Application : जल जीवन मिशन घोटाला : पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी वैध, एसीबी कोर्ट ने खारिज किया प्रार्थना पत्र

जयपुर। जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में गिरफ्तार पूर्व पीएचईडी (PHED) मंत्री महेश जोशी को अदालत से बड़ा झटका लगा है। एसीबी कोर्ट संख्या-2 ने पूर्व मंत्री की उस याचिका (प्रार्थना पत्र) को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने परिजनों को लिखित सूचना न दिए जाने का हवाला देकर अपनी गिरफ्तारी को पूरी तरह ‘अवैध’ घोषित करने और तुरंत रिहा करने की मांग की थी। विशिष्ट न्यायाधीश राजेश कुमार दड़िया ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी में संवैधानिक अधिकारों और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तमाम कानूनी प्रावधानों की पूरी पालना की गई है। कोर्ट ने माना कि तकनीकी व मौखिक माध्यमों से परिजनों को समय पर गिरफ्तारी की सूचना मिल चुकी थी, इसलिए इसे गैर-कानूनी नहीं कहा जा सकता। महेश जोशी के अधिवक्ता ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश कर दलील दी थी कि 7 मई को जब पूर्व मंत्री को गिरफ्तार कर 5 दिन के पुलिस रिमांड के लिए अदालत में पेश किया गया, तब कानूनी नियमों और सुप्रीम कोर्ट के अनिवार्य दिशा-निर्देशों की खुली अवहेलना की गई।
वकील का आरोप था कि रिमांड की मांग करने से पूर्व न तो आरोपी को और न ही उनके परिजनों या अधिवक्ता को गिरफ्तारी के पुख्ता आधारों की कोई लिखित सूचना दी गई और न ही उसकी पावती (रसीद) ली गई। लिखित सूचना के अभाव में यह पूरी गिरफ्तारी प्रक्रिया अवैधानिक है, लिहाजा उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।
एसीबी का पलटवार: ‘व्हाट्सएप कॉल से दी पल-पल की जानकारी, स्क्रीनशॉट मौजूद’इस दलील का कड़ा विरोध करते हुए एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) की विशिष्ट लोक अभियोजक मंजूला जैन ने अदालत के सामने गिरफ्तारी का पूरा घटनाक्रम और तकनीकी साक्ष्य पेश किए।

आवास पर दी गई थी जानकारी: अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह जब टीम के साथ पूर्व मंत्री के आवास पर पहुंचे, तो वहां उनके बेटे रोहित जोशी, पुत्रवधू और बड़ी बहन मौजूद थीं। टीम ने उन्हें अपना परिचय पत्र दिखाकर महेश जोशी को ब्यूरो मुख्यालय ले जाने की स्पष्ट जानकारी दी थी।
व्हाट्सएप कॉल का इस्तेमाल: ब्यूरो मुख्यालय पर गिरफ्तारी के बाद इसकी सूचना सुबह सामान्य फोन कॉल और फिर बेटे रोहित जोशी के मोबाइल पर ‘व्हाट्सएप कॉल’ के जरिए दी गई।
स्क्रीनशॉट पेश किए: कोर्ट ले जाते समय और कोर्ट परिसर पहुंचने पर भी लगातार व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से परिजनों को अपडेट किया गया, जिसके पुख्ता स्क्रीनशॉट एसीबी ने अदालत के समक्ष सबूत के तौर पर पेश किए।
कोर्ट का फैसला : रिमांड के वक्त वकील मौजूद थे, तो अधिकार सुरक्षित
जज राजेश कुमार दड़िया की टिप्पणी : अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 48 का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अभियुक्त को अपना ‘बचाव करने का कानूनी अधिकार’ मिल सके। इस मामले में जब एसीबी ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर रिमांड मांगा, तब आरोपी के वकील वहां पहले से मौजूद थे और उन्होंने रिमांड अर्जी पर विस्तृत बहस भी की थी। इससे साफ सिद्ध होता है कि परिजनों और विधिक टीम को समय पर पूरी जानकारी थी।
हाईकोर्ट में आज सुनवाई: एसीबी कोर्ट से झटका लगने के बाद अब इस मामले में महेश जोशी के बेटे रोहित जोशी द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट में लगाई गई ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका’ (Habeas Corpus Petition) पर बुधवार को सुनवाई होनी तय है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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