Ground-level Examples and Inspiration : प्रणय रॉय का जज्बा, उम्र के पार भी जारी पत्रकारिता की जमीनी मिसाल और प्रेरणा ?

Ground-level Examples and Inspiration : प्रणय रॉय का जज्बा, उम्र के पार भी जारी पत्रकारिता की जमीनी मिसाल और प्रेरणा

Ground-level Examples and Inspiration : प्रणय रॉय का जज्बा, उम्र के पार भी जारी पत्रकारिता की जमीनी मिसाल और प्रेरणा
Ground-level Examples and Inspiration : प्रणय रॉय का जज्बा, उम्र के पार भी जारी पत्रकारिता की जमीनी मिसाल और प्रेरणा

भारतीय पत्रकारिता की दुनिया में Prannoy Roy का नाम एक मजबूत और सम्मानित पहचान के रूप में जाना जाता है। उन्होंने न केवल देश में टीवी न्यूज़ पत्रकारिता को नई दिशा दी, बल्कि उसे एक विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक स्वरूप भी प्रदान किया। आज जब उनकी उम्र 70 के पार है, तब भी उनका जमीनी स्तर पर सक्रिय रहना कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

हाल ही में उनकी कुछ तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, जिनमें वे पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल को कवर करते नजर आ रहे हैं। एक हाथ में माइक और दूसरे हाथ में मोबाइल फोन लिए वे साधारण तरीके से रिपोर्टिंग करते दिखाई देते हैं। यह दृश्य इस बात को दर्शाता है कि पत्रकारिता केवल स्टूडियो और बड़े संसाधनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जमीनी हकीकत से जुड़ी एक निरंतर प्रक्रिया है।

Prannoy Roy को अक्सर भारत में टेलीविजन न्यूज़ के अग्रदूतों में गिना जाता है। NDTV की स्थापना के साथ उन्होंने भारतीय मीडिया को एक नया आयाम दिया। उस समय जब टीवी न्यूज़ अपने शुरुआती दौर में था, उन्होंने निष्पक्षता, तथ्यों पर आधारित विश्लेषण और संतुलित रिपोर्टिंग की परंपरा स्थापित की।

हालांकि, समय के साथ मीडिया इंडस्ट्री में कई बदलाव आए और NDTV के स्वामित्व को लेकर भी बड़े कॉर्पोरेट घटनाक्रम सामने आए। लेकिन इन सबके बावजूद, Prannoy Roy ने पत्रकारिता से दूरी नहीं बनाई। उन्होंने डिजिटल माध्यम को अपनाया और नए प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपनी बात और रिपोर्टिंग को जारी रखा।

यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि उनसे “चैनल छीन लिया गया”, क्योंकि मीडिया स्वामित्व में बदलाव अक्सर जटिल व्यावसायिक और कानूनी प्रक्रियाओं का परिणाम होते हैं। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि परिस्थितियों में बदलाव के बावजूद उनका पत्रकारिता के प्रति समर्पण कम नहीं हुआ।

आज के डिजिटल युग में जब यूट्यूब और सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म्स तेजी से उभर रहे हैं, Prannoy Roy ने भी इनका उपयोग करते हुए अपनी मौजूदगी बनाए रखी है। वे दिखाते हैं कि सच्ची पत्रकारिता के लिए बड़े स्टूडियो या भारी संसाधनों की जरूरत नहीं होती—जरूरत होती है जमीनी सच्चाई तक पहुंचने की।

Ground-level Examples and Inspiration : प्रणय रॉय का जज्बा, उम्र के पार भी जारी पत्रकारिता की जमीनी मिसाल और प्रेरणा
Ground-level Examples and Inspiration : प्रणय रॉय का जज्बा, उम्र के पार भी जारी पत्रकारिता की जमीनी मिसाल और प्रेरणा

उनकी यह सक्रियता एक महत्वपूर्ण संदेश देती है—पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी और जुनून है। जब कोई व्यक्ति इस पेशे को अपने जीवन का उद्देश्य बना लेता है, तो उम्र, संसाधन या परिस्थितियां उसे रोक नहीं पातीं।

पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में चुनावी कवरेज करना अपने आप में चुनौतीपूर्ण होता है। यहां की राजनीति, सामाजिक समीकरण और जमीनी हालात को समझने के लिए अनुभव और धैर्य की जरूरत होती है। ऐसे में Prannoy Roy का खुद मैदान में उतरना यह दर्शाता है कि वे अभी भी पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों—सत्य, निष्पक्षता और जमीनी जुड़ाव—को महत्व देते हैं।

उनकी कार्यशैली नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए भी एक सीख है। आज जब कई लोग पत्रकारिता को केवल ग्लैमर या लोकप्रियता के नजरिए से देखते हैं, ऐसे में उनका यह उदाहरण बताता है कि असली पत्रकारिता क्या होती है—वह जो लोगों के बीच जाकर, उनकी समस्याओं को समझकर और सच्चाई को सामने लाकर की जाती है।

हालांकि, यह भी जरूरी है कि हम किसी भी व्यक्ति या घटना को भावनाओं में बहकर पूरी तरह आदर्श या एकतरफा रूप में न देखें। हर व्यक्ति की अपनी सीमाएं और चुनौतियां होती हैं, और मीडिया इंडस्ट्री भी कई तरह के दबावों और जटिलताओं से घिरी होती है। लेकिन इसके बावजूद, Prannoy Roy का यह समर्पण निश्चित रूप से सराहनीय है।

उनका यह संदेश स्पष्ट है कि यदि आप अपने काम से प्यार करते हैं, तो आप किसी भी परिस्थिति में उसे जारी रख सकते हैं। चाहे वह बड़े चैनल का स्टूडियो हो या फिर एक साधारण मोबाइल फोन—माध्यम बदल सकते हैं, लेकिन उद्देश्य नहीं।

अंततः, Prannoy Roy की यह सक्रियता भारतीय पत्रकारिता के उस मूल स्वरूप की याद दिलाती है, जिसमें सच्चाई को सामने लाने का साहस और समाज के प्रति जिम्मेदारी सर्वोपरि होती है। यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उस पेशे की पहचान है, जो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है।

इस तरह, उनका जज्बा और समर्पण यह साबित करता है कि पत्रकारिता केवल एक करियर नहीं, बल्कि एक मिशन है—और यह मिशन तब तक जारी रहना चाहिए, जब तक समाज को सच्चाई जानने की जरूरत है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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