Training Support : पोषण भी पढ़ाई भी अभियान से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिला नया प्रशिक्षण संबल

दमोह। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित “पोषण भी पढ़ाई भी” कार्यक्रम के अंतर्गत प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सक्षम आंगनबाड़ी एवं मिशन पोषण 2.0 के तहत आयोजित किया गया, जिसमें परियोजना दमोह शहरी, दमोह ग्रामीण एवं पथरिया क्षेत्र की अप्रशिक्षित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की क्षमता वृद्धि करना तथा उन्हें बच्चों के समग्र विकास, पोषण और शिक्षा से संबंधित आधुनिक अवधारणाओं एवं तकनीकों से अवगत कराना था।
वर्तमान समय में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल पोषण ही नहीं बल्कि गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा भी उतनी ही आवश्यक मानी जाती है। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए “पोषण भी पढ़ाई भी” कार्यक्रम को लागू किया गया है, ताकि शून्य से छह वर्ष तक की आयु के बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इस कार्यक्रम के अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें बाल विकास के विभिन्न आयामों में दक्ष बनाया जा रहा है।
परियोजना दमोह शहरी में आयोजित इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन (ईसीसीई) पाठ्यक्रम की बुनियादी समझ विकसित कराई गई। साथ ही बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी प्रदान की गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर्स एवं पर्यवेक्षकों द्वारा सत्र आयोजित किए गए। इसके अलावा विषय विशेषज्ञों के रूप में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन से जुड़े रिसोर्स पर्सन्स ने भी विशेष सहयोग प्रदान किया। उनके मार्गदर्शन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बच्चों के सीखने, समझने और विकास का मूल्यांकन करने की आधुनिक विधियों से परिचित कराया गया।
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस का मुख्य विषय प्रारंभिक बाल शिक्षा था। इस दौरान तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए संचालित “आधारशिला” कार्यक्रम के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यकर्ताओं को बच्चों के विकासात्मक क्षेत्रों जैसे संज्ञानात्मक विकास, भाषा एवं साक्षरता, सामाजिक एवं भावनात्मक विकास, शारीरिक विकास तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति के महत्व के बारे में बताया गया। प्रशिक्षण में सामूहिक चर्चाओं, गतिविधियों और खेलों के माध्यम से यह समझाया गया कि किस प्रकार बच्चों के भीतर सीखने की क्षमता विकसित की जा सकती है।
इस अवसर पर स्मृति खेल, रचनात्मक गतिविधियां और भाषा विकास से जुड़े अभ्यास भी कराए गए। कार्यकर्ताओं को यह बताया गया कि प्रारंभिक वर्षों में बच्चों के साथ सकारात्मक संवाद और खेल आधारित शिक्षा उनके भविष्य की नींव मजबूत करती है। प्रशिक्षण में विकासात्मक मील के पत्थरों की पहचान और बच्चों की प्रगति का आकलन करने की तकनीकों पर भी चर्चा की गई।

प्रशिक्षण के दूसरे दिन का केंद्रबिंदु पोषण रहा। इस दौरान पांच वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण की रोकथाम और प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। कार्यकर्ताओं को गंभीर कुपोषण (SAM), मध्यम कुपोषण (MAM) तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के प्रभावों और समाधान के बारे में प्रशिक्षित किया गया। विशेषज्ञों ने मानव जीवन चक्र में पोषण की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में उचित पोषण उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
सत्र के दौरान वीडियो प्रस्तुतीकरण और समूह चर्चाओं का आयोजन किया गया। पोषण परामर्श को प्रभावी बनाने के लिए नाटिका भी प्रस्तुत की गई, जिससे कार्यकर्ताओं को समुदाय में जागरूकता फैलाने के व्यावहारिक तरीके समझने का अवसर मिला। इसके अलावा विकास निगरानी, पोषण ट्रैकर के उपयोग और बच्चों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने के विषय में भी जानकारी प्रदान की गई।
विशेषज्ञों ने बाल विकास में माता-पिता और समुदाय की भूमिका पर भी जोर दिया। बताया गया कि यदि परिवार और समुदाय सक्रिय रूप से बच्चों के विकास में भागीदारी करें तो पोषण और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण से संबंधित गतिविधियां भी प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा रहीं।
प्रशिक्षण के तीसरे और अंतिम दिवस का विषय “पोषण भी पढ़ाई भी” की समग्र अवधारणा पर आधारित था। इस दौरान दिव्यांग बच्चों की पहचान, समावेशी शिक्षा और विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के विकास पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। कार्यकर्ताओं को समावेशन की अवधारणा समझाने के लिए केस स्टडी और व्यवहारिक गतिविधियों का आयोजन किया गया।
जन्म से तीन वर्ष तक के बच्चों की देखभाल, पोषण और प्रारंभिक उद्दीपन पर समूह चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि जीवन के शुरुआती तीन वर्ष बच्चे के मस्तिष्क विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए इस आयु वर्ग के बच्चों को उचित पोषण, प्रेमपूर्ण वातावरण और सीखने के अवसर प्रदान करना आवश्यक है।
प्रशिक्षण में बच्चों के सीखने और मूल्यांकन से संबंधित विभिन्न उपकरणों एवं तकनीकों पर भी चर्चा की गई। मासिक अनौपचारिक शिक्षा गतिविधियों, बाल पोर्टफोलियो तैयार करने तथा बच्चों की प्रगति का नियमित मूल्यांकन करने के तरीकों की जानकारी दी गई। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को समझने और उनके अनुरूप गतिविधियां संचालित करने में सहायता मिलेगी।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक नीति रजक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं अजीम प्रेमजी फाउंडेशन से दीप पांडे एवं गीतेश ने विषय विशेषज्ञ के रूप में प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने में सहयोग दिया। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से कार्यकर्ताओं को व्यावहारिक और उपयोगी जानकारी प्राप्त हुई।
महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी सुलेखा ठाकुर ने बताया कि “पोषण भी पढ़ाई भी” कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित यह प्रशिक्षण बच्चों के समग्र विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता न केवल बच्चों को बेहतर पोषण और शिक्षा उपलब्ध कराने में सक्षम होंगी, बल्कि समुदाय में जागरूकता फैलाकर स्वस्थ और शिक्षित समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगी।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के क्षमता संवर्धन कार्यक्रमों से आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और मिशन पोषण 2.0 के उद्देश्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सकेगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली कार्यकर्ता अब अपने-अपने क्षेत्रों में बच्चों के समग्र विकास के लिए और अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेंगी।