The administration has also become alert : फर्जी पत्रकारों की बढ़ती बाढ़ से जनता परेशान, प्रशासन भी हुआ सतर्क

फतेहपुर। जनपद में इन दिनों पत्रकारिता के नाम पर एक गंभीर और चिंताजनक स्थिति देखने को मिल रही है, जिसे लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्षेत्र में कथित रूप से फर्जी पत्रकारों की बढ़ती संख्या ने न केवल आम जनता और व्यापारियों को परेशान किया है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के सामने भी एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्व स्वयं को पत्रकार बताकर छोटे-बड़े प्रतिष्ठानों, दुकानों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अनावश्यक हस्तक्षेप कर रहे हैं। इनकी गतिविधियों को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आरोप है कि ऐसे लोग समाचार संकलन के नाम पर दबाव बनाते हैं और कई बार इससे व्यापारियों एवं आम नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।
जानकारी के अनुसार, जनपद के कई क्षेत्रों में ऐसे व्यक्तियों की सक्रियता देखी जा रही है, जिनके पास न तो किसी मान्यता प्राप्त मीडिया संस्थान की स्पष्ट पहचान है और न ही पत्रकारिता से जुड़ी कोई औपचारिक पृष्ठभूमि। इसके बावजूद वे स्वयं को पत्रकार बताकर विभिन्न स्थानों पर पहुंचते हैं और वीडियो व अन्य सामग्री तैयार करते हैं।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि कुछ लोग पत्रकारिता की आड़ में अनावश्यक पूछताछ करते हैं और कई बार दबाव की स्थिति उत्पन्न कर देते हैं। इससे व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ता है। दुकानदारों का कहना है कि ऐसे लोगों की वजह से असली और ईमानदार पत्रकारों की छवि भी प्रभावित हो रही है।
इस पूरे मामले को लेकर जनपद में यह चर्चा भी है कि फर्जी पहचान पत्र और अनधिकृत प्रेस कार्ड का उपयोग कर कुछ लोग स्वयं को मीडिया प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और सत्यापन की कमी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कई स्थानों पर यह भी देखा गया है कि कुछ लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर स्वयं को पत्रकार के रूप में प्रस्तुत करते हैं और घटनाओं को रिकॉर्ड कर प्रसारित करते हैं, लेकिन उनकी किसी भी मान्यता प्राप्त समाचार संस्था से कोई आधिकारिक संबद्धता नहीं होती।

स्थानीय लोगों का मानना है कि पत्रकारिता एक जिम्मेदार और सम्मानित पेशा है, जिसका उद्देश्य समाज को सही और निष्पक्ष जानकारी देना है। लेकिन कुछ व्यक्तियों द्वारा इसके दुरुपयोग से न केवल पत्रकारिता की गरिमा प्रभावित हो रही है, बल्कि जनता का विश्वास भी कमजोर हो रहा है।
व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों में सख्त जांच की जाए और केवल मान्यता प्राप्त पत्रकारों की ही पहचान सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि यदि हर थाना क्षेत्र में मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए तो इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, प्रशासनिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा की जा रही है। पुलिस और संबंधित विभागों को यह निर्देश देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है कि पत्रकारिता के नाम पर किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों पर नजर रखी जाए और आवश्यकता पड़ने पर कार्रवाई की जाए।
कुछ ईमानदार पत्रकारों ने भी इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि फर्जी पहचान के कारण वास्तविक पत्रकारों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगते हैं, जिससे पूरी पत्रकारिता व्यवस्था प्रभावित होती है। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारिता में पारदर्शिता और जिम्मेदारी बेहद जरूरी है।
स्थानीय स्तर पर यह सुझाव भी सामने आया है कि मीडिया प्रतिनिधियों का एक सत्यापन तंत्र तैयार किया जाए, जिससे केवल अधिकृत और पंजीकृत पत्रकार ही किसी भी प्रशासनिक या सार्वजनिक कार्य में भाग ले सकें। इससे न केवल व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि अनावश्यक हस्तक्षेप भी कम होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण हर व्यक्ति के पास सूचना साझा करने का माध्यम उपलब्ध है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि हर व्यक्ति पत्रकार बन जाए। पत्रकारिता के लिए प्रशिक्षण, नैतिकता और जिम्मेदारी आवश्यक है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा गलत तरीके से स्वयं को पत्रकार बताकर दबाव बनाने या अवैध गतिविधियों में शामिल होने की शिकायत प्राप्त होती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जनपद में इस मुद्दे को लेकर जन जागरूकता की भी आवश्यकता महसूस की जा रही है। लोगों का मानना है कि यदि आम नागरिक भी सतर्क रहें और केवल अधिकृत पत्रकारों को ही पहचानें, तो इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
कुल मिलाकर फतेहपुर में फर्जी पत्रकारिता को लेकर उठी यह चिंता न केवल एक सामाजिक मुद्दा है, बल्कि यह पत्रकारिता की विश्वसनीयता और पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ गंभीर विषय है। प्रशासन, मीडिया संस्थानों और आम जनता के संयुक्त प्रयासों से ही इस पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। आने वाले समय में इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है ताकि वास्तविक पत्रकारिता की गरिमा बनी रहे और समाज को सही एवं निष्पक्ष जानकारी मिलती रहे।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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