Special Screening : टीबी उन्मूलन अभियान को मिली गति, होटलों और ढाबों पर स्वास्थ्य विभाग की विशेष स्क्रीनिंग

हापुड़, 03 जून 2026। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत संचालित 100 दिवसीय टीबी खोजी अभियान को जनपद हापुड़ में व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग द्वारा बुधवार को जनपद के विभिन्न होटलों, ढाबों एवं सार्वजनिक प्रतिष्ठानों पर विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य टीबी के संभावित रोगियों की समय रहते पहचान करना, उन्हें आवश्यक जांच एवं उपचार उपलब्ध कराना तथा आमजन को इस बीमारी के प्रति जागरूक बनाना था। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शिवा ढाबा, ब्रजघाट, बाबूगढ़ छावनी सहित कई प्रमुख स्थानों पर शिविर आयोजित कर होटल एवं ढाबा कर्मचारियों की स्वास्थ्य जांच की। अभियान के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने अपनी जांच कराई और स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का लाभ उठाया।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन वर्गों तक पहुंचना आवश्यक है जो लंबे समय तक सार्वजनिक संपर्क में रहते हैं। होटल और ढाबों में कार्यरत कर्मचारी प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों के संपर्क में आते हैं, इसलिए उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच न केवल उनके लिए बल्कि समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसी सोच के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इन प्रतिष्ठानों पर पहुंचकर कर्मचारियों की स्क्रीनिंग की और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी प्रदान की।
अभियान के दौरान आधुनिक हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीन की सहायता से कर्मचारियों की जांच की गई। यह तकनीक टीबी के शुरुआती संकेतों की पहचान करने में बेहद उपयोगी साबित हो रही है। इसके अतिरिक्त कर्मचारियों का ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन और बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) परीक्षण भी नि:शुल्क किया गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की समग्र जांच से न केवल टीबी बल्कि अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का भी समय रहते पता लगाया जा सकता है।
शिविर में उपस्थित वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक गजेन्द्र सिंह ने कर्मचारियों और स्थानीय लोगों को टीबी के लक्षणों, बचाव के उपायों और उपचार प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी रहती है, बलगम आता है, बलगम में खून दिखाई देता है, बुखार बना रहता है, वजन तेजी से कम होने लगता है या छाती में दर्द महसूस होता है, तो उसे तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच करानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि टीबी का उपचार सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है और समय पर इलाज शुरू होने पर रोगी पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग टीबी जैसी गंभीर बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य भारत को टीबी मुक्त बनाना है और इसके लिए जनसहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि टीबी के प्रति लोगों में फैली भ्रांतियों को दूर करना भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई बार लोग बीमारी छिपाते हैं या उपचार बीच में छोड़ देते हैं, जिससे समस्या और बढ़ जाती है। इसलिए लोगों को जागरूक करना आवश्यक है कि टीबी का इलाज संभव है और पूरा उपचार लेने से रोग पूरी तरह ठीक हो जाता है।

उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. कृष्ण कुमार शर्मा ने बताया कि टीबी एक संक्रामक रोग है, लेकिन समय पर पहचान और उचित उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति बताए गए लक्षणों का अनुभव कर रहा है तो उसे बिना देर किए जांच करानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार द्वारा टीबी रोगियों को उपचार के दौरान पोषण सहायता और अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं, ताकि मरीज बिना किसी आर्थिक बोझ के अपना इलाज पूरा कर सकें।
जिला पीपीएम कोऑर्डिनेटर सुशील चौधरी ने बताया कि भारत सरकार के निर्देशानुसार स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार गांव-गांव और शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि 100 दिवसीय खोजी अभियान का उद्देश्य ऐसे संभावित मरीजों की पहचान करना है जो अभी तक जांच या उपचार की प्रक्रिया से नहीं जुड़े हैं। समय पर जांच और उपचार से टीबी पर पूरी तरह विजय प्राप्त की जा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान को स्थानीय लोगों और होटल-ढाबा संचालकों का भी सहयोग मिल रहा है। कर्मचारियों ने बताया कि इस प्रकार की स्वास्थ्य जांच उनके लिए अत्यंत लाभदायक है क्योंकि व्यस्त कार्यशैली के कारण वे नियमित जांच नहीं करा पाते। स्वास्थ्य विभाग की पहल से उन्हें अपने स्वास्थ्य की स्थिति जानने और आवश्यक परामर्श प्राप्त करने का अवसर मिला।
शिविर के दौरान गजेंद्र पाल सिंह, रामसेवक, हसमत अली, राजकुमार तथा स्वास्थ्य विभाग की अन्य टीमों ने कर्मचारियों की जांच, पंजीकरण और जागरूकता गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। टीम ने लोगों को स्वच्छता, पौष्टिक आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और टीबी से बचाव के उपायों के बारे में भी जानकारी दी।
स्वास्थ्य विभाग का यह विशेष अभियान जनपद में टीबी उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी विभिन्न क्षेत्रों में इसी प्रकार के शिविर आयोजित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें। अभियान का उद्देश्य केवल रोगियों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार करना भी है। जनपद हापुड़ में चल रहा यह अभियान स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता और जनस्वास्थ्य के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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