित पाया गया। खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने उक्त पनीर को भी नष्ट करा दिया। कुल मिलाकर लगभग 200 किलोग्राम संदिग्ध दुग्ध उत्पाद नष्ट कराए गए, ताकि वे बाजार में बिक्री के लिए न पहुंच सकें।
निरीक्षण के दौरान डेयरी प्रतिष्ठान में स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा से संबंधित कई कमियां भी पाई गईं। अधिकारियों ने संचालक को निर्देश दिए कि निर्धारित समय के भीतर सभी कमियों को दूर किया जाए। विभाग द्वारा प्रतिष्ठान संचालक को सुधार सूचना (इम्प्रूवमेंट नोटिस) जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि संग्रहित सभी नमूनों को विधिवत सील कर राज्य खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद यदि किसी भी नमूने में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन या मिलावट पाई जाती है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत विधिक कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट आने तक अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि नमूने मानकों के अनुरूप पाए जाते हैं तो उसके अनुसार कार्रवाई होगी, जबकि मानक से भिन्न पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठान के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
सहायक आयुक्त (खाद्य)-II चन्द्र शेखर मिश्र ने बताया कि जिले में मिलावटखोरी और अस्वच्छ खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ऐसे निरीक्षण अभियान लगातार जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने डेयरी संचालकों एवं अन्य खाद्य कारोबारियों से अपील की कि वे खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता के सभी मानकों का कड़ाई से पालन करें। खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण और बिक्री के दौरान स्वच्छता बनाए रखना प्रत्येक प्रतिष्ठान की जिम्मेदारी है। नियमों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने आम नागरिकों से भी अपील की कि यदि उन्हें किसी प्रतिष्ठान पर मिलावटी, संदिग्ध या अस्वच्छ खाद्य पदार्थों की बिक्री की जानकारी मिले तो इसकी सूचना संबंधित विभाग को दें। विभाग द्वारा प्राप्त शिकायतों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि दुग्ध उत्पादों जैसे दूध, पनीर, खोया और क्रीम की गुणवत्ता सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। यदि इनका निर्माण या भंडारण स्वच्छ परिस्थितियों में न किया जाए तो खाद्य जनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता जांच अत्यंत आवश्यक है।
जिले में चलाया जा रहा यह अभियान खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल मिलावटखोरों पर अंकुश लगेगा, बल्कि खाद्य व्यवसायियों में भी नियमों के पालन के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जनपद में ऐसे निरीक्षण आगे भी नियमित रूप से जारी रहेंगे। त्योहारों, विशेष अवसरों तथा सामान्य दिनों में भी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच की जाएगी, ताकि आम जनता को सुरक्षित और मानक गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराए जा सकें।
विभाग ने दोहराया कि खाद्य सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि खाद्य कारोबारियों और उपभोक्ताओं की भी साझा जिम्मेदारी है। नियमों का पालन, स्वच्छता बनाए रखना और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों का उपयोग ही स्वस्थ समाज की आधारशिला है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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