
मुंबई। वर्ष 2021 के चर्चित एंटीलिया बम धमकी मामले और कारोबारी मनसुख हिरेन की मौत से जुड़े मुकदमे में पूर्व मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को जमानत मिलने की खबर सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध ताजा रिपोर्टों की जांच में इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी है। अगस्त 2026 की रिपोर्टों के अनुसार वाजे ने विशेष एनआईए अदालत में जमानत के लिए आवेदन किया था और अदालत ने अभियोजन पक्ष से जवाब मांगा था। सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट में भी वाजे को इस मामले में न्यायिक हिरासत में बताया गया है। इसलिए जमानत मंजूर होने की सूचना को फिलहाल आधिकारिक विस्तृत आदेश के बिना पुष्ट तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
यह मामला फरवरी-मार्च 2021 में सामने आया था और इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस से लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) तक की जांच में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुए। 25 फरवरी 2021 को दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के बाहर एक एसयूवी बरामद हुई थी, जिसमें विस्फोटक सामग्री और धमकी भरा पत्र मिला था। कुछ दिनों बाद इस वाहन से जुड़े कारोबारी मनसुख हिरेन का शव ठाणे की खाड़ी में मिला। दोनों घटनाओं को जोड़कर जांच आगे बढ़ी और बाद में मामला एनआईए को सौंप दिया गया।
पांच साल से न्यायिक हिरासत में हैं वाजे
सचिन वाजे को एनआईए ने मार्च 2021 में गिरफ्तार किया था। अगस्त 2026 में सामने आई उनकी जमानत याचिका के अनुसार, वह लगभग पांच वर्षों से जेल में हैं और अभी तक मुकदमे की सुनवाई पूरी तरह शुरू नहीं हो पाई थी। वाजे की ओर से अदालत में लंबे समय से चल रही हिरासत और मुकदमे में देरी को जमानत का आधार बनाया गया। उनकी याचिका में कहा गया कि मामले में बड़ी संख्या में दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और गवाह हैं, जिसके कारण सुनवाई पूरी होने में समय लग सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार मामले में 10 आरोपी हैं और लगभग 320 गवाहों का उल्लेख किया गया है। मामले में बड़ी मात्रा में वीडियो फुटेज तथा अन्य डिजिटल साक्ष्य भी जांच एजेंसी के पास होने की बात जमानत याचिका में कही गई थी। वाजे ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई के अधिकार का हवाला देते हुए राहत की मांग की थी। अदालत ने इस आवेदन पर अभियोजन पक्ष को जवाब दाखिल करने के लिए कहा था।
अगस्त में तय हो चुके हैं आरोप
इस मामले में अगस्त 2026 में विशेष एनआईए अदालत ने सचिन वाजे सहित 10 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। अदालत की कार्यवाही के दौरान आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया था और आरोपों से इनकार किया था। आरोपों में हत्या, जबरन वसूली, सबूत नष्ट करने और आपराधिक साजिश से जुड़े प्रावधानों के अलावा यूएपीए और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराएं भी शामिल हैं।
आरोप तय होने के बाद मामला अब नियमित ट्रायल की दिशा में आगे बढ़ना है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहरा दिया है। आरोपों की पुष्टि या खंडन का अंतिम निर्णय मुकदमे में सामने आने वाले साक्ष्यों और अदालत के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।
मामले की शुरुआत कैसे हुई थी?
