Serious Allegations : ग्राम बर्रट में सामुदायिक भवन विवाद गहराया, ग्रामीणों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप ?

Serious Allegations : ग्राम बर्रट में सामुदायिक भवन विवाद गहराया, ग्रामीणों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

Serious Allegations : ग्राम बर्रट में सामुदायिक भवन विवाद गहराया, ग्रामीणों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
Serious Allegations : ग्राम बर्रट में सामुदायिक भवन विवाद गहराया, ग्रामीणों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

दमोह/पटेरा, 02 जून 2026। जनपद पंचायत पटेरा अंतर्गत ग्राम पंचायत बर्रट में स्वीकृत सामुदायिक भवन के निर्माण स्थल को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम बर्रट के लिए स्वीकृत सामुदायिक भवन का निर्माण कार्य नियमों की अनदेखी करते हुए दूसरे ग्राम में स्थानांतरित कर दिया गया है, जिससे गांव में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्णय न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि ग्रामवासियों की मूल आवश्यकताओं और भावनाओं की भी अनदेखी करता है।

ग्रामीणों के अनुसार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्राम बर्रट में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए स्वीकृति प्रदान की गई थी, जिसका उद्देश्य गांव में सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए एक स्थायी सुविधा उपलब्ध कराना था। लेकिन आरोप है कि बाद में इस भवन का निर्माण कार्य ग्राम नीमखेड़ा में प्रारंभ कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम बर्रट में पर्याप्त शासकीय भूमि उपलब्ध होने के बावजूद गलत जानकारी और मनमानी निर्णय के आधार पर भवन का स्थान परिवर्तन किया गया, जो कि नियमों के विपरीत है।

ग्रामवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्होंने इस विषय में कई बार संबंधित अधिकारियों को आवेदन सौंपे, जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई तथा समाचार माध्यमों के जरिए प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। इसके बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की निष्क्रियता के कारण सरपंच और संबंधित कर्मचारियों के रवैये को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि जब कलेक्टर दमोह ने ग्राम बर्रट का दौरा किया था, तब ग्रामीणों द्वारा हनुमान मंदिर के समीप सामुदायिक भवन अथवा किसी सार्वजनिक सुविधा के निर्माण की मांग रखी गई थी। ग्रामीणों के अनुसार उस समय यह भी बताया गया था कि सामुदायिक भवन ग्राम बर्रट के लिए स्वीकृत हुआ है और सभी की सहमति से इसका स्थान भी तय किया गया था। लेकिन बाद में निर्माण स्थल में परिवर्तन किए जाने से ग्रामीणों में असंतोष फैल गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच मुरारी प्यासी द्वारा अपनी मनमानी करते हुए ग्रामवासियों की सहमति और भावनाओं की अनदेखी की गई है। उनका कहना है कि ग्राम बर्रट नदी किनारे बसा हुआ गांव है, जहां सार्वजनिक आयोजनों और सामाजिक गतिविधियों के लिए सामुदायिक भवन की अत्यंत आवश्यकता है। ऐसे में भवन का निर्माण किसी अन्य ग्राम में किया जाना न्यायसंगत नहीं है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि भवन ग्राम बर्रट के लिए स्वीकृत हुआ है तो उसका लाभ उसी गांव को मिलना चाहिए, अन्यथा यह निर्णय ग्रामीण हितों के विपरीत है।

Serious Allegations : ग्राम बर्रट में सामुदायिक भवन विवाद गहराया, ग्रामीणों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
Serious Allegations : ग्राम बर्रट में सामुदायिक भवन विवाद गहराया, ग्रामीणों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

इस मामले में तब नया मोड़ आया जब ग्राम बर्रट के पटवारी अरविंद पटेल से जानकारी ली गई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ग्राम बर्रट में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए पर्याप्त शासकीय भूमि उपलब्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में पंचायत विभाग द्वारा उनसे किसी प्रकार की आधिकारिक चर्चा नहीं की गई और न ही उनके कार्यालय में कोई प्रस्ताव या पत्र प्राप्त हुआ है। पटवारी के इस बयान ने पूरे मामले को और अधिक जटिल बना दिया है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि भूमि उपलब्धता के बावजूद निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई।

पटवारी के बयान के बाद ग्रामीणों के आरोप और अधिक मजबूत हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब शासकीय भूमि उपलब्ध थी, तो भवन का स्थान परिवर्तन किस आधार पर किया गया, यह एक गंभीर प्रश्न है। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया और निर्णय प्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर जनपद पंचायत पटेरा के सीईओ हलधर मिश्रा से इस मामले में प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इसी प्रकार उपयंत्री राहुल पटेल से भी संपर्क करने पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अधिकारियों की चुप्पी से ग्रामीणों की नाराजगी और अधिक बढ़ गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि लगातार शिकायतों, जनसुनवाई में आवेदन और मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के बावजूद प्रशासन का कोई ठोस कदम न उठाना बेहद चिंताजनक है। उनका आरोप है कि यह पूरा मामला केवल एक निर्माण कार्य का नहीं, बल्कि पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी का भी उदाहरण है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराए। यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता, नियमों की अनदेखी या भ्रष्टाचार पाया जाता है तो संबंधित सरपंच, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही सामुदायिक भवन का निर्माण ग्राम बर्रट में ही सुनिश्चित किया जाए ताकि ग्रामीणों को उनका अधिकार मिल सके।

यह मामला अब केवल एक पंचायत विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता, ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और जनहित से जुड़े निर्णयों की गंभीरता पर भी सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों की बढ़ती नाराजगी और प्रशासनिक चुप्पी के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में इस विवाद का समाधान किस प्रकार किया जाता है और क्या ग्रामीणों को उनका अधिकार वास्तव में प्राप्त हो पाता है या नहीं।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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