Grand Launch : सीसीआरटी दमोह के इंद्रधनुष-2026 शिविर का भव्य शुभारंभ, बच्चों ने दिखाया उत्साह

दमोह, 2026। सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) क्षेत्रीय केंद्र दमोह द्वारा आयोजित ग्रीष्मकालीन सांस्कृतिक शिविर “इंद्रधनुष-2026 : विविध भारत” का शुभारंभ 01 जून 2026 को अत्यंत उत्साहपूर्ण और रचनात्मक वातावरण में किया गया। यह शिविर 10 जून 2026 तक चलेगा और इसका उद्देश्य बच्चों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कलाओं तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति के विविध रूपों से परिचित कराना है। उद्घाटन दिवस पर बड़ी संख्या में बालक-बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिससे पूरे परिसर में रचनात्मक ऊर्जा और उमंग का माहौल देखने को मिला।
शिविर के प्रथम दिन प्रतिभागी बच्चों को पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा से अवगत कराया गया तथा उन्हें यह बताया गया कि आगामी दिनों में किस प्रकार की कला एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। आयोजकों द्वारा बच्चों को यह भी समझाया गया कि यह शिविर केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह उनके व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास बढ़ाने और भारतीय संस्कृति को गहराई से समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। बच्चों को यह प्रेरणा दी गई कि वे इस अवसर का अधिकतम उपयोग करते हुए अपनी रचनात्मक क्षमता को निखारें और नई-नई कलाओं को सीखने में रुचि लें।
शिविर के अंतर्गत बच्चों को विभिन्न प्रमुख कला विधाओं का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिसमें शास्त्रीय नृत्य (कथक), हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन, रंगमंच कला तथा पारंपरिक शिल्प कला के अंतर्गत मिट्टी के बर्तन निर्माण जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। इन सभी विधाओं के लिए अनुभवी प्रशिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जो बच्चों को कला की बारीकियों से परिचित करा रहे हैं। प्रथम दिन ही बच्चों ने इन गतिविधियों में गहरी रुचि दिखाई और उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया।
कथक नृत्य सत्र में बच्चों को ताल, लय, भाव और मुद्राओं के मूलभूत सिद्धांतों की जानकारी दी गई, जिससे वे भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सुंदरता और अनुशासन को समझ सकें। इसी प्रकार हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में बच्चों को स्वर, राग और ताल के आधारभूत तत्वों से परिचित कराया गया। रंगमंच सत्र में उन्हें अभिनय, संवाद अदायगी, मंच संचालन और अभिव्यक्ति कौशल के महत्व को समझाया गया, जिससे उनका आत्मविश्वास और संवाद क्षमता विकसित हो सके। मिट्टी के बर्तन निर्माण कार्यशाला में बच्चों ने अपने हाथों से विभिन्न आकारों को बनाकर पारंपरिक शिल्प कला का अनुभव प्राप्त किया, जिससे उनकी रचनात्मक सोच को नया आयाम मिला।

सीसीआरटी के इस शिविर का मुख्य उद्देश्य केवल कला सिखाना नहीं है, बल्कि बच्चों में भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान, सामाजिक समरसता और रचनात्मक सोच का विकास करना भी है। आयोजकों के अनुसार इस प्रकार के शिविर बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि यह उन्हें पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक और सांस्कृतिक ज्ञान भी प्रदान करते हैं। बच्चों में टीम भावना, अनुशासन, सहयोग और आत्मविश्वास जैसे गुण विकसित करने के लिए इस प्रकार की गतिविधियाँ अत्यंत उपयोगी साबित होती हैं।
शिविर के उद्घाटन अवसर पर प्रशिक्षकों और आयोजकों ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत विविधताओं से भरा देश है और इसकी सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध एवं प्राचीन है। इस विरासत को समझना और आगे बढ़ाना नई पीढ़ी की जिम्मेदारी है। उन्होंने बच्चों को प्रेरित किया कि वे इस शिविर को केवल एक कार्यक्रम के रूप में न देखें, बल्कि इसे सीखने और स्वयं को बेहतर बनाने के अवसर के रूप में अपनाएं।
प्रथम दिवस के आयोजन में बच्चों की भागीदारी अत्यंत उत्साहपूर्ण रही और उन्होंने विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उनके चेहरे पर उत्साह, जिज्ञासा और सीखने की ललक स्पष्ट दिखाई दे रही थी। प्रशिक्षकों ने भी बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि सही मार्गदर्शन मिलने पर ये बच्चे भविष्य में कला और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
आयोजकों ने बताया कि आगामी दिनों में शिविर के अंतर्गत और भी विविध गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी, जिनमें नाटक, समूह गायन, चित्रकला, लोकनृत्य, हस्तशिल्प एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल होंगे। इसके साथ ही बच्चों को विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मंच पर प्रदर्शन का अवसर भी दिया जाएगा, जिससे उनका आत्मविश्वास और प्रस्तुति कौशल और अधिक मजबूत होगा।
सीसीआरटी क्षेत्रीय केंद्र दमोह द्वारा आयोजित यह शिविर न केवल बच्चों के लिए एक सीखने का मंच है, बल्कि यह उन्हें भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी है। इस प्रकार के आयोजन बच्चों में रचनात्मकता को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन्हें एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनने की दिशा में भी प्रेरित करते हैं।
कुल मिलाकर “इंद्रधनुष-2026 : विविध भारत” शिविर का शुभारंभ दमोह में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक माहौल में हुआ, जिसने बच्चों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया। यह शिविर आने वाले दिनों में न केवल बच्चों की प्रतिभा को निखारेगा, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति की गहराई और विविधता को समझने का एक अनूठा अवसर भी प्रदान करेगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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