Questions about the system : मुत्तौर शराब ठेके पर अनियमितताओं के आरोप, कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल

फतेहपुर। ललौली थाना क्षेत्र के मुत्तौर-कोर्रा कनक मार्ग स्थित अंग्रेजी शराब का ठेका इन दिनों जिले में चर्चा और विवाद का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों, शिकायतकर्ताओं और क्षेत्रीय सूत्रों द्वारा लगाए गए आरोपों ने न केवल संबंधित शराब ठेके की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था और कार्रवाई की प्रक्रिया को भी कटघरे में ला खड़ा किया है। शराब की बोतलों में कथित डायलोशन, बारकोड और ढक्कन बदलने, निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर बिक्री तथा तय समय सीमा से इतर शराब बेचे जाने जैसे गंभीर आरोपों के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यह मामला कोई नया नहीं है। आरोप है कि लंबे समय से शराब ठेके पर विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों को शिकायतें भी दीं, जबकि मीडिया में भी इस संबंध में खबरें प्रकाशित होती रहीं। इसके बावजूद ऐसी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई, जिससे यह संदेश जाता कि विभाग और प्रशासन इन शिकायतों को गंभीरता से ले रहा है।
पिछले सप्ताह की एक घटना ने इस पूरे मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया। बताया जाता है कि सुबह करीब छह बजे किए गए एक निरीक्षण के दौरान दुकान का मुख्य शटर बंद था, लेकिन बगल के दरवाजे से कथित रूप से शराब की बिक्री जारी थी। मौके पर कुछ लोग शराब खरीदने के लिए मौजूद बताए गए। आरोप यह भी लगाया गया कि निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर शराब बेची जा रही थी। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस घटना की चर्चा व्यापक रूप से की जा रही है।
सबसे गंभीर आरोप शराब की बोतलों में कथित छेड़छाड़ को लेकर लगाए जा रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कुछ ब्रांडेड शराब की बोतलों में डायलोशन यानी शराब की गुणवत्ता और मात्रा में बदलाव करने का खेल चल रहा था। इसके साथ ही क्वार्टर और हाफ बोतलों के ढक्कन तथा बारकोड बदलने जैसी गतिविधियों के आरोप भी लगाए गए हैं। यदि जांच में ऐसे आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी का मामला नहीं होगा, बल्कि आबकारी नियमों और राजस्व संबंधी कानूनों के उल्लंघन का भी गंभीर विषय माना जाएगा।
ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि कुछ लोगों की मिलीभगत से पूरा नेटवर्क संचालित किया जाता है। आरोपों के अनुसार शराब ठेके से जुड़े कुछ कर्मचारियों और स्थानीय स्तर पर सक्रिय व्यक्तियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
इस पूरे प्रकरण में सबसे अधिक सवाल आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहे हैं। क्षेत्रीय नागरिक पूछ रहे हैं कि यदि कथित रूप से इतने गंभीर स्तर की अनियमितताएं लंबे समय से हो रही थीं, तो नियमित निरीक्षण और जांच के दौरान ये बातें अधिकारियों की नजर में क्यों नहीं आईं। यदि शिकायतें प्राप्त हुई थीं तो उन पर क्या कार्रवाई की गई और जांच के परिणाम क्या रहे, यह भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर बार शिकायतों के बाद कुछ दिनों तक हलचल दिखाई देती है, लेकिन बाद में मामला शांत हो जाता है। क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि कथित जांचों के बाद केवल सेल्समैनों को बदलकर मामले को समाप्त मान लिया गया। इससे लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि यदि आरोप इतने गंभीर थे तो केवल कर्मचारियों का स्थानांतरण या बदलाव पर्याप्त कार्रवाई कैसे माना जा सकता है। जनता जवाबदेही तय किए जाने की मांग कर रही है।
क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार संबंधित कंपनी जिले में कई अंग्रेजी और देशी शराब की दुकानों का संचालन करती है। ऐसे में स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि यदि एक दुकान पर गंभीर आरोप सामने आए हैं तो अन्य दुकानों की भी गहन जांच कराई जानी चाहिए। उनका मानना है कि निष्पक्ष जांच होने पर शराब कारोबार से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
आबकारी नियमों के जानकारों का कहना है कि शराब की बोतलों में छेड़छाड़, नकली बारकोड का उपयोग, ढक्कन बदलना या डायलोशन जैसी गतिविधियां साबित होने पर यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है। ऐसे मामलों में लाइसेंस निलंबन, लाइसेंस निरस्तीकरण, भारी आर्थिक दंड और आपराधिक मुकदमा दर्ज किए जाने तक की कार्रवाई संभव है। इसलिए किसी भी शिकायत की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच बेहद आवश्यक मानी जाती है।
लोगों का यह भी कहना है कि यदि कथित अनियमितताओं की जानकारी पहले से थी तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई। क्षेत्रीय नागरिक चाहते हैं कि केवल वर्तमान स्थिति की जांच ही नहीं, बल्कि यह भी पता लगाया जाए कि शिकायतों के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी। साथ ही निगरानी तंत्र की भूमिका और जवाबदेही भी तय की जाए।
जनता की मांग है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच के दौरान शराब दुकान के स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का परीक्षण किया जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
फिलहाल मुत्तौर स्थित अंग्रेजी शराब का ठेका जिले भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। क्षेत्रीय लोगों की निगाहें अब जिलाधिकारी, पुलिस प्रशासन और वरिष्ठ आबकारी अधिकारियों पर टिकी हैं। जनता को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या प्रशासन इस मामले को एक सामान्य शिकायत मानकर आगे बढ़ जाएगा या फिर गहराई से जांच कर उन सभी तथ्यों को सार्वजनिक करेगा जिनकी चर्चा लंबे समय से क्षेत्र में होती रही है। जनता केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसी पारदर्शी और प्रभावी कार्रवाई चाहती है जो भविष्य के लिए एक उदाहरण बन सके और शराब कारोबार में नियमों के पालन को सुनिश्चित कर सके।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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