Farmers in Distress : फतेहपुर में लेखपालों की कार्यशैली पर सवाल, भूमि सत्यापन में देरी से किसान परेशान

फतेहपुर, 2026। जनपद में राजस्व विभाग के अंतर्गत कार्यरत लेखपालों की कार्यशैली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेष रूप से एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) में गेहूं बिक्री हेतु आवश्यक भूमि सत्यापन प्रक्रिया को लेकर किसानों में भारी असंतोष देखा जा रहा है। किसानों का आरोप है कि सत्यापन कार्य में अनावश्यक देरी की जा रही है, जिससे उन्हें बार-बार विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और उनकी फसल बिक्री प्रभावित हो रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बहुआ विकासखंड के हरियापुर और हरिरामपुर क्षेत्र में किसानों को भूमि सत्यापन के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। कई किसानों का कहना है कि उन्होंने एफसीआई में गेहूं बिक्री के लिए आवश्यक दस्तावेज समय पर जमा कर दिए, लेकिन इसके बावजूद लेखपालों द्वारा समय पर सत्यापन नहीं किया गया, जिससे उनकी खरीद प्रक्रिया बाधित हो गई।
किसानों ने आरोप लगाया है कि भूमि सत्यापन की प्रक्रिया में असमानता देखने को मिल रही है। जिन मामलों में कथित रूप से लेन-देन या सिफारिश जैसी स्थितियां होती हैं, वहां कार्य तेजी से हो जाता है, जबकि सामान्य किसान लगातार चक्कर लगाने को मजबूर रहते हैं। इस स्थिति ने ग्रामीणों के बीच राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी क्रम में एक किसान ने बताया कि धान खरीद के समय भी उसका भूमि सत्यापन निरस्त कर दिया गया था, जिसके कारण उसे काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। अब गेहूं बिक्री के दौरान भी वही समस्या सामने आ रही है। किसान का कहना है कि उसने संबंधित लेखपाल से कई बार फोन पर संपर्क किया, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला और न ही समय पर सत्यापन किया गया।
किसान के अनुसार जब उसने बार-बार संपर्क कर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया, तो लेखपाल द्वारा यह कहा गया कि मोबाइल सही तरीके से उपयोग करना संभव नहीं है और संभवतः किसी अन्य व्यक्ति द्वारा गलती से जानकारी अपडेट कर दी गई होगी। इस तरह के जवाबों ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है और प्रशासनिक कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकार द्वारा स्पष्ट रूप से भूमि सत्यापन की जिम्मेदारी लेखपालों को सौंपी गई है, तो फिर कार्य में इस प्रकार की लापरवाही क्यों हो रही है। किसानों का आरोप है कि कई बार छोटी-छोटी प्रक्रियाओं के लिए भी उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उनका समय और संसाधन दोनों प्रभावित होते हैं।

यह भी आरोप सामने आए हैं कि कुछ लेखपालों की कार्यशैली पारदर्शी नहीं है और कार्य निष्पादन में भेदभाव किया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही है, लेकिन अब यह समस्या और अधिक गंभीर होती जा रही है क्योंकि सीधे तौर पर किसानों की आजीविका और फसल बिक्री इससे प्रभावित हो रही है।
इसी बीच खागा क्षेत्र में पूर्व में खसरा बनाने के नाम पर कथित रूप से रिश्वत लेने का एक वीडियो वायरल होने का मामला भी चर्चा में रहा है, जिसने राजस्व विभाग की छवि को और अधिक प्रभावित किया है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे मामलों से विभाग की कार्यप्रणाली पर जनता का भरोसा कमजोर होता जा रहा है।
किसानों ने यह भी बताया कि एफसीआई में गेहूं और धान की बिक्री के दौरान सबसे अधिक परेशानी राजस्व विभाग से संबंधित प्रक्रियाओं में आती है। खसरा-खतौनी, भूमि सत्यापन और अन्य दस्तावेजी औपचारिकताओं के लिए उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उनका दैनिक कार्य प्रभावित होता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और भूमि सत्यापन प्रक्रिया को समयबद्ध एवं पारदर्शी बनाया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी किसान को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए और सभी कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरे हों।
किसानों का कहना है कि यदि भूमि सत्यापन और संबंधित प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी नहीं बनाया गया तो आने वाले समय में समस्याएं और बढ़ सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, इसलिए उनकी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान होना चाहिए।
कुल मिलाकर फतेहपुर में भूमि सत्यापन को लेकर सामने आई यह स्थिति राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। किसानों की बढ़ती नाराजगी यह संकेत देती है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और अधिक व्यापक रूप ले सकती है। प्रशासन के लिए यह आवश्यक है कि वह इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि किसानों को राहत मिल सके और सरकारी योजनाओं का लाभ सही समय पर मिल सके।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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