Campaign Start : मलेरिया निरोधक माह का शुभारंभ, प्रचार रथ और रैली से जनजागरूकता अभियान प्रारंभ हुआ

दमोह। वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही मच्छरजनित रोगों की रोकथाम और जनसामान्य को जागरूक बनाने के उद्देश्य से जिले में मलेरिया निरोधक माह 2026 का शुभारंभ किया गया। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी पूरे जून माह को मलेरिया निरोधक माह के रूप में मनाया जा रहा है। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य मलेरिया एवं डेंगू जैसी गंभीर बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करना, रोगों की समय पर पहचान सुनिश्चित करना तथा प्रभावी रोकथाम एवं नियंत्रण उपायों को जन-जन तक पहुंचाना है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश कुमार अठया के निर्देशन में 3 जून को जिला मलेरिया कार्यालय से मलेरिया एवं डेंगू जनजागरूकता प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर जिला मलेरिया अधिकारी यामिनी सिलारपुरिया सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, आशा कार्यकर्ता और विभिन्न स्वास्थ्य इकाइयों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान जागरूकता रैली का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मियों ने भाग लेकर लोगों को मलेरिया और डेंगू से बचाव का संदेश दिया।
प्रचार रथ के माध्यम से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में माइकिंग कर नागरिकों को मच्छरजनित रोगों से बचाव संबंधी जानकारी प्रदान की गई। रथ से प्रसारित संदेशों में स्वच्छता बनाए रखने, घरों और आसपास पानी जमा न होने देने तथा समय पर जांच और उपचार कराने की अपील की गई। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा नागरिकों के बीच पंपलेट वितरित किए गए, जिनमें मलेरिया एवं डेंगू के लक्षण, बचाव के उपाय और उपचार संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वर्षा ऋतु के दौरान जलभराव और नमी बढ़ने से मच्छरों का प्रजनन तेजी से होता है। ऐसे में यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों के मामलों में वृद्धि हो सकती है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए मलेरिया निरोधक माह के अंतर्गत व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है।
जिला मलेरिया कार्यालय के अनुसार प्रचार रथ आगामी दिनों में जिले के सभी विकासखंडों, ग्राम पंचायतों तथा मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण करेगा। इस दौरान माइकिंग, पोस्टर, बैनर, पंपलेट और अन्य संचार माध्यमों के जरिए लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी संदेश पहुंचाए जाएंगे। विभाग का प्रयास है कि जिले का कोई भी क्षेत्र जागरूकता अभियान से अछूता न रहे।
अभियान के अंतर्गत फीवर सर्वे कैंपों का भी आयोजन किया जाएगा। शहरी क्षेत्र दमोह सहित जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मचारियों की टीम घर-घर जाकर बुखार से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान करेगी। ऐसे व्यक्तियों की तत्काल जांच कर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि मलेरिया के मामलों की शीघ्र पहचान हो सके और बीमारी को फैलने से रोका जा सके।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित एडवोकेसी कार्यशालाओं में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, विद्यालयों और विभिन्न समुदायों को भी जोड़ा जाएगा। इन कार्यशालाओं का उद्देश्य लोगों को मलेरिया और डेंगू की गंभीरता से अवगत कराना तथा सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना है। अधिकारियों का मानना है कि केवल सरकारी प्रयासों से इन रोगों पर नियंत्रण संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए जनसहयोग भी अत्यंत आवश्यक है।
जिला मलेरिया अधिकारी यामिनी सिलारपुरिया ने बताया कि अभियान को जिला स्तर से लेकर ब्लॉक, सब-सेंटर और ग्राम स्तर तक संचालित किया जा रहा है। सभी स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं तथा संबंधित कर्मचारियों को जांच किट, दवाइयां और आईईसी सामग्री उपलब्ध करा दी गई है। इससे अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने में सहायता मिलेगी।
उन्होंने बताया कि मलेरिया और डेंगू दोनों ही मच्छरों के माध्यम से फैलने वाले रोग हैं, लेकिन थोड़ी सी सावधानी बरतकर इनसे बचा जा सकता है। घरों की छतों, कूलरों, गमलों, टायरों और अन्य ऐसे स्थानों पर जहां पानी जमा हो सकता है, नियमित सफाई रखना बेहद जरूरी है। पानी जमा रहने से मच्छरों को पनपने का अवसर मिलता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मलेरिया के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, कमजोरी और शरीर में दर्द शामिल हैं। वहीं डेंगू में तेज बुखार, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते तथा प्लेटलेट्स की कमी जैसी समस्याएं देखी जा सकती हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए।
अभियान के दौरान नागरिकों को मच्छरदानी का उपयोग करने, पूरी बांह के कपड़े पहनने और शाम के समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह भी दी जा रही है। साथ ही मच्छर भगाने वाले साधनों का उपयोग करने तथा स्वच्छ वातावरण बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है।
जिला मलेरिया अधिकारी ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे अपने घरों और आसपास साफ-सफाई बनाए रखें तथा कहीं भी पानी जमा न होने दें। जिन स्थानों पर पानी निकालना संभव नहीं हो, वहां जला हुआ तेल या अन्य उपयुक्त उपायों का उपयोग कर मच्छरों के लार्वा को नष्ट किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से ही मलेरिया और डेंगू मुक्त जिले का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
मलेरिया निरोधक माह के तहत पूरे जून महीने विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम, रैलियां, कार्यशालाएं, स्वास्थ्य शिविर और सर्वे गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि उनकी रोकथाम के लिए समाज को जागरूक और जिम्मेदार बनाना भी है।
जिले में शुरू हुआ यह व्यापक अभियान मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों के खिलाफ एक मजबूत पहल माना जा रहा है। यदि नागरिक स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का पालन करें और स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, तो इन रोगों की रोकथाम संभव है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अभियान में सक्रिय सहयोग देकर स्वस्थ, सुरक्षित और मलेरिया-मुक्त दमोह के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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