
हापुड़, 5 नवंबर 2026। भारत सरकार द्वारा संचालित टीबी मुक्त भारत अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार विभिन्न स्तरों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इसी क्रम में जनपद हापुड़ में एसएसवी इंटर कॉलेज के सभागार में एनसीसी कैडेट्स के लिए टीबी जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को टीबी जैसी गंभीर संक्रामक बीमारी के प्रति जागरूक करना और उन्हें अभियान का सक्रिय सहभागी बनाना रहा। प्रशिक्षण के दौरान जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने एनसीसी कैडेट्स को टीबी रोग के लक्षण, बचाव, जांच और उपचार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां विस्तारपूर्वक प्रदान कीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि टीबी यानी क्षय रोग एक संक्रामक बीमारी है, लेकिन सही समय पर इसकी पहचान और नियमित उपचार से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि टीबी मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, हालांकि यह शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। इस बीमारी के प्रति जागरूकता का अभाव और समय पर जांच नहीं कराना इसके प्रसार का प्रमुख कारण बन सकता है। इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को टीबी के लक्षणों और इससे बचाव के उपायों की जानकारी होना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने एनसीसी कैडेट्स को बताया कि दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी रहना, लगातार बुखार आना, विशेषकर शाम के समय बुखार बढ़ना, रात में पसीना आना, तेजी से वजन कम होना, भूख न लगना और कमजोरी महसूस होना टीबी के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति में इस प्रकार के लक्षण दिखाई दें तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे व्यक्तियों को नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर टीबी की जांच कराने के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीबी की पुष्टि केवल चिकित्सकीय जांच के माध्यम से ही की जा सकती है।
डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि टीबी के मरीजों को लेकर समाज में फैली गलत धारणाओं और भेदभाव को समाप्त करना भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई बार जानकारी के अभाव में मरीज अपनी बीमारी छिपाते हैं और समय पर उपचार नहीं कराते। इससे न केवल उनकी परेशानी बढ़ती है, बल्कि संक्रमण दूसरे लोगों तक पहुंचने का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में समाज के लोगों को मरीजों के प्रति संवेदनशील और सहयोगात्मक व्यवहार अपनाना चाहिए। उन्होंने कैडेट्स को समझाया कि टीबी से पीड़ित व्यक्ति को अलग-थलग करने के बजाय उसे उपचार के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में एनसीसी कैडेट्स को बताया गया कि टीबी की रोकथाम के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता, घरों और सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त वायु संचार, खांसते और छींकते समय मुंह एवं नाक को ढकना तथा संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर आवश्यक सावधानियां बरतना महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही पौष्टिक भोजन, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाए रखने में सहायक होती है। कैडेट्स को यह भी बताया गया कि टीबी का उपचार बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। चिकित्सक द्वारा निर्धारित अवधि तक दवाओं का नियमित सेवन करना बेहद जरूरी है।

इस अवसर पर जिला क्षय रोग अधिकारी ने एनसीसी कैडेट्स की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि युवा किसी भी सामाजिक अभियान को जन-जन तक पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। एनसीसी कैडेट्स अनुशासन, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना के साथ कार्य करते हैं। यदि यही युवा टीबी मुक्त भारत अभियान के संदेश को अपने परिवार, मोहल्ले, गांव और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचाएं तो अधिक से अधिक लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सकता है। उन्होंने कैडेट्स से अपील की कि वे अपने आसपास ऐसे लोगों की पहचान करने में सहयोग करें, जिनमें टीबी के संभावित लक्षण दिखाई देते हैं और उन्हें बिना किसी संकोच के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच कराने के लिए प्रेरित करें।
उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। जब आम नागरिक भी इस अभियान को अपनी जिम्मेदारी समझकर आगे आएंगे, तभी टीबी के संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
कार्यक्रम के दौरान एनसीसी कैडेट्स को यह भी समझाया गया कि टीबी के प्रति जागरूकता फैलाते समय मरीजों की निजता और सम्मान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को बीमारी के आधार पर अपमानित या भेदभाव का सामना नहीं करना पड़े, यह सुनिश्चित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। कैडेट्स अपने स्तर से लोगों को यह संदेश दे सकते हैं कि टीबी कोई लाइलाज बीमारी नहीं है और इसका उपचार सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से उपलब्ध है।
प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद एनसीसी कैडेट्स ने टीबी मुक्त भारत अभियान में सक्रिय सहयोग करने का संकल्प लिया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे अपने आसपास के लोगों को टीबी के लक्षणों, बचाव, जांच और उपचार के बारे में जागरूक करेंगे तथा संभावित मरीजों को समय पर जांच कराने के लिए प्रेरित करेंगे। कैडेट्स ने अभियान के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
कार्यक्रम में कमान अधिकारी राजेश बाहरे, रिसालदार मेजर संजय धामा, लेफ्टिनेंट डॉ. कपिल बिसला, जिला पीपीएम कोऑर्डिनेटर सुशील चौधरी एवं उपचार पर्यवेक्षक दीपक कुमार उपस्थित रहे। सभी ने टीबी मुक्त भारत अभियान में युवाओं की भागीदारी को आवश्यक बताते हुए कैडेट्स को सामाजिक जागरूकता के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया।
स्वास्थ्य विभाग ने विश्वास व्यक्त किया कि एनसीसी कैडेट्स की सक्रिय भागीदारी से जनपद में टीबी के प्रति जागरूकता का दायरा बढ़ेगा। युवा शक्ति के सहयोग से संभावित मरीजों की समय पर पहचान, जांच और उपचार के प्रति लोगों को प्रेरित किया जा सकेगा। इस प्रकार जनसहभागिता और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से हापुड़ को टीबी मुक्त बनाने के अभियान को नई गति मिलेगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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