Specialized Training : सड़क दुर्घटना पीड़ितों को मिलेगा सात दिन तक निःशुल्क उपचार, पीएम राहत कैशलेस योजना पर आयोजित हुआ विशेष प्रशिक्षण

हापुड़। सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों को समय पर और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मंगलवार दोपहर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के मीटिंग रूम में एक महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस बैठक में पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) तथा जनपद के विभिन्न निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार की पीएम राहत कैशलेस ट्रीटमेंट योजना के बारे में संबंधित विभागों और अस्पतालों को विस्तृत जानकारी देना तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन की रणनीति तैयार करना था।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों की जान बचाने के लिए समय पर उपचार अत्यंत आवश्यक होता है। कई बार दुर्घटना के बाद उपचार में देरी होने से घायल व्यक्ति की स्थिति गंभीर हो जाती है अथवा उसकी मृत्यु तक हो जाती है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार द्वारा पीएम राहत कैशलेस ट्रीटमेंट योजना लागू की गई है, जिसके तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को निजी अस्पतालों में भी निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
कार्यक्रम में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं आईआरएडी (इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस) के स्वास्थ्य नोडल अधिकारी डॉ. सुनील गुप्ता ने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा टीएमएस (ट्रीटमेंट मैनेजमेंट सिस्टम) पोर्टल पर पीड़ित की विक्टिम आईडी जनरेट की जाएगी। इसके बाद संबंधित पुलिस विभाग द्वारा 24 से 48 घंटे के भीतर दुर्घटना की पुष्टि और सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन पूरा होते ही घायल व्यक्ति का उपचार योजना के अंतर्गत पूरी तरह निःशुल्क प्रारंभ हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत दुर्घटना में घायल व्यक्ति को सात दिनों तक कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। उपचार पर होने वाला खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। प्रति व्यक्ति एक रुपये से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक के उपचार की व्यवस्था इस योजना में शामिल की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक तंगी या अन्य कारणों से किसी भी घायल व्यक्ति का इलाज प्रभावित न हो और उसे तत्काल चिकित्सीय सहायता प्राप्त हो सके।
बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में शुरुआती एक घंटा अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसे चिकित्सा विज्ञान में ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है। यदि इस अवधि के भीतर घायल व्यक्ति को उचित चिकित्सा सुविधा मिल जाए तो उसकी जान बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राहत कैशलेस ट्रीटमेंट योजना को लागू किया है।
इस अवसर पर पुलिस विभाग की ओर से क्षेत्राधिकारी यातायात (सीओ ट्रैफिक) राहुल यादव उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग इस योजना के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दुर्घटना की सूचना मिलने पर पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना का सत्यापन किया जाएगा, जिससे उपचार प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को भी योजना के प्रति संवेदनशील रहने तथा घायलों को शीघ्र चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में सहयोग करने की बात कही।

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) की ओर से जिला आईआरएडी प्रभारी निशांत राजपूत ने उपस्थित अधिकारियों, अस्पताल प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने टीएमएस पोर्टल पर विक्टिम आईडी जनरेट करने, डेटा अपलोड करने, दुर्घटना सत्यापन की प्रक्रिया तथा ऑनलाइन मॉनिटरिंग संबंधी महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान भी किया गया ताकि योजना के संचालन में किसी प्रकार की तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो।
कार्यक्रम का संचालन जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी प्रशांत सिरोही के नेतृत्व में किया गया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित आंकड़ों का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय भी मजबूत होगा। इससे न केवल दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित सहायता मिलेगी बल्कि सड़क सुरक्षा से संबंधित नीतियों के निर्माण में भी सहायता प्राप्त होगी।
बैठक में उपस्थित निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने भी योजना का स्वागत किया और इसे जनहित में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि कई बार दुर्घटना में घायल व्यक्ति के परिजन तत्काल उपचार का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं होते, जिसके कारण इलाज प्रभावित होता है। नई योजना लागू होने से ऐसी परिस्थितियों में मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।
बैठक में राहवीर योजना की भी विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर के दौरान अस्पताल पहुंचाने में मदद करता है तो उसे सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत योग्य व्यक्ति को 25 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा सकती है। इसका उद्देश्य लोगों को दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए प्रेरित करना और समय पर उपचार सुनिश्चित करना है।
अधिकारियों ने कहा कि अक्सर लोग कानूनी प्रक्रिया या अन्य आशंकाओं के कारण सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों की मदद करने से बचते हैं, जबकि समय पर सहायता मिलने से किसी की जान बचाई जा सकती है। राहवीर योजना ऐसे लोगों को सम्मानित और प्रोत्साहित करने का माध्यम बनेगी।
बैठक के अंत में सभी विभागों के अधिकारियों ने समन्वय के साथ कार्य करने का संकल्प लिया और कहा कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि पीएम राहत कैशलेस ट्रीटमेंट योजना और राहवीर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी तथा घायल व्यक्तियों को बेहतर और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी। जनपद हापुड़ में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सड़क सुरक्षा और जनकल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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