Women’s Rights : आर्य कन्या इंटर कॉलेज में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित, छात्राओं को बाल विवाह, महिला अधिकार और कानूनी सहायता की दी विस्तृत जानकारी

हापुड़, 18 जुलाई 2026। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हापुड़ द्वारा समाज में विधिक जागरूकता बढ़ाने और छात्राओं को उनके अधिकारों एवं कानूनों की जानकारी देने के उद्देश्य से शनिवार को आर्य कन्या इंटर कॉलेज में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हापुड़ के अध्यक्ष एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश माननीय अजय कुमार प्रथम के निर्देशन तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय सौरभ कुमार वर्मा के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को उनके संवैधानिक अधिकारों, महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों, बाल विवाह निषेध अधिनियम, बाल श्रम कानून, शिक्षा के अधिकार तथा निःशुल्क विधिक सहायता जैसी महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्थाओं के प्रति जागरूक करना था। शिविर में बड़ी संख्या में छात्राओं, शिक्षिकाओं एवं विद्यालय के स्टाफ ने भाग लिया और कानूनी विषयों पर उपयोगी जानकारी प्राप्त की।
शिविर को संबोधित करते हुए पैरालीगल वालंटियर (पीएलवी) अशोक कुमार ने छात्राओं को बाल विवाह निषेध अधिनियम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत में बाल विवाह पूरी तरह प्रतिबंधित है और कानून के अनुसार लड़की की विवाह योग्य न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा लड़के की 21 वर्ष निर्धारित की गई है। यदि कोई व्यक्ति किसी नाबालिग का विवाह कराता है, उसमें सहयोग करता है अथवा इस प्रकार के आयोजन में शामिल होता है, तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाती है।
उन्होंने कहा कि बाल विवाह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि इससे बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि यदि कहीं बाल विवाह की सूचना मिले तो तत्काल संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों अथवा पुलिस को इसकी जानकारी दें।
पीएलवी अशोक कुमार ने बाल श्रम निषेध कानून के संबंध में भी छात्राओं को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि किसी भी नाबालिग बच्चे से मजदूरी या अन्य प्रकार का श्रम कराना कानूनन अपराध है। बच्चों का अधिकार है कि वे शिक्षा प्राप्त करें, स्वस्थ वातावरण में रहें और अपने व्यक्तित्व का समुचित विकास करें। उन्होंने कहा कि यदि किसी बच्चे से जबरन श्रम कराया जा रहा हो तो इसकी सूचना संबंधित विभाग या हेल्पलाइन पर अवश्य दी जानी चाहिए।
कार्यक्रम में छात्राओं को महिला सुरक्षा और आत्मरक्षा से जुड़े कानूनी अधिकारों की भी जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि यदि किसी महिला या बालिका के साथ शारीरिक, मानसिक अथवा यौन उत्पीड़न होता है तो उसे चुप नहीं रहना चाहिए बल्कि तत्काल पुलिस या संबंधित हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। उन्होंने छात्राओं को आत्मविश्वास के साथ अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया।
शिविर के दौरान विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी गई। छात्राओं को बताया गया कि किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की हेल्पलाइन 15100, महिला हेल्पलाइन 1090 तथा आपातकालीन सहायता के लिए 112 पर संपर्क किया जा सकता है। इन सेवाओं का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को समय पर सहायता और सुरक्षा प्रदान करना है।
कार्यक्रम में पीएलवी अनुज कुमार ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल अधिकार ही नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास का सबसे सशक्त माध्यम भी है। इसलिए किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।

उन्होंने दहेज प्रतिषेध कानून और घरेलू हिंसा अधिनियम की जानकारी देते हुए बताया कि महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार का उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना या दहेज की मांग कानूनन अपराध है। यदि किसी महिला के साथ इस प्रकार की घटना होती है तो वह कानूनी सहायता लेकर अपने अधिकारों की रक्षा कर सकती है।
अनुज कुमार ने छात्राओं को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता योजना के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर, जरूरतमंद, महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों तथा अन्य पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाता है ताकि कोई भी व्यक्ति आर्थिक अभाव के कारण न्याय से वंचित न रहे।
शिविर के दौरान छात्राओं ने भी कानूनी विषयों से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका पीएलवी द्वारा सरल और व्यवहारिक भाषा में उत्तर दिया गया। छात्राओं ने बाल विवाह, साइबर अपराध, महिला सुरक्षा, घरेलू हिंसा तथा कानूनी सहायता से संबंधित जिज्ञासाएं व्यक्त कीं, जिनका समाधान विशेषज्ञों ने विस्तार से किया।
विद्यालय की शिक्षिका अनीता जायसवाल, प्रीति अग्रवाल तथा अन्य शिक्षकों ने भी छात्राओं को कानून की जानकारी अपने दैनिक जीवन में अपनाने और किसी भी प्रकार के अन्याय का विरोध करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जागरूक नागरिक ही समाज को सुरक्षित और सशक्त बना सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित छात्राओं से अपील की गई कि वे स्वयं कानूनों की जानकारी रखें और अपने परिवार तथा समाज के अन्य लोगों को भी जागरूक करें। विशेष रूप से बाल विवाह, बाल श्रम, महिला उत्पीड़न और शिक्षा से जुड़े अधिकारों के प्रति जनजागरूकता फैलाने का संकल्प लेने पर बल दिया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हापुड़ द्वारा आयोजित यह विधिक साक्षरता शिविर छात्राओं के लिए अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक साबित हुआ। कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें अपने अधिकारों, कानूनी सुरक्षा और निःशुल्क न्यायिक सहायता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। प्राधिकरण ने भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की बात कही, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग तक कानून की सही जानकारी पहुंच सके और न्याय सभी के लिए सुलभ बन सके।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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