Devotees thronged the venue : श्रद्धा और भक्ति के बीच आर्यिका संघ का भव्य मंगल विहार संपन्न, उमड़े श्रद्धालु

दमोह। जैन धर्म की आध्यात्मिक परंपराओं और साधना संस्कृति को सजीव रूप प्रदान करते हुए सोमवार को पूज्य 105 आर्यिका रत्नश्री साधना मति माताजी एवं पूज्य साधु मति माताजी के सान्निध्य में एक भव्य मंगल विहार का आयोजन किया गया। यह मंगल विहार शहर के प्राचीन एवं ऐतिहासिक दि. नशिया जी मंदिर से प्रारंभ होकर जबलपुर नाका स्थित आम चौपरा के जैन मंदिर तक संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु, धर्मप्रेमी एवं भक्तजन उपस्थित रहे और पदविहार में सहभागी बनकर धर्म लाभ अर्जित किया। पूरे मार्ग में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह का वातावरण देखने को मिला।
निर्धारित मुहूर्त के अनुसार दोपहर लगभग 4 बजे आर्यिका संघ का विहार दि. नशिया जी मंदिर से प्रारंभ हुआ। जैसे ही पूज्य माताजी का पदविहार प्रारंभ हुआ, श्रद्धालुओं ने जयकारों और मंगलगीतों के माध्यम से उनका स्वागत किया। विहार मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पवर्षा कर आर्यिका संघ के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति व्यक्त की गई। अनेक श्रद्धालु नंगे पांव आर्यिका संघ के साथ चलकर पुण्य लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से इस यात्रा में शामिल हुए।
जैन धर्म में साधु-साध्वियों और आर्यिका संघ का विहार अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक की यात्रा नहीं होती, बल्कि यह संयम, तप, त्याग और आत्मकल्याण का संदेश समाज तक पहुंचाने का माध्यम भी होती है। आर्यिका माताजी के पदविहार को देखने और उनके दर्शन करने के लिए मार्ग में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए। लोगों ने विनम्रता के साथ वंदना कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा धर्म की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
मंगल विहार के दौरान शहर का वातावरण पूरी तरह धार्मिक रंग में रंगा नजर आया। मार्ग के दोनों ओर खड़े श्रद्धालु माताजी के दर्शन के लिए उत्सुक दिखाई दिए। कई स्थानों पर समाज के लोगों द्वारा प्रभावना का आयोजन किया गया, जहां श्रद्धालुओं को धार्मिक साहित्य, प्रसाद एवं अन्य सामग्री वितरित की गई। इससे न केवल धार्मिक उत्साह का संचार हुआ बल्कि समाज में एकता और सहयोग की भावना भी मजबूत हुई।
विहार के दौरान आर्यिका संघ स्टेशन चौराहा स्थित जैन भवन भी पहुंचा, जहां अल्प विश्राम की व्यवस्था की गई थी। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर माताजी के दर्शन किए तथा वंदना का लाभ प्राप्त किया। जैन भवन में कुछ समय के विश्राम के दौरान श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया और धर्मचर्चा के माध्यम से जैन दर्शन की शिक्षाओं को समझने का प्रयास किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने कहा कि संतों और आर्यिकाओं का सान्निध्य जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है और आत्मिक शांति का मार्ग दिखाता है।
जैन समाज के वरिष्ठजनों ने बताया कि आर्यिका संघ का नगर में आगमन समाज के लिए अत्यंत सौभाग्य की बात है। ऐसे अवसर विरले ही प्राप्त होते हैं जब तप, त्याग और संयम की प्रतिमूर्ति आर्यिकाओं के दर्शन और सान्निध्य का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि समाज के युवाओं को भी ऐसे धार्मिक आयोजनों से प्रेरणा लेनी चाहिए और अपने जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाना चाहिए।

विहार यात्रा के दौरान महिलाओं, युवाओं और बच्चों की विशेष भागीदारी देखने को मिली। अनेक परिवार अपने छोटे बच्चों को लेकर दर्शन के लिए पहुंचे ताकि वे बचपन से ही धार्मिक संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों से परिचित हो सकें। समाज की महिलाओं ने भी भक्ति गीतों और मंगलाचरण के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बनाए रखा। पूरे मार्ग में अनुशासन और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
शाम लगभग 5:45 बजे आर्यिका संघ जबलपुर नाका स्थित आम चौपरा के जैन मंदिर पहुंचा, जहां श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत किया। मंदिर परिसर में पहले से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। आर्यिका माताजी के पहुंचते ही मंदिर परिसर जयघोषों और धार्मिक उद्घोषों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने विनम्र भाव से वंदना कर धर्म लाभ प्राप्त किया और अपने जीवन में धर्म, संयम तथा सदाचार को अपनाने का संकल्प दोहराया।
धार्मिक विद्वानों का मानना है कि ऐसे मंगल विहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं होते, बल्कि समाज को नैतिकता, अहिंसा, करुणा और आत्मसंयम का संदेश भी देते हैं। जैन धर्म का मूल आधार अहिंसा और आत्मकल्याण है तथा आर्यिका संघ का जीवन इन सिद्धांतों का जीवंत उदाहरण माना जाता है। उनके पदविहार से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और लोगों को आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा मिलती है।
कार्यक्रम के दौरान समाज के अनेक गणमान्य नागरिक, धार्मिक संगठन के पदाधिकारी तथा विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने इस आयोजन को अत्यंत सफल और प्रेरणादायक बताया। श्रद्धालुओं का कहना था कि आर्यिका संघ का दर्शन और सान्निध्य प्राप्त करना उनके लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहा। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी समाजजनों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
दमोह में आयोजित यह मंगल विहार श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम उदाहरण बन गया। पूरे आयोजन के दौरान धर्म, अनुशासन और समर्पण की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। श्रद्धालुओं ने न केवल आर्यिका संघ के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया, बल्कि जैन धर्म के मूल सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प भी लिया। इस प्रकार दि. नशिया जी मंदिर से जबलपुर नाका स्थित जैन मंदिर तक संपन्न हुआ यह मंगल विहार नगर के धार्मिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण और स्मरणीय आयोजन के रूप में दर्ज हो गया।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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