Seminar held : अन्तर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर आयोजित गोष्ठी

दिनांक 12 जून 2026 को अन्तर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर
- जनपद हापुड़ में बाल श्रम के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने तथा समाज को इस गंभीर सामाजिक समस्या के प्रति संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पूर्वाह्न 11:00 बजे चेम्बर परिसर, चण्डी रोड, हापुड़ के सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें संयुक्त व्यापार मंडल जनपद हापुड़ के अध्यक्ष श्री ललित अग्रवाल, व्यापार मंडल के अन्य पदाधिकारी, व्यापारी बंधु, उद्योगपति, श्रम विभाग के अधिकारी तथा गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल एवं किशोर श्रम पर प्रभावी रोक लगाने, समाज को कानून के प्रावधानों से अवगत कराने तथा बच्चों के अधिकारों की रक्षा के प्रति जनमानस को जागरूक करना था। गोष्ठी को संबोधित करते हुए श्री आर.एल. स्वर्णकार, सहायक श्रमायुक्त, हापुड़ ने कहा कि बाल श्रम केवल एक कानूनी अपराध ही नहीं, बल्कि एक सामाजिक बुराई भी है, जो बच्चों के शारीरिक, मानसिक, शैक्षिक और सामाजिक विकास को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने, सुरक्षित वातावरण में रहने और अपने भविष्य का निर्माण करने का अधिकार है, इसलिए समाज के प्रत्येक वर्ग का यह दायित्व है कि वह बाल श्रम जैसी कुप्रथा को समाप्त करने में अपना सक्रिय योगदान दे। उन्होंने उपस्थित व्यापारियों, उद्योग बंधुओं, सेवायोजकों एवं आम नागरिकों से अपील की कि वे अपने-अपने प्रतिष्ठानों, दुकानों, उद्योगों अथवा अन्य कार्यस्थलों पर 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे या किशोर को कार्य पर न रखें। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो वह कानून का उल्लंघन करता है और उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति को कहीं भी कोई बालक अथवा किशोर श्रमिक के रूप में कार्य करता हुआ दिखाई दे तो उसकी सूचना तत्काल श्रम विभाग को दी जानी चाहिए, ताकि संबंधित नियोक्ता के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सके और उस बच्चे को श्रम से मुक्त कराकर शिक्षा एवं विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। गोष्ठी के दौरान उपस्थित व्यापार मंडल के पदाधिकारियों एवं सदस्यों को बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 तथा यथा संशोधित अधिनियम, 2016 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को श्रम से मुक्त कर उन्हें शिक्षा और विकास के अवसर उपलब्ध कराना है। संशोधित अधिनियम 2016 के अंतर्गत बाल श्रम को रोकने के लिए दंडात्मक प्रावधानों को और अधिक कठोर बनाया गया है, जिससे इस सामाजिक बुराई पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। गोष्ठी में यह जानकारी दी गई कि अधिनियम की धारा 14(1क) के अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति किसी बालक को कानून के प्रावधानों के उल्लंघन में नियोजित करता है या उससे कार्य करवाता है, तो उसे न्यूनतम छह माह तथा अधिकतम दो वर्ष तक के कारावास की सजा दी जा सकती है। इसके अतिरिक्त ऐसे व्यक्ति पर बीस हजार रुपये से लेकर पचास हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है अथवा कारावास और जुर्माना दोनों दंड एक साथ दिए जा सकते हैं।

इसी प्रकार यदि कोई अधिष्ठाता अथवा सेवायोजक अधिनियम या उसके अंतर्गत बनाए गए
- नियमों के अन्य प्रावधानों का पालन करने में असफल रहता है या उनका उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध एक माह तक के कारावास या दस हजार रुपये तक के जुर्माने अथवा दोनों प्रकार के दंड का प्रावधान किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकार बाल श्रम उन्मूलन के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और कानून का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। गोष्ठी में उपस्थित व्यापारियों एवं उद्योग बंधुओं ने भी बाल श्रम की समस्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह स्वीकार किया कि आर्थिक लाभ के लिए बच्चों से कार्य कराना न केवल अमानवीय है, बल्कि राष्ट्र के विकास में भी बाधक है। कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित सदस्यों ने बाल श्रम के विरुद्ध जागरूकता फैलाने तथा अपने-अपने क्षेत्र में कानून का पालन सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। उन्होंने यह भी वचन दिया कि वे अपने प्रतिष्ठानों में किसी भी बालक या किशोर को कार्य पर नहीं रखेंगे तथा यदि कहीं बाल श्रम होता हुआ दिखाई देगा तो उसकी सूचना संबंधित विभाग को देंगे। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि बाल श्रम के कारण बच्चों की शिक्षा बाधित होती है, उनका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है तथा वे अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं। इसलिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर इस समस्या के समाधान के लिए कार्य करना होगा। वक्ताओं ने कहा कि जब तक समाज स्वयं जागरूक होकर बाल श्रम के विरुद्ध खड़ा नहीं होगा, तब तक केवल कानून के माध्यम से इस समस्या का पूर्ण समाधान संभव नहीं है। गोष्ठी में उपस्थित सभी लोगों ने बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया तथा यह संदेश दिया कि प्रत्येक बच्चा राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है, इसलिए उसके बचपन की रक्षा करना हम सभी का नैतिक और सामाजिक दायित्व है। कार्यक्रम के अंत में संयुक्त व्यापार मंडल के अध्यक्ष श्री ललित अग्रवाल ने सभी उपस्थित अधिकारियों, व्यापारियों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बाल श्रम मुक्त समाज का निर्माण तभी संभव है जब शासन, प्रशासन, व्यापारी वर्ग और आम नागरिक मिलकर इस दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे ताकि अधिक से अधिक लोगों को बाल श्रम निषेध संबंधी कानूनों एवं उनके महत्व की जानकारी प्राप्त हो सके। इस अवसर पर श्रीमती सुधा तोमर, श्रम प्रवर्तन अधिकारी हापुड़ सहित अन्य अधिकारियों एवं गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बनाया। यह गोष्ठी बाल श्रम उन्मूलन के प्रति समाज की प्रतिबद्धता को दर्शाने वाली एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई, जिसने उपस्थित लोगों को न केवल कानून की जानकारी प्रदान की बल्कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा हेतु सक्रिय भूमिका निभाने के लिए भी प्रेरित किया। बाल श्रम मुक्त भारत के निर्माण के लिए इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं और समाज के प्रत्येक नागरिक को इस अभियान में सहभागी बनकर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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