25 फरवरी 2021 को दक्षिण मुंबई स्थित एंटीलिया के बाहर एक एसयूवी खड़ी मिली थी। जांच में वाहन के अंदर जिलेटिन की छड़ें और एक धमकी भरा पत्र मिलने की बात सामने आई। वाहन का संबंध कारोबारी मनसुख हिरेन से जुड़ा था। हिरेन ने वाहन चोरी होने की शिकायत भी दर्ज कराई थी।
इसके कुछ दिनों बाद 5 मार्च 2021 को मनसुख हिरेन का शव ठाणे की खाड़ी में मिला। इस घटनाक्रम के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया और दोनों घटनाओं के बीच संभावित संबंधों की जांच शुरू हुई। बाद में एनआईए ने जांच अपने हाथ में ली।
एनआईए की चार्जशीट में 10 आरोपी
एनआईए ने सितंबर 2021 में इस मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। उस समय जांच एजेंसी की चार्जशीट करीब 9,000 से 10,000 पन्नों की बताई गई थी। इसमें भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के साथ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और यूएपीए की धाराएं भी लगाई गई थीं।
जांच एजेंसी ने सचिन वाजे समेत अन्य आरोपियों पर मामले में कथित आपराधिक साजिश में भूमिका होने के आरोप लगाए। हालांकि आरोपों से संबंधित अंतिम निष्कर्ष अदालत के ट्रायल के बाद ही निकलेगा।

अन्य आरोपियों को मिल चुकी है जमानत
मामले में शामिल कुछ अन्य आरोपियों को अलग-अलग चरणों में अदालतों से जमानत मिल चुकी है। पूर्व पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा को अगस्त 2023 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। अदालतों में अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर भी अलग-अलग आदेश आते रहे हैं।
अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदीप शर्मा, रियाजुद्दीन काजी, नरेश गौर और सुनील माने जमानत पर थे, जबकि सचिन वाजे सहित छह आरोपी न्यायिक हिरासत में बताए गए थे।
वाजे की जमानत याचिका का आधार
सचिन वाजे की ओर से दायर जमानत याचिका में मुख्य रूप से लंबे समय से जेल में रहने और ट्रायल में देरी का मुद्दा उठाया गया था। उनकी ओर से यह तर्क दिया गया कि गिरफ्तारी के बाद लंबा समय बीत चुका है और मुकदमे की प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है।
जमानत याचिका में मामले के व्यापक रिकॉर्ड, बड़ी संख्या में गवाहों और डिजिटल साक्ष्यों का उल्लेख किया गया। बचाव पक्ष का तर्क था कि यदि मुकदमे में लंबा समय लगता है तो आरोपी को अनिश्चित अवधि तक हिरासत में रखना व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा प्रश्न पैदा करता है।
हालांकि, जमानत दिए जाने या न दिए जाने का अंतिम निर्णय अदालत के आदेश पर निर्भर करता है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के आधार पर अगस्त में अदालत ने अभियोजन पक्ष से जवाब मांगा था और सितंबर की रिपोर्टों में वाजे को अभी भी न्यायिक हिरासत में बताया गया है।
जुलाई में discharge plea भी खारिज हुई थी
जुलाई 2026 में विशेष एनआईए अदालत ने सचिन वाजे की discharge plea भी खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि रिकॉर्ड में आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है और आरोप तय करने के चरण में अदालत को अभियोजन के पूरे साक्ष्य का विस्तृत परीक्षण नहीं करना होता।
इसके बाद अगस्त में अदालत ने वाजे सहित 10 आरोपियों पर आरोप तय किए। इस तरह मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक चरण पूरा हुआ और अब मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ने की स्थिति बनी।
फिलहाल मामले की स्थिति
सितंबर 2026 तक उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों के अनुसार सचिन वाजे एंटीलिया बम धमकी और मनसुख हिरेन हत्याकांड में न्यायिक हिरासत में थे। उन्होंने जमानत के लिए आवेदन किया था, जिसमें लंबे समय से जेल में रहने और ट्रायल में देरी का हवाला दिया गया था। वहीं अगस्त में उनके खिलाफ आरोप तय किए जा चुके हैं।
इसलिए सचिन वाजे को जमानत मिल जाने की सूचना की पुष्टि विस्तृत न्यायिक आदेश या विश्वसनीय ताजा रिपोर्ट से होने तक इसे लंबित जमानत याचिका के रूप में ही बताया जाना अधिक सटीक है। मामले में आगे की सुनवाई और अदालत का आदेश ही उनकी हिरासत की स्थिति को अंतिम रूप से स्पष्ट करेगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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