Warning of a protest : कैशलेस सुविधा से वंचित शिक्षणेत्तर कर्मचारियों में रोष, आंदोलन की चेतावनी दी गई ?

Warning of a protest : कैशलेस सुविधा से वंचित शिक्षणेत्तर कर्मचारियों में रोष, आंदोलन की चेतावनी दी गई

Warning of a protest : कैशलेस सुविधा से वंचित शिक्षणेत्तर कर्मचारियों में रोष, आंदोलन की चेतावनी दी गई
Warning of a protest : कैशलेस सुविधा से वंचित शिक्षणेत्तर कर्मचारियों में रोष, आंदोलन की चेतावनी दी गई

कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षणेत्तर संघ, कानपुर देहात ने राज्य सरकार पर अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाया है। संघ के जिला अध्यक्ष अभिषेक कुमार दीक्षित ने कहा कि सरकार द्वारा शिक्षकों, शिक्षा मित्रों, अनुदेशकों एवं रसोइयों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा का लाभ प्रदान किया गया है, लेकिन उन्हीं विद्यालयों में कार्यरत लिपिकों एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को इस महत्वपूर्ण सुविधा से वंचित रखा गया है। इस निर्णय से शिक्षणेत्तर कर्मचारियों में गहरा असंतोष और रोष व्याप्त है।

संघ पदाधिकारियों का कहना है कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। विद्यालयों के प्रशासनिक कार्य, अभिलेखों का रखरखाव, छात्र-छात्राओं से संबंधित दस्तावेजी प्रक्रिया तथा अन्य व्यवस्थाओं का संचालन मुख्य रूप से लिपिकों एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के माध्यम से ही होता है। इसके बावजूद सरकार द्वारा उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना के लाभ से बाहर रखना उनके मनोबल को प्रभावित करने वाला निर्णय है।

जिला अध्यक्ष अभिषेक कुमार दीक्षित ने कहा कि सरकार लगातार “सबका साथ, सबका विकास” का नारा देती रही है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखकर ऐसा प्रतीत नहीं होता कि यह नारा सभी वर्गों पर समान रूप से लागू किया जा रहा है। उनका कहना है कि जब एक ही संस्था में कार्यरत विभिन्न वर्गों के कर्मचारियों में से कुछ को विशेष सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं और कुछ को उनसे वंचित रखा जा रहा है, तो यह समानता और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

उन्होंने कहा कि शिक्षणेत्तर कर्मचारी वर्षों से विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान निभा रहे हैं। ऐसे कर्मचारियों को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं से वंचित रखना न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक हितों की भी अनदेखी है। संघ का मानना है कि सरकार को इस विषय पर पुनर्विचार करते हुए सभी शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा के दायरे में शामिल करना चाहिए।

संघ ने आउटसोर्स कर्मचारियों की स्थिति पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। अभिषेक कुमार दीक्षित ने बताया कि प्रदेश के अनेक विद्यालयों और संस्थानों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी भी लंबे समय से विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को समय पर वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन अनेक आउटसोर्स कर्मचारी मात्र 8300 रुपये मासिक वेतन पर कार्य करने को मजबूर हैं। इतनी कम आय में परिवार का भरण-पोषण करना अत्यंत कठिन हो गया है। भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करना कर्मचारियों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। इसके बावजूद उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम दिखाई नहीं दे रहा है।

Warning of a protest : कैशलेस सुविधा से वंचित शिक्षणेत्तर कर्मचारियों में रोष, आंदोलन की चेतावनी दी गई
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संघ पदाधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा पूर्व में आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए निगम गठन की बात कही गई थी। इस घोषणा से कर्मचारियों में उम्मीद जगी थी कि उनकी सेवा शर्तों में सुधार होगा और उन्हें बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। हालांकि अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दी है। कर्मचारियों का आरोप है कि निगम गठन की घोषणा केवल आश्वासन तक सीमित रह गई है और धरातल पर उसका कोई प्रभाव नजर नहीं आ रहा है।

शिक्षणेत्तर संघ का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में कर्मचारियों के कल्याण के प्रति गंभीर है तो उसे सभी वर्गों के कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। स्वास्थ्य सुरक्षा, समय पर वेतन भुगतान और रोजगार की स्थिरता जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रत्येक कर्मचारी का अधिकार हैं। इन अधिकारों की उपेक्षा से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है।

अभिषेक कुमार दीक्षित ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और आउटसोर्स कर्मियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही संगठन की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें प्रदेश और जिला स्तर के पदाधिकारियों के साथ विचार-विमर्श कर आगामी रणनीति तैयार की जाएगी।

संघ के अनुसार प्रस्तावित बैठक में विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और अन्य लोकतांत्रिक माध्यमों से सरकार तक कर्मचारियों की आवाज पहुंचाई जाएगी। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।

शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था केवल शिक्षकों के प्रयासों से नहीं चलती, बल्कि इसमें शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भी समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए सुविधाओं और अधिकारों के मामले में उनके साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। कर्मचारियों का कहना है कि वे भी सरकार से सम्मानजनक व्यवहार और समान अवसर की अपेक्षा रखते हैं।

संघ ने सरकार से मांग की है कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत सभी लिपिकों एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को तत्काल कैशलेस स्वास्थ्य योजना का लाभ दिया जाए। साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन, सेवा सुरक्षा और अन्य सुविधाओं से संबंधित लंबित मुद्दों का भी शीघ्र समाधान किया जाए।

इस अवसर पर जिला मंत्री शिवकुमार गौतम और कोषाध्यक्ष अशोक सविता भी उपस्थित रहे। दोनों पदाधिकारियों ने कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीर बताते हुए कहा कि संगठन कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए पूरी मजबूती के साथ संघर्ष करेगा। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों की जायज मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने की अपील की।

फिलहाल शिक्षणेत्तर कर्मचारियों में सरकार की नीतियों को लेकर असंतोष का माहौल बना हुआ है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर क्या निर्णय लेती है और प्रस्तावित संगठनात्मक बैठक के बाद आंदोलन की दिशा क्या रूप लेती है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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