Questions raised about the working style : भ्रष्टाचारी अभियंता बिजेंद्र सिंह के संरक्षण में फल-फूल रहे अवैध निर्माण, एमडीए की कार्यशैली पर उठे सवाल

मेरठ। मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) के जोन डी-2 क्षेत्र में अवैध निर्माणों का सिलसिला लगातार जारी है। ताजा मामला पीवीएस मॉल के पीछे स्थित प्रवेश विहार क्षेत्र का है, जहां लगभग 300 गज से अधिक क्षेत्रफल में एक कमर्शियल फैक्ट्री का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि यह निर्माण बिना आवश्यक स्वीकृतियों के किया जा रहा है और इसके बावजूद एमडीए की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
सूत्रों के अनुसार इस अवैध निर्माण को लेकर क्षेत्रीय अधिकारियों और अभियंताओं को कई बार शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन निर्माण कार्य लगातार जारी है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि एमडीए के अभियंता बिजेंद्र सिंह के संरक्षण और कथित मिलीभगत के कारण इस निर्माण पर कार्रवाई नहीं हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्राधिकरण वास्तव में नियमों के पालन के प्रति गंभीर होता तो निर्माण के शुरुआती चरण में ही उसे रोक दिया जाता।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि संबंधित अवैध निर्माण को लेकर विभागीय स्तर पर नोटिस जारी होने की चर्चा भी है, लेकिन उसके बावजूद निर्माण कार्य पर कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। इससे यह सवाल उठ रहा है कि जब विभाग को निर्माण की जानकारी है तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। लोगों का मानना है कि केवल औपचारिकताएं पूरी करके मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
जोन डी-2 क्षेत्र में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अवैध कॉलोनियों, व्यावसायिक भवनों और फैक्ट्रियों के निर्माण को लेकर कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं। नागरिकों का कहना है कि अवैध निर्माणों के कारण न केवल शहर की नियोजित विकास व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि सरकार को राजस्व की भी भारी क्षति उठानी पड़ रही है। यदि निर्माण नियमों के अनुसार स्वीकृत कराए जाएं तो विकास शुल्क, मानचित्र स्वीकृति शुल्क और अन्य करों के माध्यम से सरकार को राजस्व प्राप्त होता है। लेकिन अवैध निर्माणों के चलते यह राजस्व प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे अवैध निर्माण यह संकेत देते हैं कि कहीं न कहीं विभागीय निगरानी व्यवस्था कमजोर है। नागरिकों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई की जाए तो ऐसे निर्माणों को रोका जा सकता है। लेकिन वर्तमान स्थिति में ऐसा प्रतीत होता है कि नियमों का पालन कराने वाली एजेंसी स्वयं प्रभावी भूमिका निभाने में असफल साबित हो रही है।
वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यदि किसी सामान्य नागरिक द्वारा छोटे स्तर पर भी निर्माण संबंधी नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो विभाग तुरंत कार्रवाई करता है, लेकिन बड़े स्तर के व्यावसायिक निर्माणों के मामलों में विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। इससे आम जनता में असंतोष बढ़ रहा है और प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

आरोपों के केंद्र में रहे अभियंता बिजेंद्र सिंह को लेकर भी क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके कार्यकाल में कई विवादित निर्माण सामने आए हैं। नागरिकों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शहर के सुनियोजित विकास के लिए निर्माण नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक है। अवैध निर्माण न केवल यातायात, जल निकासी और पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित करते हैं, बल्कि भविष्य में सुरक्षा संबंधी समस्याएं भी पैदा कर सकते हैं। इसलिए विकास प्राधिकरणों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे मामलों पर समय रहते कार्रवाई करें।
अब लोगों की निगाहें मेरठ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पर टिकी हुई हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि उच्च स्तर पर मामले का संज्ञान लिया जाए तो न केवल इस निर्माण की वास्तविक स्थिति सामने आएगी बल्कि विभागीय जवाबदेही भी तय होगी। जनता यह जानना चाहती है कि क्या संबंधित अवैध निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
शहरवासियों का मानना है कि अवैध निर्माणों पर अंकुश लगाने के लिए केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई भी आवश्यक है। यदि दोषियों के विरुद्ध कठोर कदम उठाए जाएं तो भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है।
फिलहाल प्रवेश विहार में चल रहे इस कथित अवैध कमर्शियल फैक्ट्री निर्माण को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शिकायतें लगातार की जा रही हैं और विभाग को जानकारी है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या फिर अवैध निर्माणों का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मेरठ विकास प्राधिकरण इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या अवैध निर्माणों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई देखने को मिलती है। शहर की जनता अब जवाब और कार्रवाई दोनों की अपेक्षा कर रही है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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