Departmental silence raises concerns : फतेहपुर में चरागाह भूमि पर कब्जा व प्लाटिंग के आरोप, विभागीय चुप्पी से बढ़ी चिंता ?

Departmental silence raises concerns : फतेहपुर में चरागाह भूमि पर कब्जा व प्लाटिंग के आरोप, विभागीय चुप्पी से बढ़ी चिंता

Departmental silence raises concerns : फतेहपुर में चरागाह भूमि पर कब्जा व प्लाटिंग के आरोप, विभागीय चुप्पी से बढ़ी चिंता
Departmental silence raises concerns : फतेहपुर में चरागाह भूमि पर कब्जा व प्लाटिंग के आरोप, विभागीय चुप्पी से बढ़ी चिंता

फतेहपुर में सरकारी चरागाह भूमि पर कथित कब्जे और प्लाटिंग का खेल-❓ मलका गांव में भूमाफियाओं पर उठे सवाल, जिम्मेदार विभागों की चुप्पी से बढ़ी चिंता

फतेहपुर। जनपद की सदर तहसील अंतर्गत थाना राधानगर क्षेत्र के मलका गांव में सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे और प्लाटिंग को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव स्थित सरकारी चरागाह(पशुचर) भूमि पर कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा नियमों को ताक पररखकर प्लाटिंग की जा रही है और धीरे-धीरे सरकारी संपत्ति को निजी स्वामित्व में बदलने की कोशिश की जा रही है।ग्रामीणों के अनुसार गाटा संख्या 823 घा एवं 660 से संबंधित भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में चरागाह अथवा सार्वजनिक उपयोग की श्रेणी में दर्ज बताई जा रही है, उस पर बीते कुछ समय से बड़े पैमाने पर जमीन की नाप-जोख, रास्तों का निर्माण और प्लॉट काटने जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में राजस्व नियमों की अनदेखी की जा रही है।सरकारी जमीन पर उठ रहे गंभीरसवालग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि का उपयोग वर्षों से पशुओं के चरने औरसार्वजनिक हित के लिए होता रहा है, उसी भूमि पर अब कथित रूप से निजी प्लॉट तैयार किए जा रहे हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला होगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की सार्वजनिक उपयोगिता वाली भूमि के अस्तित्व पर भी बड़ा खतरा साबित हो सकता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में लंबे समय से चरागाह भूमि की कमी बनी हुई है और ऐसे में यदि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे को संरक्षण मिला तो भविष्य में पशुपालकों और ग्रामीणों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर उठे प्रश्नमामले की जानकारी प्राप्त करने और प्रशासनिक पक्ष जानने के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कई अधिकारियों का फोन रिसीव नहीं हो सका।

Departmental silence raises concerns : फतेहपुर में चरागाह भूमि पर कब्जा व प्लाटिंग के आरोप, विभागीय चुप्पी से बढ़ी चिंता
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इससे ग्रामीणों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इतने गंभीर आरोपों पर प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय क्यों नहीं दिखाई दे रही है।लोगों का सवाल है कि यदि सरकारी भूमि पर वास्तव में प्लाटिंग की जा रही है तो क्या स्थानीय राजस्व विभाग, लेखपाल, कानूनगो और तहसील प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है? और यदि जानकारी है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?क्या चलेगा बुलडोजर या बिक जाएगी सरकारी जमीन?ग्रामीणों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस भूमि का भविष्य क्या होगा? क्या प्रशासन मौके पर जांच कराकर सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराएगा या फिर कथित रूप से की जा रही प्लाटिंग के जरिए यह भूमि निजी हाथों में चली जाएगी?क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में विवाद और अधिक गहरा सकता है। कई ग्रामीणों ने निष्पक्ष राजस्व सर्वेक्षण और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।प्रशासन से ग्रामीणों की मांगग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि:गाटा संख्या 823 घा एवं 660 की तत्काल राजस्व जांच कराई जाए।भूमि की वर्तमान स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए।यदि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा या प्लाटिंग पाई जाती है तोश्रजिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।चरागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकरसार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाए।जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए ताकि ग्रामीणों के बीच फैली आशंकाओं का समाधान हो सके।जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाईमलका गांव में सरकारी भूमि पर कथित कब्जे और प्लाटिंग का मामला अबस्थानीय स्तर पर चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है। हालांकि आरोप गंभीर हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और राजस्व अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या उपाय किए जाते हैं–⁉️

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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