Strong opposition : बहादुरगढ़ के कुटी जंगल में हरे आम के पेड़ों की अवैध कटाई पर आजाद अधिकार सेना का कड़ा विरोध ?

Strong opposition : बहादुरगढ़ के कुटी जंगल में हरे आम के पेड़ों की अवैध कटाई पर आजाद अधिकार सेना का कड़ा विरोध

Strong opposition : बहादुरगढ़ के कुटी जंगल में हरे आम के पेड़ों की अवैध कटाई पर आजाद अधिकार सेना का कड़ा विरोध
Strong opposition : बहादुरगढ़ के कुटी जंगल में हरे आम के पेड़ों की अवैध कटाई पर आजाद अधिकार सेना का कड़ा विरोध

स्थान बहादुरगढ़, दिनांक 5 मार्च 2026।

जनपद हापुड़ के थाना बहादुरगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कुटी जंगल में हरे आम के पेड़ों की अवैध कटाई की घटना सामने आने के बाद क्षेत्र में चिंता और आक्रोश का माहौल बन गया है। इस घटना को लेकर सामाजिक और पर्यावरणीय संगठनों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। आजाद अधिकार सेना ने इस पूरे मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। संगठन का कहना है कि रात के अंधेरे में लकड़ी माफियाओं द्वारा हरे-भरे आम के पेड़ों की कटाई की गई, जो न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही को भी दर्शाती है। आजाद अधिकार सेना के हापुड़ जिलाध्यक्ष सचिन रावल ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस समय देश और समाज पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूक हो रहा है, उसी समय कुछ लोग निजी लाभ के लिए प्रकृति का विनाश करने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि आम के हरे पेड़ न केवल पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय लोगों की आजीविका से भी जुड़े होते हैं। ऐसे में इन पेड़ों की अवैध कटाई केवल पेड़ों को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं है बल्कि यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करने वाली गंभीर समस्या है।

आजाद अधिकार सेना के जिलाध्यक्ष सचिन रावल ने बताया कि स्थानीय लोगों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कुटी जंगल क्षेत्र में रात के समय लकड़ी माफियाओं द्वारा हरे आम के कई पेड़ों को काट दिया गया। यह काम पूरी तरह से सुनियोजित तरीके से किया गया ताकि प्रशासन या वन विभाग को इसकी भनक न लग सके। सुबह जब स्थानीय ग्रामीणों ने जंगल के उस हिस्से में कटे हुए पेड़ों को देखा तो उन्हें गहरा दुख और गुस्सा हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र लंबे समय से लकड़ी माफियाओं की नजर में रहा है और समय-समय पर यहां अवैध कटाई की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन इसके बावजूद भी संबंधित विभाग इस पर प्रभावी रोक लगाने में सफल नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि वन विभाग की नियमित निगरानी और गश्त होती तो शायद इस प्रकार की घटना को रोका जा सकता था।

सचिन रावल ने कहा कि वन विभाग की जिम्मेदारी केवल पेड़ों की गिनती तक सीमित नहीं है बल्कि जंगलों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करना भी उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि इस प्रकार खुलेआम हरे-भरे पेड़ों की कटाई होती रहेगी तो आने वाले समय में पर्यावरण पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पेड़ हमारे जीवन का आधार हैं। ये हमें शुद्ध वायु प्रदान करते हैं, जलवायु को संतुलित रखते हैं, वर्षा चक्र को प्रभावित करते हैं और अनेक जीव-जंतुओं का आश्रय भी होते हैं। आम के पेड़ विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। आम के बागानों से किसानों और ग्रामीणों को आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत मिलता है। ऐसे में यदि इन पेड़ों को इस तरह अवैध रूप से काटा जाएगा तो इसका सीधा असर किसानों और स्थानीय लोगों की आजीविका पर भी पड़ेगा।

Strong opposition : बहादुरगढ़ के कुटी जंगल में हरे आम के पेड़ों की अवैध कटाई पर आजाद अधिकार सेना का कड़ा विरोध
Strong opposition : बहादुरगढ़ के कुटी जंगल में हरे आम के पेड़ों की अवैध कटाई पर आजाद अधिकार सेना का कड़ा विरोध

आजाद अधिकार सेना ने इस पूरे मामले में वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

संगठन का कहना है कि यदि जंगल क्षेत्र में रात के समय लकड़ी माफिया सक्रिय हैं तो यह वन विभाग की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। संगठन ने मांग की है कि इस मामले की गंभीरता से जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि आखिर किसकी मिलीभगत से इस प्रकार की अवैध कटाई संभव हुई। सचिन रावल ने कहा कि यदि समय रहते इस पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो लकड़ी माफियाओं के हौसले और बढ़ जाएंगे और भविष्य में और भी बड़े पैमाने पर जंगलों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि इस घटना की तुरंत जांच कराई जाए और जिन लोगों ने इस अवैध कटाई को अंजाम दिया है उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं दोबारा न हो सकें। इसके लिए जंगल क्षेत्रों में नियमित गश्त बढ़ाई जाए और स्थानीय लोगों की मदद से निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाए। आजाद अधिकार सेना का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि यह समाज के हर नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि समाज और प्रशासन मिलकर काम करें तो ही जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा संभव हो सकती है।

सचिन रावल ने कहा कि आजाद अधिकार सेना हमेशा से ही पर्यावरण संरक्षण और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय रही है। संगठन समय-समय पर ऐसे मुद्दों को उठाता रहा है जिनका सीधा संबंध समाज और प्रकृति से होता है। उन्होंने कहा कि संगठन इस मामले को लेकर पूरी तरह गंभीर है और यदि प्रशासन द्वारा जल्द कार्रवाई नहीं की जाती तो संगठन आगे भी इस मुद्दे को मजबूती से उठाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होकर प्रयास करना होगा, क्योंकि यदि पेड़ और जंगल सुरक्षित रहेंगे तभी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।

अंत में आजाद अधिकार सेना के हापुड़ जिलाध्यक्ष सचिन रावल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संगठन इस प्रकार की घटनाओं को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि दोषियों की जल्द से जल्द पहचान कर उन्हें कड़ी सजा दिलाई जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की हिम्मत न कर सके। उन्होंने क्षेत्र के नागरिकों से भी अपील की कि यदि उन्हें कहीं भी पेड़ों की अवैध कटाई या पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली कोई गतिविधि दिखाई दे तो उसकी जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें, ताकि समय रहते उस पर रोक लगाई जा सके और प्रकृति की रक्षा की जा सके।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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