Event organized : जिला अस्पताल हापुड़ में विश्व कंगारू मदर केयर दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

हापुड़ जिले में नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और देखभाल को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विश्व कंगारू मदर केयर दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला अस्पताल हापुड़ और सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज हापुड़ के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समय से पूर्व जन्मे (प्रिमेच्योर) और कम वजन वाले नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल के लिए कंगारू मदर केयर (KMC) पद्धति के महत्व को समाज तक पहुंचाना था।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, पीजी छात्र-छात्राएं और माताएं उपस्थित रहीं। इस अवसर पर चिकित्सकों ने कंगारू मदर केयर के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी और इसके वैज्ञानिक एवं चिकित्सकीय लाभों को सरल भाषा में समझाया। कार्यक्रम के दौरान एक नुक्कड़ नाटक का भी आयोजन किया गया, जिसमें कलाकारों ने भावनात्मक और प्रभावी तरीके से यह संदेश दिया कि नवजात शिशुओं के लिए मां का स्पर्श और देखभाल कितनी महत्वपूर्ण होती है।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉ. योगेश गोयल, डॉ. के.पी. सिंह, डॉ. राजेश सिंह, डॉ. हेमलता सिंह, डॉ. भावना, डॉ. भारत तथा डॉ. पल्लवी गुप्ता सहित अनेक विशेषज्ञों ने भाग लिया। इनके साथ पीजी छात्र-छात्राएं, नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल की अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि कंगारू मदर केयर एक सरल, सुरक्षित और अत्यंत प्रभावी पद्धति है, जिसमें नवजात शिशु को मां की त्वचा से त्वचा के संपर्क में रखा जाता है। उन्होंने कहा कि यह विधि विशेष रूप से कम वजन और समय से पूर्व जन्मे बच्चों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होती है। इस पद्धति से शिशु को मां की गर्माहट, सुरक्षा और पोषण का लाभ मिलता है, जिससे उसका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है।
चिकित्सकों ने यह भी बताया कि कंगारू मदर केयर से नवजात शिशुओं में संक्रमण का खतरा कम होता है, शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय कमी आती है। इसके अलावा, यह तकनीक शिशुओं के वजन बढ़ाने और उनके समग्र विकास में भी सहायक होती है। विशेषज्ञों ने कहा कि यह विधि केवल अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे घर पर भी आसानी से अपनाया जा सकता है, जिससे मां और बच्चे के बीच भावनात्मक संबंध और मजबूत होता है।
कार्यक्रम में डॉ. पल्लवी गुप्ता द्वारा कंगारू मदर केयर पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। उन्होंने बताया कि जन्म के तुरंत बाद ही इस प्रक्रिया को शुरू किया जा सकता है और इसमें परिवार के अन्य सदस्य भी सहयोग कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह तकनीक विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए बेहद उपयोगी है, जहां आधुनिक संसाधन सीमित होते हैं।

डॉ. पल्लवी गुप्ता ने यह भी समझाया कि कंगारू मदर केयर के दौरान मां को अपने शिशु को लगातार अपने सीने से लगाकर रखना होता है, जिससे शिशु को लगातार गर्माहट मिलती रहती है। यह प्रक्रिया न केवल शिशु के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि मां और बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि यह एक प्राकृतिक और बिना किसी खर्च की चिकित्सा पद्धति है, जिसे हर परिवार को अपनाना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें बताया गया कि कैसे वे माताओं को इस पद्धति के लिए प्रेरित कर सकते हैं और उन्हें सही तरीके से इसका अभ्यास सिखा सकते हैं। प्रशिक्षण सत्र में यह भी बताया गया कि नवजात शिशुओं की देखभाल में छोटी-छोटी सावधानियां कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इस अवसर पर उपस्थित माताओं और परिजनों को भी कंगारू मदर केयर के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। उन्हें समझाया गया कि यह तकनीक उनके नवजात बच्चों के जीवन को सुरक्षित और स्वस्थ बनाने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कई माताओं ने इस जानकारी को बेहद उपयोगी बताया और इसे अपनाने का संकल्प भी लिया।
कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक ने विशेष आकर्षण का केंद्र बनाया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से यह संदेश दिया कि मां का स्पर्श नवजात शिशु के लिए सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपचार है। नाटक के माध्यम से यह भी दिखाया गया कि कैसे छोटे-छोटे प्रयासों से नवजात शिशुओं की जान बचाई जा सकती है।
अंत में सभी चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और उपस्थित प्रतिभागियों ने नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए कंगारू मदर केयर को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि इस पद्धति को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाकर नवजात मृत्यु दर को कम किया जा सकता है और बच्चों का बेहतर भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।
यह कार्यक्रम न केवल एक जागरूकता अभियान था, बल्कि समाज में नवजात शिशु देखभाल के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी साबित हुआ। जिला अस्पताल हापुड़ में आयोजित यह पहल आने वाले समय में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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