The ongoing game of mining : अवैध मिट्टी खनन पर प्रशासन मौन, जेसीबी से दिनरात जारी खनन का खेल

फतेहपुर। जनपद में अवैध मिट्टी खनन का कारोबार लगातार फल-फूल रहा है। शासन और प्रशासन की सख्ती के दावों के बावजूद कई क्षेत्रों में खुलेआम जेसीबी मशीनों से मिट्टी का खनन किया जा रहा है। ताजा मामला विजयीपुर ब्लॉक एवं किशनपुर थाना क्षेत्र की पहाड़पुर पुलिस चौकी के अंतर्गत आने वाले थुरियानी मजरा रायपुर भसरौल का है, जहां खेतों से बड़े पैमाने पर मिट्टी खनन किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्थाओं और अवैध खनन पर नियंत्रण के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में दिन और रात लगातार जेसीबी मशीनों के माध्यम से मिट्टी की खुदाई की जा रही है। खनन के बाद मिट्टी को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर मुख्य मार्गों से विभिन्न स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा कार्य खुलेआम हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और अधिकारी इस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इससे यह धारणा बन रही है कि अवैध खनन करने वालों को कहीं न कहीं संरक्षण प्राप्त है।
वायरल वीडियो में कथित रूप से खेतों में जेसीबी मशीन मिट्टी की खुदाई करती दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से यह गतिविधि चल रही है और शिकायतों के बावजूद स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। लोगों का आरोप है कि अवैध खनन के कारण खेतों की संरचना प्रभावित हो रही है और कृषि योग्य भूमि को भी नुकसान पहुंच रहा है।
मामले में जब खनन कार्य में लगे लोगों से परमिट के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो चालक ने कथित रूप से बताया कि क्षेत्र में बिना अनुमति के भी मिट्टी खनन का कार्य होता है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ऐसे बयान प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। यदि बिना अनुमति के खनन किया जा रहा है तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि राजस्व हानि का भी कारण बन रहा है।
जानकारों का मानना है कि अवैध खनन से सरकार को भारी आर्थिक नुकसान होता है। खनिज संपदा से प्राप्त होने वाला राजस्व राज्य की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। जब बिना अनुमति या निर्धारित मानकों से अधिक खनन किया जाता है तो सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचता है। इसके साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन पर्यावरणीय असंतुलन को भी बढ़ावा देता है।
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन से क्षेत्र में पर्यावरण संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। अत्यधिक खुदाई के कारण भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होती है, भूजल स्तर पर असर पड़ता है और आसपास के क्षेत्रों में कटाव की समस्या उत्पन्न हो सकती है। कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन जाने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। बरसात के मौसम में ऐसे गड्ढे जलभराव का कारण बन सकते हैं, जिससे पशुओं और लोगों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडराता है।

प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री द्वारा समय-समय पर अवैध खनन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। प्रशासनिक बैठकों में भी अवैध खनन रोकने पर विशेष जोर दिया जाता है। इसके बावजूद यदि जमीनी स्तर पर खनन जारी है तो यह निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित दिखाई देती है, जबकि वास्तविकता में खनन का कारोबार बदस्तूर जारी है।
सूत्रों के अनुसार अवैध खनन के इस पूरे खेल में कई स्तरों पर लोगों की भूमिका होने की आशंका जताई जाती है। स्थानीय चर्चाओं में यह भी कहा जाता है कि खनन कार्य करने वाले लोग नियमों की आड़ में या कथित साठगांठ के माध्यम से अपना कारोबार चलाते हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है और इसकी जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा ही की जा सकती है।
नियमों के अनुसार मिट्टी खनन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। परमिट लेने वाले व्यक्ति को ऐसी जगह से मिट्टी निकालनी होती है जहां सड़क, सार्वजनिक मार्ग, भवन या अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को कोई नुकसान न पहुंचे। साथ ही निर्धारित सीमा से अधिक मिट्टी निकालना अवैध खनन की श्रेणी में आता है। खनन के दौरान आसपास के खेतों और पर्यावरण को भी किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए।
नियम यह भी कहते हैं कि यदि खनन क्षेत्र में पेड़-पौधे मौजूद हों तो उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। पर्यावरणीय मानकों और स्वच्छता संबंधी नियमों का पालन करना भी आवश्यक होता है। खनन कार्य के लिए संबंधित विभागों से अनुमति प्राप्त करना तथा निर्धारित शर्तों का पालन करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। यदि कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि वायरल वीडियो और शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि कहीं अवैध खनन हो रहा है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में इस प्रकार की गतिविधियां दोबारा न हों। ग्रामीणों का कहना है कि केवल औपचारिक कार्रवाई के बजाय स्थायी समाधान की आवश्यकता है।
वहीं दूसरी ओर संबंधित पक्ष का कहना है कि क्षेत्र में अवैध खनन नहीं हो रहा है और जहां भी मिट्टी की खुदाई की जा रही है, वहां आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई है। उनका दावा है कि नियमों का पालन करते हुए ही कार्य किया जा रहा है। हालांकि इस दावे की वास्तविक स्थिति की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों की शिकायतों ने पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया है। अब लोगों की निगाहें प्रशासन और खनन विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो सच्चाई सामने आ सकेगी और यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि क्षेत्र में हो रहा खनन पूरी तरह वैध है या फिर नियमों की अनदेखी कर अवैध तरीके से मिट्टी निकाली जा रही है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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