Devotees were overcome with emotion : स्वामी दीक्षानंद के 108वें जन्मोत्सव पर गूंजे वैदिक संदेश, श्रद्धालु हुए भावविभोर

गाजियाबाद। वैदिक धर्म, समाज सुधार और राष्ट्र निर्माण के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले विद्यमार्तण्ड स्वामी दीक्षानंद सरस्वती का 108वां जन्मोत्सव सोमवार को अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। आर्य समाज समर्पण शोध संस्थान, राजेंद्र नगर साहिबाबाद में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आर्य समाज के कार्यकर्ताओं, वैदिक विद्वानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं ने भाग लेकर स्वामी जी के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और यज्ञ के साथ हुआ। यज्ञ का संचालन आचार्य वीरेन्द्र विक्रम द्वारा किया गया। कार्यक्रम में नवाब सिंह आर्य एवं गीता आर्या, अविरल आर्य एवं सुकृति माथुर तथा मोहित भटनागर एवं आकांक्षा भटनागर मुख्य यज्ञमान रहे। वातावरण वैदिक मंत्रों की पवित्र ध्वनि से गुंजायमान हो उठा और उपस्थित श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर विश्व कल्याण की कामना की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रद्धानंद ने की। इस अवसर पर यज्ञ के ब्रह्मा एवं मुख्य वक्ता आचार्य वीरेन्द्र विक्रम ने स्वामी दीक्षानंद सरस्वती के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वामी दीक्षानंद का जीवन एक सच्चे राजऋषि के समान था। उनका व्यक्तित्व तेज, ओज और ज्ञान से परिपूर्ण था। उनकी वाणी में ऐसा प्रभाव था जो सुनने वालों को सत्य, धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता था।
आचार्य वीरेन्द्र विक्रम ने कहा कि स्वामी दीक्षानंद सरस्वती ने अपना संपूर्ण जीवन महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों के प्रचार-प्रसार और वैदिक संस्कृति के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने समाज में व्याप्त अंधविश्वास, कुरीतियों और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संघर्ष करते हुए वैदिक सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उनका साहित्य और उनके व्याख्यान आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने गुरुकुल प्रभात आश्रम मेरठ में आचार्य के रूप में कार्य करते हुए संस्था की प्रतिष्ठा और गौरव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में अनेक विद्यार्थियों ने वैदिक शिक्षा प्राप्त कर समाज सेवा का मार्ग अपनाया।
कार्यक्रम में भजन एवं वैदिक संगीत की विशेष प्रस्तुति भी हुई। सुप्रसिद्ध भजनोपदेशक अविरल माथुर, सुकृति आर्या एवं प्रवीण आर्य ने स्वामी दीक्षानंद के जीवन और वैदिक विचारों पर आधारित भजनों का मधुर गायन प्रस्तुत किया। ईश्वर भक्ति और वैदिक संदेशों से ओतप्रोत भजनों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कई श्रद्धालु भजनों के दौरान आध्यात्मिक भावनाओं में डूबे दिखाई दिए।

इस अवसर पर विद्वानों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. वाचस्पति मिश्र ने कहा कि मनुष्य के व्यक्तित्व का निर्माण संस्कारों से होता है। अच्छे संस्कार ही व्यक्ति को श्रेष्ठ नागरिक और आदर्श मानव बनाते हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी दीक्षानंद का जीवन संस्कारों, अनुशासन और आदर्शों का जीवंत उदाहरण था।
आचार्य पंडित विद्या प्रसाद मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए श्रद्धा, समय का सदुपयोग, अनुशासन और सिद्धांतों का पालन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि स्वामी दीक्षानंद के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण आधार यज्ञ था। वे पूर्ण वैदिक रीति से यज्ञ संपन्न कराते थे और लोगों को यज्ञ के वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराते थे।
वैदिक प्रवक्ता राकेश भटनागर ने स्वामी दीक्षानंद के जीवन से जुड़े अनेक प्रेरणादायक संस्मरण साझा किए। उन्होंने बताया कि स्वामी जी का जीवन सादगी, तप, त्याग और समाज सेवा का प्रतीक था। उनके व्यक्तित्व का प्रभाव इतना व्यापक था कि उनसे मिलने वाला प्रत्येक व्यक्ति प्रेरित हुए बिना नहीं रहता था।
वैदिक विद्वान रवीश वैदिक ने कहा कि स्वामी दीक्षानंद केवल एक महान वक्ता ही नहीं बल्कि एक उत्कृष्ट लेखक भी थे। उन्होंने अनेक लेखों और पुस्तकों के माध्यम से वैदिक विचारधारा को जनसामान्य तक पहुंचाया। उनके साहित्य से वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियां भी लाभान्वित होती रहेंगी।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने स्वामी दीक्षानंद के आदर्शों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि आज के समय में उनके विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। समाज को नैतिक मूल्यों, वैदिक शिक्षा और राष्ट्रभक्ति की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए उनके जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर सत्यवीर चौधरी, नरेन्द्र पांचाल, वीरेश रहेजा, गणेश प्रसाद, रमेश गाड़ी, शशिकांत, आदित्य आहूजा, जितेंद्र आर्य, प्रमोद चौधरी, के.के. यादव, देवेन्द्र आर्य, वेद प्रकाश शास्त्री, कविता राठी, सुभाष शर्मा, डॉ. प्रमोद सक्सेना, ओमपाल शास्त्री, सुरेश आर्य सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर शांतिपाठ किया गया तथा सभी उपस्थित लोगों के लिए प्रीतिभोज का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने स्वामी दीक्षानंद सरस्वती के जीवन और विचारों को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में आध्यात्मिकता, वैदिक संस्कृति और सामाजिक जागरूकता का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिसने उपस्थित जनसमूह को गहरी प्रेरणा प्रदान की।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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