Homeopathic medicine : बरसाती बीमारियों से बचाव, होम्योपैथिक औषधि वितरण और नशामुक्ति जागरूकता अभियान में 229 बच्चों को मिला लाभ

फतेहपुर। इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी, आरोग्य भारती, द होमियोपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान तथा डॉ. सत्यनारायण सेवा फाउंडेशन के संयोजन में मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को जनस्वास्थ्य और जनजागरूकता को समर्पित एक विशेष अभियान का आयोजन किया गया। अभियान का नेतृत्व इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी के कार्यकारिणी सदस्य, चेयरमैन फतेहपुर तथा आरोग्य भारती के जिला सचिव डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों के प्रति बच्चों को जागरूक करना, रोग प्रतिरोधक क्षमता के महत्व की जानकारी देना, होम्योपैथिक औषधियों का वितरण करना तथा नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए जागरूकता फैलाना था।
कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ. अनुराग श्रीवास्तव एवं उनकी टीम ने विभिन्न शिक्षण संस्थानों का भ्रमण किया। सबसे पहले कम्पोजिट विद्यालय बकन्धा में 158 विद्यार्थियों को बरसात के मौसम में होने वाली सामान्य बीमारियों से बचाव तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में सहायक होम्योपैथिक औषधि वितरित की गई। इसके बाद प्राथमिक विद्यालय महाजरी में 30 बच्चों तथा बचपन डे केयर सेंटर में 41 दिव्यांग बच्चों को भी औषधि उपलब्ध कराई गई। इस प्रकार कुल 229 बच्चों को इस अभियान का लाभ मिला।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों जैसे सर्दी, जुकाम, वायरल संक्रमण, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड तथा जलजनित रोगों से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी गई। डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बच्चों को बताया कि मौसम परिवर्तन के समय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार, स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और व्यक्तिगत स्वच्छता अपनाकर कई मौसमी बीमारियों से बचा जा सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना केवल बीमारी होने के बाद उपचार कराना नहीं है, बल्कि बीमारी से पहले ही बचाव के उपाय अपनाना अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने बच्चों से नियमित रूप से स्वच्छ वातावरण में रहने, घर और विद्यालय के आसपास जलभराव न होने देने तथा मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने की अपील की।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा स्वच्छता जागरूकता अभियान भी रहा। डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बच्चों को व्यक्तिगत स्वच्छता के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भोजन करने से पहले और शौच के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने की आदत कई संक्रामक बीमारियों से बचा सकती है। उन्होंने बच्चों को साफ-सफाई बनाए रखने, नाखून समय-समय पर काटने, स्वच्छ कपड़े पहनने तथा दूषित भोजन और पानी से बचने की सलाह दी।
बचपन डे केयर सेंटर में अध्ययनरत 41 दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष रूप से बिस्कुट और चॉकलेट का वितरण भी किया गया। इस अवसर पर बच्चों के साथ आत्मीय संवाद स्थापित करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया गया। आयोजकों ने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर दिव्यांग बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा का ध्यान रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
अभियान के दौरान नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बच्चों को तंबाकू, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट तथा शराब जैसे नशीले पदार्थों से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तंबाकू का सेवन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण बन सकता है, जबकि अत्यधिक शराब का सेवन लीवर सिरोसिस सहित अनेक गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देता है। उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने परिवार तथा समाज के अन्य लोगों को भी नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करें।

उन्होंने कहा कि बच्चों में प्रारंभ से ही अच्छे संस्कार और स्वस्थ जीवनशैली विकसित करना आवश्यक है। यदि नई पीढ़ी नशे से दूर रहेगी तो समाज अधिक स्वस्थ, सुरक्षित और प्रगतिशील बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि अच्छे नागरिक बनाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई। बच्चों ने संकल्प लिया कि वे किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ का सेवन नहीं करेंगे और अपने परिवार एवं समाज में भी नशामुक्ति का संदेश फैलाएंगे। इस दौरान विद्यालय परिसर में सकारात्मक और उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधानाचार्या शैलजा गुप्ता ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े ऐसे जागरूकता अभियान विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक बनाना आवश्यक है।
कार्यक्रम में कमला गुप्ता, बचपन डे केयर सेंटर के समन्वयक पवन तिवारी, प्रमुख सहयोगी सुरेश कुमार श्रीवास्तव, अभिनव श्रीवास्तव (प्रबंध समिति सदस्य, इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी) सहित अनेक शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और स्वयंसेवक उपस्थित रहे। सभी ने बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और स्वच्छता अपनाने के लिए प्रेरित किया।
आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी इसी प्रकार के जनजागरूकता कार्यक्रम जिले के विभिन्न विद्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक बच्चों और अभिभावकों तक स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां पहुंचाई जा सकें। उनका उद्देश्य केवल औषधि वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, स्वच्छता की आदतें और नशामुक्त जीवनशैली विकसित करना भी है।
कार्यक्रम के समापन पर सभी ने इस प्रकार के सामाजिक एवं स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया। उपस्थित लोगों ने कहा कि यदि विद्यालय, सामाजिक संगठन और स्वास्थ्य विशेषज्ञ मिलकर इस प्रकार के प्रयास करते रहें, तो समाज में बेहतर स्वास्थ्य, स्वच्छता और नशामुक्ति की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। यह अभियान बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण, जनजागरूकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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