Governor Bagde : शिक्षण संस्थाएं बच्चों में नैतिकता, सहनशीलता और संस्कार निर्माण का कार्य करे : राज्यपाल बागडे

जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि शिक्षा ही ज्ञान का बड़ा आधार है। इसके जरिए भारत को विश्वभर में श्रेष्ठ बनाने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के टेलेंट की दुनिया भर में मांग है। उन्होंने बच्चों की बौद्धिक क्षमता विशिष्ट क्षेत्रों में विकसित किए जाने पर जोर दिया। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत उन्होंने प्राचीन भारतीय ज्ञान के आलोक में विकसित भारत के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने शिक्षण संस्थाओं में बच्चों में नैतिकता, सहनशीलता और संस्कार निर्माण के लिए कार्य किए जाने की आवश्यकता जताई। राज्यपाल बागडे मंगलवार को सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित “एजुकेशन समिट” में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा से विकास को सही मायने में गति दी जा सकती है। संवाद से सुसंवाद होता है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां जो आविष्कार हुए, उनका श्रेय पश्चिम ने ले लिया। उन्होंने कहा कि भारत में सबसे पहला विमान मुंबई के संस्कृत विद्वान शिवकर बापूजी तलपड़े ने उड़ाया परंतु श्रेय राइट बंधुओं को मिला। इसी तरह गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत भास्कराचार्य था, दुनिया में न्यूटन प्रसिद्ध हुए। उन्होंने भारत के प्राचीन ज्ञान का नई पीढ़ी में प्रसार किए जाने पर जोर दिया राज्यपाल ने कहा कि विश्व में जब कहीं विश्वविद्यालय नहीं था, तब भारत में 19 विश्वविद्यालय थे। उन्होंने कहा कि ईस्वी सन 725 में रावल पिंडी में तक्षशिला विश्वविद्यालय विश्व का श्रेष्ठ शिक्षा केंद्र था। राज्यपाल ने बप्पा रावल की महानता की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने अरबों को भारत से खदेड़ा। उनके नाम से ही बाद में पाकिस्तान का रावल पिंडी स्थान हुआ। उन्होंने कहा कि गुरुकुल पद्धति भारत की श्रेष्ठ शिक्षा पद्धति रही है।

गुरुकुल में किसी एक विषय का नहीं सभी विषयों का ज्ञान दिया जाता था। उन्होंने “गुरुकुल गए रघुराई अल्प काल में शिक्षा पाई” चौपाई की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान राम ने गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त की, इसी से वह मर्यादा पुरुषोत्तम बने।
राज्यपाल ने प्राचीन ज्ञान परम्परा की चर्चा करते हुए कहा कि विश्व को शून्य का ज्ञान भारत ने दिया। उसी से पूरी दुनिया को गिनती करना आया। दशमलव का ज्ञान, व्याकरण आदि से भारत ने ही विश्व को शिक्षा दी।
उन्होंने जवाहर लाल नेहरू की डिस्कवरी ऑफ इंडिया की चर्चा करते हुए कहा कि मैक्समूलर ने उसमें लिखा है कि महाभारत और रामायण जैसे दो अद्भुत ग्रन्थ भारत ने विश्व को दिए। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान, आज का बर्मा, श्रीलंका, कंबोडिया, गांधार आदि प्राचीन भारत में ही थे। कश्मीर का शारदा पीठ देश में ज्ञान का बहुत बड़ा केंद्र था।
बागडे ने विनोबा भावे के कहे का उल्लेख करते हुए कहा कि देश आजाद होने के साथ ही जैसे अंग्रेजों का झंडा उतारा गया और बदला गया उसी तरह देश की शिक्षा नीति बदली जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि मैकाले ने जो शिक्षा पद्धति हमें दी उसका मूल आधार ही यही था कि अंग्रेजी के ज्ञान के साथ पश्चिम को श्रेष्ठ साबित किया जाए। उन्होंने कहा कि अंग्रेज चाहते थे कि घरेलू उद्योग बंद किए जाएं, ताकि भारत के लोग भूखे रहे और सदा अंग्रेजों पर आश्रित रहे और गुलाम बने रहे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीयता के मूल्यों में गूंथी हुई है। इसके आलोक में देश को हर क्षेत्र में अग्रणी करने के प्रयास किए जाएं।
इससे पहले राज्यपाल ने वहां शैक्षिक उन्नयन और कौशल शिक्षा से जुड़े विभिन्न स्टालों का भी अवलोकन किया।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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