Multi-storey building : दिल्ली अग्निकांड के बाद सख्ती के निर्देश, लखनऊ की बहुमंजिला इमारत पर उठे सवाल

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में एक बहुमंजिला इमारत को लेकर उठ रहे सवालों ने शहरी विकास, भवन सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हाल ही में दिल्ली में हुए भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशभर की हाई-राइज इमारतों, होटलों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक भवनों की फायर सेफ्टी व्यवस्था की व्यापक जांच कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और भवन सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके बावजूद राजधानी लखनऊ में एक बहुमंजिला भवन से जुड़ा मामला प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के अनुसार थाना आलमबाग क्षेत्र के सुजानपुरा इलाके में स्थित एक बहुमंजिला भवन को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है। बताया जा रहा है कि भवन का निर्माण निर्धारित मानकों और स्वीकृत नक्शे के विपरीत किया गया। इस मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के प्रवर्तन जोन-2 द्वारा कथित रूप से दो बार भवन को सील भी किया गया था। इसके बावजूद निर्माण गतिविधियां पूरी तरह नहीं रुकीं और भवन में आगे का कार्य जारी रहने की बात सामने आई।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार एलडीए द्वारा भवन स्वामी को नियमों के विपरीत निर्मित हिस्सों को स्वयं ध्वस्त करने के निर्देश भी दिए गए थे। बताया जाता है कि इसके लिए निर्धारित समय सीमा भी तय की गई थी। हालांकि आरोप है कि समय सीमा पूरी होने के बाद भी अवैध रूप से निर्मित हिस्सों को हटाने के बजाय भवन में फिनिशिंग और अन्य कार्य पूरे कर लिए गए। इससे यह प्रश्न उठने लगा है कि यदि कार्रवाई के आदेश जारी किए गए थे तो उनका पालन सुनिश्चित क्यों नहीं कराया गया।
क्षेत्रीय नागरिकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन निर्माण को लेकर लंबे समय से शिकायतें की जा रही थीं। उनका आरोप है कि संबंधित विभागों को अवगत कराने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। कुछ लोगों का यह भी दावा है कि भवन में अग्नि सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं और आवश्यक अनुमतियों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों द्वारा की जानी अभी शेष है।
दिल्ली में हुए हालिया अग्निकांड ने देशभर में भवन सुरक्षा और अग्निशमन मानकों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे मामलों में यह देखा गया है कि भवन निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी भविष्य में गंभीर हादसों का कारण बन सकती है। इसी कारण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि बहुमंजिला इमारतों में फायर सेफ्टी, आपातकालीन निकास मार्ग, विद्युत सुरक्षा, पार्किंग व्यवस्था और संरचनात्मक मजबूती जैसे मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है। यदि किसी भवन में इन नियमों की अनदेखी होती है तो वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसलिए निर्माण संबंधी नियम केवल औपचारिकता नहीं बल्कि जन सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार हैं।

लखनऊ के इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि यदि संबंधित विभाग ने सीलिंग, नोटिस और ध्वस्तीकरण जैसे कदम उठाए थे तो उसके बाद निर्माण कार्य को पूरी तरह रोकने में सफलता क्यों नहीं मिली। प्रशासनिक आदेशों के बावजूद यदि निर्माण गतिविधियां जारी रहीं, तो इसकी समीक्षा आवश्यक मानी जा रही है। यह भी देखा जाना चाहिए कि संबंधित अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और निगरानी की क्या व्यवस्था की गई थी।
शहरी नियोजन विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अवैध या मानकविहीन निर्माण पर समय रहते कार्रवाई होना आवश्यक है। यदि प्रारंभिक स्तर पर नियमों का पालन सुनिश्चित कर लिया जाए तो बाद में बड़ी समस्याओं और संभावित दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। साथ ही इससे कानून के प्रति लोगों का विश्वास भी मजबूत होता है।
स्थानीय निवासियों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। साथ ही भवन की तकनीकी और सुरक्षा संबंधी जांच कर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वह सभी आवश्यक मानकों का पालन करता है या नहीं।
इस मामले ने एक व्यापक प्रश्न भी खड़ा किया है कि क्या भवन निर्माण से जुड़े नियमों का पालन केवल कागजों तक सीमित रह जाता है या वास्तव में उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी होता है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रदेशभर में चल रहे निरीक्षण अभियानों के बीच लखनऊ का यह प्रकरण प्रशासनिक व्यवस्था की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि भवन निर्माण और फायर सेफ्टी से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल निगरानी, नियमित निरीक्षण और सार्वजनिक सूचना प्रणाली को और मजबूत किया जाना चाहिए। इससे नागरिकों को भी यह जानकारी मिल सकेगी कि उनके क्षेत्र में स्थित भवन आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
फिलहाल स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की निगाहें संबंधित विभागों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। सभी यह जानना चाहते हैं कि क्या इस मामले में विस्तृत जांच होगी, क्या भवन की सुरक्षा और वैधता की पुनः समीक्षा की जाएगी और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो उसके विरुद्ध क्या कदम उठाए जाएंगे।
जन सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्रशासनिक सतर्कता और समयबद्ध कार्रवाई अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि संबंधित विभाग पूरे मामले का वस्तुनिष्ठ परीक्षण कर तथ्यों के आधार पर निर्णय लेंगे। यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसके विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाएगी और यदि सभी आवश्यक मानकों का पालन किया गया है तो उसे भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाएगा।
दिल्ली अग्निकांड के बाद प्रदेश में भवन सुरक्षा को लेकर बढ़ी सतर्कता के बीच लखनऊ का यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि संबंधित विभाग इस प्रकरण में क्या कदम उठाते हैं और क्या जांच के माध्यम से उठ रहे सभी सवालों के स्पष्ट जवाब सामने आ पाते हैं।