Instructions for action : दमोह जनसुनवाई में 350 मामलों का निराकरण, कलेक्टर ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

दमोह। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित जनसुनवाई में इस बार बड़ी संख्या में नागरिक अपनी समस्याओं को लेकर पहुंचे, जहां कुल मिलाकर लगभग 350 आवेदनों पर सुनवाई की गई। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की प्राथमिकता “पहले आवेदन, पहले निराकरण” की नीति के तहत सभी प्रकरणों का समयबद्ध और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करना है।
जनसुनवाई के दौरान 313 आवेदन आधिकारिक रूप से पंजीकृत हुए, जबकि कई नागरिक बिना पंजीकरण के भी अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे। सभी मामलों को मिलाकर लगभग 350 प्रकरणों पर विचार किया गया। कलेक्टर ने बताया कि सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित रहे और संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने यह भी बताया कि जिन अधिकारियों—तहसीलदार, नायब तहसीलदार और एसडीएम—की अनुपस्थिति रही, उनसे दूरभाष और व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क कर तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही यह भी कहा गया कि सभी लंबित मामलों पर साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी ताकि किसी भी शिकायत का अनावश्यक विलंब न हो।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य आम नागरिकों को त्वरित न्याय और समाधान उपलब्ध कराना है, इसलिए अनुभाग स्तर पर जनसुनवाई को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। कलेक्टर ने नागरिकों से अपील की कि वे अपनी समस्याएं पहले अनुभाग स्तर पर प्रस्तुत करें, जिससे उनका निराकरण वहीं शीघ्रता से हो सके और जिला स्तर पर अनावश्यक भीड़ न बढ़े। इससे नागरिकों के समय और आर्थिक संसाधनों दोनों की बचत होगी।
कलेक्टर यादव ने यह भी कहा कि जनसुनवाई व्यवस्था पर लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है, जिसका प्रमाण प्रत्येक सप्ताह आने वाले आवेदनों की संख्या में वृद्धि है। प्रशासन का प्रयास है कि प्रत्येक आवेदन को गंभीरता से लेते हुए उसका निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान किया जाए।
इस जनसुनवाई में सबसे अधिक मामले राजस्व विभाग से जुड़े सामने आए, विशेषकर सीमांकन प्रकरणों की संख्या अधिक रही। इस पर कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाते हुए “पहले आवेदन, पहले निराकरण” की व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदार यह सुनिश्चित करें कि आवेदनों का निपटारा उसी क्रम में किया जाए, जिस क्रम में वे प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति का कार्य प्रभाव, दबाव या सिफारिश के आधार पर प्राथमिकता से नहीं किया जाएगा। सभी मामलों में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों से नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट भी मांगी जाएगी।
जनसुनवाई के दौरान बिजली विभाग से जुड़ी शिकायतें भी बड़ी संख्या में सामने आईं। एक मामले में उपभोक्ता को चार लाख रुपये का बिजली बिल भेजे जाने का मुद्दा सामने आया, जिसे उपभोक्ता फोरम द्वारा जांच के बाद लगभग डेढ़ लाख रुपये सही माना गया। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी व्यक्त करते हुए मध्य प्रदेश विद्युत मंडल (MPSEB) के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बिलिंग प्रक्रिया पूरी तरह वास्तविक खपत के आधार पर ही की जाए।

उन्होंने कहा कि गलत बिलिंग और बाद में संशोधन की प्रक्रिया उपभोक्ताओं के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनती है। इससे लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जो पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने अधिकारियों को अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की कड़ी निगरानी करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य है कि किसी भी उपभोक्ता को अनावश्यक परेशानी न हो और सभी सेवाएं पारदर्शी एवं समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराई जाएं। गलत बिलिंग या लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी।
जनसुनवाई के दौरान एक भावनात्मक मामला भी सामने आया, जिसमें बंदा टोला निवासी वृद्ध किशोरी लाल ने अपनी समस्या रखी। कलेक्टर ने उनकी बात ध्यानपूर्वक सुनी और उन्हें भोजन भी कराया। वृद्ध ने बताया कि गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा उनके साथ मारपीट कर उनका सामान ले जाने से रोका जा रहा है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने तत्काल थाना प्रभारी (टीआई) को कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही जबेरा के नायब तहसीलदार को वृद्ध के साथ मौके पर भेजकर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि वृद्ध व्यक्ति सुरक्षित रूप से अपना सामान लेकर आवश्यक स्थान तक पहुंच सके।
इस त्वरित कार्रवाई से यह संदेश भी गया कि प्रशासन जनसुनवाई को केवल औपचारिकता नहीं मानता, बल्कि प्रत्येक नागरिक की समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान की दिशा में कार्य करता है।
कुल मिलाकर दमोह की इस जनसुनवाई में प्रशासनिक सक्रियता और जवाबदेही का स्पष्ट उदाहरण देखने को मिला। जहां एक ओर बड़े पैमाने पर राजस्व और बिजली से जुड़े मामलों पर चर्चा हुई, वहीं दूसरी ओर मानवीय संवेदनाओं से जुड़े मामलों पर भी तत्काल कार्रवाई की गई।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने अंत में कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता जनता की समस्याओं का त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करना है और इसी दिशा में सभी विभागों को लगातार कार्य करना होगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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