Serious Questions Raised  : मैहर शिक्षा विभाग में CAC नियुक्ति विवाद गहराया, नियमों और पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल ?

Serious Questions Raised : मैहर शिक्षा विभाग में CAC नियुक्ति विवाद गहराया, नियमों और पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल

Serious Questions Raised : मैहर शिक्षा विभाग में CAC नियुक्ति विवाद गहराया, नियमों और पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल
Serious Questions Raised : मैहर शिक्षा विभाग में CAC नियुक्ति विवाद गहराया, नियमों और पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल

मध्य प्रदेश के Maihar जिले में शिक्षा विभाग एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। विभाग में की गई एक नियुक्ति ने न केवल शिक्षकों के बीच चर्चा तेज कर दी है बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली और नियमों की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला कन्या संकुल में CAC यानी क्लस्टर एकेडमिक कोऑर्डिनेटर की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है, जहां माध्यमिक शिक्षक श्री वी.पी. सिंह को हटाकर श्री कपिल देव सिंह को जिम्मेदारी सौंपे जाने पर विवाद खड़ा हो गया है।

शिक्षा विभाग के इस फैसले के बाद शिक्षक समुदाय और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि विभागीय नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से नियुक्तियां की जा रही हैं। यह मामला अब केवल एक प्रशासनिक आदेश तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार श्री कपिल देव सिंह पहले से ही हाई स्कूल मड़ई में पदस्थ हैं। यह विद्यालय स्वयं एक जन शिक्षा केंद्र के अंतर्गत आता है। ऐसे में उन्हें दूसरे जन शिक्षा केंद्र के अंतर्गत आने वाले कन्या संकुल में CAC की जिम्मेदारी दिए जाने पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। शिक्षकों का कहना है कि यदि कोई शिक्षक पहले से एक संस्था में कार्यरत है, तो उसे दूसरी इकाई में अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपना नियमों के अनुरूप कैसे माना जा सकता है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार CAC का पद शिक्षा व्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पद पर नियुक्त व्यक्ति की जिम्मेदारी शैक्षणिक गुणवत्ता, शिक्षकों के मार्गदर्शन और स्कूलों की निगरानी से जुड़ी होती है। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमसम्मत होना आवश्यक है। लेकिन इस मामले में नियमों की अनदेखी के आरोपों ने पूरे मामले को विवादित बना दिया है।

शिक्षकों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि क्या अब विभागीय नियुक्तियां योग्यता और नियमों के आधार पर नहीं बल्कि सुविधा और प्रभाव के आधार पर की जा रही हैं। कई शिक्षकों का कहना है कि यदि अतिरिक्त प्रभार देना ही था तो क्षेत्र में मौजूद अन्य योग्य और पात्र शिक्षकों पर विचार क्यों नहीं किया गया। उनका आरोप है कि चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता दिखाई नहीं दे रही है।

क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि शिक्षा विभाग जैसे संवेदनशील विभाग में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए। यदि नियुक्तियों में ही नियमों का पालन नहीं होगा तो इसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा। लोगों का कहना है कि सरकारी विभागों में मनमानी और पक्षपातपूर्ण निर्णयों से कर्मचारियों का मनोबल भी प्रभावित होता है।

Serious Questions Raised : मैहर शिक्षा विभाग में CAC नियुक्ति विवाद गहराया, नियमों और पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल
Serious Questions Raised : मैहर शिक्षा विभाग में CAC नियुक्ति विवाद गहराया, नियमों और पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल

कुछ शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विभाग में लंबे समय से ऐसी नियुक्तियों को लेकर असंतोष बना हुआ है। उनका कहना है कि कई बार योग्य शिक्षकों की अनदेखी कर पसंदीदा लोगों को जिम्मेदारियां दे दी जाती हैं। इससे विभाग के भीतर असंतोष और अविश्वास का माहौल बनता जा रहा है।

इस मामले ने अब प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और शिक्षकों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर किस नियम के तहत यह नियुक्ति की गई। लोगों का कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रशासनिक पारदर्शिता बेहद जरूरी है। यदि महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां विवादों में घिर जाएंगी तो इसका असर शैक्षणिक वातावरण पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि विभाग को हर नियुक्ति प्रक्रिया को स्पष्ट और सार्वजनिक बनाना चाहिए ताकि किसी प्रकार की शंका या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

मामले को लेकर सोशल मीडिया और शिक्षा जगत में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई लोग इसे विभागीय लापरवाही और नियमों की अनदेखी बता रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यदि विभाग के पास इस नियुक्ति को लेकर स्पष्ट नियम और आदेश हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।

अब इस पूरे मामले में जिला शिक्षा विभाग और प्रशासन की भूमिका पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या प्रशासन इस मामले की गंभीरता से जांच करेगा या फिर यह मामला भी अन्य विवादों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों की मांग है कि शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्त कदम नहीं उठाए गए तो शिक्षा व्यवस्था में लोगों का विश्वास कमजोर पड़ सकता है।

फिलहाल CAC नियुक्ति को लेकर उठे सवालों ने मैहर के शिक्षा विभाग को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब देखना यह होगा कि विभाग इस विवाद पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या इस मामले में किसी प्रकार की जांच या कार्रवाई की जाती है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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